Mathura News: मथुरा में जूट से बनें सामानों की काफी डीमांड हो गई है. कारीगर जूट पर हस्त निर्मित आकृति ऊकेर रहे हैं. यह आकृति लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. जूट से बने सामान 500 से लेकर 5000 तक बाजारों में मिल रही है.
जूट से बने हस्त निर्मित सामान टिकाऊ और मजबूत होते हैं. मथुरा की रेलवे ग्राउंड में चल रहे मेले में एक स्टॉल ऐसी भी है, जो जूट से विभिन्न प्रकार की आकृति ऊकेरकर होम डेकोरेशन का सामान दुकानदार बेच रहा है. होम डेकोरेशन का सामान लोगों को अपनी ओर आकर्षित तो कर ही रहा है एक मोटा मुनाफा यहां दुकानदार भी कमा रहे हैं. यहां लोग विभिन्न प्रकार की जूट से बने सामान को खरीद कर घरों को सजाने के लिए ले जा रहे हैं. दीपावली से पहले दुकानदार की सेल भी काफी अच्छी हो रही है.
कैसे होता है तैयार सामान?
स्टॉल संचालक बाबर अली से ने लोकल 18 से बताया कि ग्राहकों का रुझान बहुत ही अच्छा देखने को मिल रहा है. लोग दीपावली से पहले खरीदारी कर रहे हैं. गाजीपुर में हम लोगों का यह कारोबार है. तीसरी पीढ़ी इस कारोबार को कर रही है. सरकार भी हमें मदद करती है. जहां-जहां सरकार के आयोजन होते हैं, वहां-वहां भी स्टॉल लगते हैं. 4 फीट के एक पीस को दो दिन बनाने में लगते हैं. तीन कारीगर अलग-अलग प्रोसेस कर इस पीस को तैयार करते हैं. पिट लूम पर डिजाइनिंग किया जाता है. उसके बाद अलग-अलग कारीगर अलग-अलग कार्य कर इसकी फिनिशिंग कारीगरी को ऊकेरते हैं.
मजबूत और टिकाऊ होता है जूट का सामान
बताया कि एक पीस को तैयार करने में तकरीबन 1200 से 1500 का खर्च आता है. इसे हम मार्केट में 2500 से लेकर 3000 तक भेज देते हैं. एक मोटा मुनाफा यहां से सामान बेचकर हम लोग कमा रहे हैं. जूट के रेशे प्राकृतिक रूप से काफी मजबूत और कम खिंचने वाले होते हैं, जिससे इससे बने बोरे, रस्सियां और भारी बैग बिना फटे काफी वजन उठा लेते हैं. जूट के उत्पाद अन्य कई सिंथेटिक या हल्के प्राकृतिक रेशों की तुलना में लंबे समय तक टिकते हैं और टूट-फूट का आसानी से सामना कर लेते हैं. यह सामग्री हवादार होती है और पराबैंगनी (UV) किरणों से सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे इसके थैले, पर्दे और फर्निशिंग लंबे समय तक खराब नहीं होते.
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