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होमताजा खबरदेशसभी अंगदाताओं को संदेह की नजर से न देखें : मद्रास उच्च न्यायालय

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मद्रास उच्च न्यायालय ने चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को अंगदाताओं पर संदेह न करने का निर्देश दिया, गैर-रिश्तेदारों के अंगदान को मानवीय भावनाओं से जोड़कर अनुमति दी.

सभी अंगदाताओं को संदेह की नजर से न देखें : मद्रास उच्च न्यायालयZoom

अदालत मरीज और उसके संभावित दाता की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी

चेन्नई. मद्रास उच्च न्यायालय ने चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय को निर्देश दिया है कि वह अंगदाताओं को हर बार संदेह की नजर से न देखे. अदालत ने एक गुर्दा रोगी मरीज के लिए उसके मौसा के भाई द्वारा दान किए जाने वाले गुर्दे के प्रतिरोपण की अनुमति देने का आदेश दिया. न्यायमूर्ति पी. टी. आशा ने कहा कि गैर-रिश्तेदारों के बीच अंगदान को गणितीय कसौटी पर परखना या हमेशा संदेह करना अव्यावहारिक है.

अदालत एक मरीज और उसके संभावित दाता की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. याचिकाकर्ताओं ने प्राधिकरण समिति से प्रतिरोपण की मंजूरी देने का अनुरोध किया था. डोनर मरीज के मौसा के भाई हैं और उन्होंने स्वेच्छा से अपना गुर्दा दान करने की इच्छा जताई थी. समिति ने पहले आवेदन खारिज कर दिया था, क्योंकि रिश्ते को साबित नहीं माना गया. न्यायमूर्ति आशा ने अपने आदेश में कहा, ‘यह नहीं भूलना चाहिए कि कुछ करुणामय लोग परिवार के सदस्य या मित्र को नया जीवन देने के लिए निस्वार्थ भाव से अंग दान करते हैं. ऐसे में गैर-रिश्तेदारों के हर अंगदान को संदेह की दृष्टि से देखना या गणितीय मानकों पर जांचना उचित नहीं है.’ अदालत ने जोर दिया कि जीवन बचाना सबसे महत्वपूर्ण है. समिति को तीन हफ्ते में अनुमति देनी होगी.

भारत में गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा है. आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक देश में 82,285 लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में हैं, जिनमें 60,590 गुर्दे के लिए हैं. 2025 में कुल लगभग 20,000 प्रत्यारोपण हुए, लेकिन मृतकों से दान सिर्फ 18% हैं. 2024 में 13,476 गुर्दे प्रत्यारोपण हुए, जबकि प्रतीक्षा सूची में लाखों लोग हैं. 2020-2024 के बीच 2,805 लोग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में मर गए.
2024-2025 में मद्रास हाईकोर्ट ने कई मामलों में कहा कि प्यार और स्नेह जैसे भावनाओं को दस्तावेजों से साबित नहीं किया जा सकता. यह फैसला अंगदान को बढ़ावा देगा, क्योंकि भारत में मृतकों से दान बहुत कम है और जीवित दाताओं पर निर्भरता ज्यादा है.

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Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें

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