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shani uttara bhadrapada nakshatra 2026: शनि देव 20 जनवरी 2026 को दोपहर लगभग 12:13 PM पर उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं। शनि देव का उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश और उनका गोचर काल काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उत्तरा भाद्रपद शनि का अपना ही नक्षत्र है। वक्री और मार्गी चाल के कारण वर्ष 2025 से 2027 के बीच शनि इस नक्षत्र में कई चरणों में रहेंगे। 

 

मुख्य तिथियां (2026 में आगे की चाल)

  • 17 मई 2026: शनि उत्तरा भाद्रपद से निकलकर रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।
  • 9 अक्टूबर 2026: वक्री अवस्था में शनि पुनः उत्तरा भाद्रपद में लौटेंगे।
 

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में शनि गोचर का प्रभाव:

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के स्वामी स्वयं शनि हैं और इसके देवता अहिर्बुध्न्य (गहरे पानी का नाग) हैं। लाल किताब और सामान्य ज्योतिष के अनुसार इसके प्रभाव कुछ इस प्रकार होते हैं। 


 


<strong>गंभीरता और आध्यात्मिक विकास: </strong>चूंकि यह शनि का अपना नक्षत्र है, यहाँ शनि बहुत सहज महसूस करते हैं। यह समय लोगों में आध्यात्मिक गहराई, धैर्य और अनुशासन बढ़ाता है।


 


<strong>पुरानी समस्याओं का अंत: </strong>इस नक्षत्र में शनि पुराने कर्मों के निपटारे (Karmic Settlement) में मदद करते हैं।


 


<strong>सिंह लग्न (आपकी कुंडली) पर प्रभाव: </strong>आपकी कुंडली में शनि 5वें घर में हैं। इस नक्षत्र गोचर के दौरान आपको अपनी शिक्षा, संतान या किसी पुराने निवेश को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़ सकते हैं। यह समय "धीमी लेकिन स्थिर" प्रगति का है।


 

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में शनि के गोचर के 5 उपाय:

1. इस अवधि में शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना आपके लिए विशेष रूप से शुभ रहेगा, क्योंकि शनि अपने ही नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं।


 


2. शनिवार के दिन छायादान करें। अर्थात एक कटोरी में सरसो का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें और इसके बाद उस तेल को कटोरी सहित शनिदेव के चरणों में रख दें। 


 


3. नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करें और मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर में गुड़ और चने अर्पित करें।


 


4. गरीब, मजदूर, सफाईकर्मी या दिव्यांग को अन्न या वस्त्र दान करें। यह नहीं कर सकते हैं तो कुछ धन दान दें।


 

5. मंदिर में शनि से संबंधित वस्तुओं का दान करें। 

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