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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं ने विदेशी फंडिंग को लेकर लगाए गए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के आरोपों पर पलटवार किया. सीजेपी के नेता आशुतोष रांका ने इन आरोपों के सबूत मांगे. उन्होंने बीजेपी पर उल्टा निशाना साधते हुए कहा कि सरकार बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विदेशी फंडिंग का मुद्दा लेकर आई है.

जितेंद्र सिंह ने युवाओं की इस पार्टी और उसके सदस्यों पर विदेशी स्रोतों से पैसा लेने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि सीजेपी को अमेरिका के डोनर्स, पाकिस्तानी राजनीतिज्ञों और भारत-विरोधी संगठनों से मदद मिल रही है. उन्होंने खास तौर पर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके पर अमेरिकी डोनर्स से पैसे लेने और नेता आशुतोष रांका पर पाकिस्तानी राजनीतिज्ञों से फंडिंग का आरोप लगाया था. इस पर अब आशुतोष रांका ने जवाब दिया है.

रांका ने पूछा कि अगर सरकार को सीजेपी पर विदेशी कनेक्शन का शक था, तो फिर सरकारी लोग उनसे बातचीत क्यों कर रहे थे? 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुई घटना के संदर्भ में बोलते हुए उन्होंने कहा कि जंतर मंतर हो या अन्य कोई भी सार्वजनिक जगह पर तिरंगा फहराना अपराध नहीं है.

हालांकि पुलिस ने उस दिन सीजेपी के सदस्यों पर पुलिस बैरिकेड पार करने और बंद फाटक पर चढ़ने का आरोप लगाया था. इससे पहले पार्टी ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर प्रदर्शन किया था.रांका ने कहा, “जितेंद्र सिंह से पूछो, अगर विदेशी फंडिंग थी, तो वे हमसे हाथ क्यों मिला रहे थे? बातचीत क्यों कर रहे थे? चाय-नाश्ता क्यों कर रहे थे?”

ज्ञानेश कुमार का बचाव क्यों कर रही सरकार?

उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार बार-बार विदेशी फंडिंग का आरोप लगाकर बेरोजगारी, पेपर लीक और चुनावी गड़बड़ियों जैसे असली मुद्दों से ध्यान हटा रही है. उन्होंने पूछा कि सरकार ज्ञानेश कुमार का बचाव क्यों कर रही है.

सौरव दास बोले, आरोप बेबुनियाद

वहीं सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि पार्टी जून 6 से पहले ही सबूत मांग रही है. 3 जून को पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने सवाल उठाए थे, लेकिन कई महीने बीत जाने के बावजूद कोई सबूत नहीं मिला. उन्होंने दक्षिणपंथी और चरमपंथी समूहों पर युवा आंदोलन को बदनाम करने का आरोप लगाया .

क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि सीजेपी के नेता चुनाव आयोग के एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. वे वोटर डिलीशन और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं.13 अक्टूबर की घटना की जांच चल रही है. दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को आशुतोष रांका और सौरव दास को हिरासत में लिया था. बाद में उन्हें 50-50 हजार रुपये के बॉन्ड पर छोड़ दिया गया.

तीन दिन बाद रांका, दास और अजिंक्य शिंदे पर जंतर मंतर के बंद फाटक पर चढ़ने का आरोप लगा.दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 5 नवंबर को रांका और दास को पूछताछ के लिए बुलाया था. रांका ने कहा कि यह नियमित जांच का हिस्सा है और पार्टी पुलिस से सहयोग करेगी.

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