राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के क्षेत्रीय परिवहन की रफ्तार बढ़ाने के लिए 82 किलोमीटर लंबा नमो भारत कॉरिडोर पूरी तरह परिचालन के लिए तैयार है। रविवार 22 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली से मेरठ की 82 किलोमीटर की दूरी को मात्र 55 मिनट में पूरा करने में सक्षम 160 किलोमीटर प्रति घंटा की डिजाइन स्पीड वाली नमो भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर इस कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। सराय काले खां से मोदीपुरम तक फैला यह आधुनिक रैपिड ट्रांजिट कॉरिडोर एनसीआर और पश्चिमी यूपी के समग्र आर्थिक, सामाजिक और शहरी विकास को भी नई गति देगा।
शुभारंभ के साथ ही देश का यह पहला ऐसा नमो भारत कॉरिडोर बन जाएगा, जो अपनी पूरी लंबाई में एक सिरे से दूसरे सिरे तक संचालित होगा। परियोजना को नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) ने विकसित किया है, जो एनसीआर में रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) लागू करने वाली एजेंसी है। यह कॉरिडोर न केवल दिल्ली और मेरठ के बीच की दूरी को समय के लिहाज से समेटेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बीच आर्थिक, सामाजिक और शहरी संपर्क को भी नई गति देगा। 160 किलोमीटर प्रति घंटा की डिजाइन स्पीड वाली नमो भारत ट्रेनें इस रूट पर चलेंगी, जिससे दिल्ली–मेरठ का सफर लगभग 55 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
दिल्ली–गाजियाबाद–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की आधारशिला 8 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री ने रखी थी। कोविड-19 जैसी चुनौतियों के बावजूद परियोजना की गति कार्यदायी एजेंसियाें ने बनाए रखी। चार वर्षों के भीतर पहला सेक्शन तैयार कर लिया गया। 20 अक्तूबर 2023 को साहिबाबाद से दुहाई डिपो के बीच 17 किलोमीटर लंबे प्राथमिक खंड का उद्घाटन किया गया और देश की पहली नमो भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई। यह भारत में क्षेत्रीय रैपिड रेल सेवा की औपचारिक शुरुआत थी।
चरणबद्ध विस्तार से पूरा हुआ 82 किमी कॉरिडोर
6 मार्च 2024 को 17 किमी का खंड मोदीनगर उत्तर तक खोला गया, जिसे 18 अगस्त 2024 को मेरठ साउथ तक विस्तारित किया गया। 5 जनवरी 2025 को दिल्ली खंड में साहिबाबाद से न्यू अशोक नगर के बीच 13 किमी का हिस्सा चालू हुआ, जिससे नमो भारत ट्रेनों का दिल्ली में प्रवेश हुआ और आनंद विहार जैसे प्रमुख मल्टी-मॉडल हब को जोड़ा गया। अब 22 फरवरी 2026 को न्यू अशोक नगर से सराय काले खां तक 5 किमी तथा मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक 21 किमी के अंतिम खंड के शुरू होते ही पूरा 82.15 किमी कॉरिडोर एकसाथ संचालित हो जाएगा।
30 हजार करोड़ से अधिक का हुआ है खर्च…
82.15 किमी लंबाई में से लगभग 70 किमी एलिवेटेड और 12 किमी भूमिगत सेक्शन है। दिल्ली में करीब 14 किमी और उत्तर प्रदेश में करीब 68 किमी का हिस्सा है। दुहाई और मोदीपुरम में दो मेंटेनेंस डिपो बनाए गए हैं। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 30,274 करोड़ रुपये है। वित्तपोषण में एडीबी, एनडीबी और एआईआईबी जैसे बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों का सहयोग शामिल है, जबकि केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों का भी अंशदान है।
16 स्टेशन, एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं…
पूरे कॉरिडोर पर 16 नमो भारत स्टेशन विकसित किए गए हैं। इनमें जंगपुरा, सराय काले खां, न्यू अशोक नगर, आनंद विहार (भूमिगत), साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई, मुरादनगर, मोदीनगर साउथ, मोदीनगर नॉर्थ, मेरठ साउथ, शताब्दी नगर, बेगमपुल (भूमिगत) और मोदीपुरम शामिल हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर लगाए गए हैं, जो ट्रेन के दरवाजों के साथ समन्वित होकर खुलते-बंद होते हैं। ट्रेनों में 2 गुणे 2 सीटिंग व्यवस्था, प्रीमियम कोच, मोबाइल चार्जिंग सॉकेट, सीसीटीवी, फायर सेफ्टी सिस्टम और चयनात्मक डोर ओपनिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
मल्टी-मॉडल एकीकरण की सुविधा…
नमो भारत स्टेशनों को दिल्ली मेट्रो, रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़ा जा रहा है। एकीकृत क्यूआर टिकटिंग और एनसीएमसी कार्ड की सुविधा वन नेशन, वन कार्ड’ विजन को आगे बढ़ाती है। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह परियोजना अहम है। कॉरिडोर के संचालन से इस क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी 37 फीसदी से बढ़कर 63फीसदी होने का अनुमान है। सोलर पैनल, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग और वर्षा जल संचयन जैसी पहलें इसे सतत परिवहन मॉडल बनाती हैं।
आरआरटीएस नेटवर्क की पहली कड़ी..
दिल्ली–मेरठ कॉरिडोर को पूरे एनसीआर में प्रस्तावित आरआरटीएस नेटवर्क की पहली और सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दिल्ली–अलवर और दिल्ली–पानीपत जैसे अन्य कॉरिडोर विकसित किए जाने हैं। इस लिहाज से 22 फरवरी का उद्घाटन केवल एक रेल सेवा की शुरुआत नहीं, बल्कि एनसीआर में क्षेत्रीय परिवहन के नए मॉडल की स्थापना है।
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