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Anoothe Mandir: सिरोही जिला मुख्यालय के पास स्थित श्री विजयपताका पार्श्वनाथ महालक्ष्मी धाम में प्रदेश की सबसे बड़ी महालक्ष्मी की प्रतिमा विराजमान है. मंदिर का इतिहास 500 वर्ष से अधिक पुराना है.

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सिरोही : जिला मुख्यालय से करीब 3 से 4 किलोमीटर दूर कांडला हाईवे स्थित श्री विजयपताका पार्श्वनाथ महालक्ष्मी धाम प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है. इस मंदिर में संभवतः प्रदेश की सबसे बड़ी महालक्ष्मी की मूर्ति विराजमान है. ये भव्य मंदिर, सुंदर नक्काशी और शांत वातावरण के कारण यह तीर्थ श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखता है. यहां भगवान पार्श्वनाथ और माता महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं.

स्थानीय भक्त रमेश कुमार ने बताया कि मंदिर का इतिहास 500 वर्ष से भी अधिक पुराना है. मंदिर से जुड़े शिलालेखों के अनुसार, इसका इतिहास विक्रम संवत 1500 से जुड़ा हुआ है. समय-समय पर जैन आचार्यों के सानिध्य में मंदिर का जीर्णोद्धार होता रहा है। वर्तमान में श्री मीठालाल पूनमचंद चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से इसे भव्य रूप दिया गया है.

81 इंच की महालक्ष्मी मूर्ति
मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित माता महालक्ष्मी की 81 इंच ऊंची प्रतिमा एक ही पत्थर से तैयार की गई है. वहीं यहां भगवान पार्श्वनाथ की 71 इंच ऊंची सफेद संगमरमर की प्रतिमा भी है. धनतेरस और दीपावली को महालक्ष्मी पूजन के चलते काफी भक्त दूरदराज से यहां दर्शन करने आते है. कई भक्त सोने चांदी के आभूषण भी यहां माता को अर्पित करते है. श्रद्धालुओं के बीच भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा को लेकर मान्यता है कि यह दिन में तीन अलग-अलग रूपों में दिखाई देती है. सुबह बालक, दोपहर में युवा और शाम को बुजुर्ग रूप में दर्शन होने की मान्यता है.

दीवारों पर 41 हजार महामंत्र
मंदिर की दीवारों और संगमरमर पर 41 हजार बार ॐ, ह्रींकार और ॐ अरहम जैसे मंत्र लिखे गए हैं. भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा के चारों ओर 18 फीट लंबा ह्रीं मंत्र भी बनाया गया है. मंदिर परिसर में भगवान आदिनाथ, महावीर स्वामी, माता अंबिका और श्रीयंत्र के भी दर्शन होते हैं. यहां रोजाना सुबह 9 बजे विशेष धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है. धनतेरस और दीपावली पर माता महालक्ष्मी की विशेष पूजा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तीर्थ परिसर में करीब 108 वातानुकूलित कमरे वाली धर्मशाला और सात्विक जैन भोजन की भोजनशाला भी है. यहां सुबह 8 से 9 बजे नवकारसी, सुबह 11:30 से दोपहर 1 बजे तक भोजन और शाम 5 से 6 बजे तक चौविहार की व्यवस्था है.

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Jagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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