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होमताजा खबरकृषिबुवाई से पहले नहीं किया बीज और भूमि उपचार तो हो सकता है नुकसान, जानें बचाव

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चने की फसल को उकठा रोग से बचाने के लिए बुवाई से पहले बीज और भूमि उपचार करना भी बेहद जरूरी है. चने की खेती करने वाले किसानों को उकठा रोग से बचाव के लिए बुवाई से पहले ट्राइकोडर्मा का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके लिए बीज उपचार करना जरूरी है, ताकि फसल की शुरुआती अवस्था से ही रोग के खतरे को कम किया जा सके.

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अजमेर. रबी की फसलों की बुवाई करते समय किसानों को मौसम, मिट्टी और उपलब्ध सिंचाई के पानी को ध्यान में रखकर फसल का चयन करना चाहिए. खासकर कम पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में ऐसी फसलों और किस्मों को प्राथमिकता देना जरूरी है जो कम सिंचाई में भी अच्छा उत्पादन दे सकें. वहीं चने की फसल को उकठा रोग से बचाने के लिए बुवाई से पहले बीज और भूमि उपचार करना भी बेहद जरूरी है.

कृषि विज्ञान केंद्र अजमेर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र भाटी ने बताया कि चने की खेती करने वाले किसानों को उकठा रोग से बचाव के लिए बुवाई से पहले ट्राइकोडर्मा का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके लिए बीज उपचार करना जरूरी है, ताकि फसल की शुरुआती अवस्था से ही रोग के खतरे को कम किया जा सके. किसान बुवाई से पहले बीज को ट्राइकोडर्मा से उपचारित करें. इससे मिट्टी में मौजूद रोगकारक फफूंद के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है और फसल को स्वस्थ रखने में सहायता मिलती है.

ट्राइकोडर्मा को 100 किलो खाद में मिलाकर रखना चाहिए
उन्होंने आगे बताया कि चने की फसल में उकठा रोग की रोकथाम के लिए भूमि उपचार भी महत्वपूर्ण है. इसके लिए ढाई किलो ट्राइकोडर्मा को 100 किलो खाद में अच्छी तरह मिलाकर सात दिन तक रखना चाहिए. इसके बाद इस मिश्रण को खेत में डालें और फिर चने की बुवाई करें. इस तरीके से खेत में ट्राइकोडर्मा का प्रभाव बढ़ाने और उकठा रोग के प्रकोप को कम करने में मदद मिल सकती है.

कम पानी में सरसों और चने की खेती बेहतर विकल्प
कम सिंचाई की सुविधा वाले किसानों को लेकर डॉ. भाटी ने बताया कि ऐसे किसानों को कम अवधि में पकने वाली फसलों का चयन करना चाहिए. सरसों और चना ऐसी प्रमुख फसलें हैं, जो कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं. किसान सरसों की कम अवधि वाली किस्मों और चने की जल्दी पकने वाली किस्मों का चयन कर सकते हैं. इससे उपलब्ध पानी का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है और कम सिंचाई में भी खेती से अच्छी उपज लेने का अवसर मिलता है.

पर्याप्त पानी वाले क्षेत्रों में ही करें गेहूं की बुवाई
डॉ. भाटी ने किसानों को फसल चयन के दौरान पानी की उपलब्धता का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि गेहूं की फसल में अपेक्षाकृत अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है. ऐसे में जिन किसानों के पास पर्याप्त पानी उपलब्ध है, उन्हें ही अपने क्षेत्र में गेहूं की खेती को प्राथमिकता देनी चाहिए. वहीं कम पानी वाले क्षेत्रों में सरसों और चने की खेती करना अधिक उपयोगी रहेगा. सही फसल और किस्म का चयन करके किसान सीमित जल संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

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Jagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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