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जहरीली हुई दिल्ली की हवा
– फोटो :
अमर उजाला

विस्तार

मौसमी दशाओं के प्रतिकूल होते ही सोमवार को दिल्ली की हवा एक बार फिर प्रदूषण की चपेट में आ गई। राजधानी में प्रदूषण बढ़ाने में पड़ोसी राज्यों के 19 जिलों से आने वाले प्रदूषकों और वाहनों के धुएं की प्रमुख भूमिका रही। दोनों स्रोतों की पीएम2.5 में संयुक्त हिस्सेदारी करीब 55 फीसदी दर्ज की गई।

पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से उठने वाला धुआं भी दिल्ली पहुंचने लगा है। अनुमान है कि अगले तीन दिनों में पराली के धुएं की हिस्सेदारी मौजूदा आठ फीसदी से बढ़कर 22 फीसदी तक पहुंच सकती है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को दिल्ली के पीएम2.5 प्रदूषण में पड़ोसी राज्यों के 19 जिलों से आने वाले प्रदूषकों की हिस्सेदारी 35 फीसदी रही। वहीं, वाहनों के धुएं का योगदान 20.078 फीसदी दर्ज किया गया। इसके अलावा अन्य छोटे-बड़े स्रोतों से करीब 17.074 फीसदी प्रदूषण हुआ। पराली के धुएं की हिस्सेदारी फिलहाल आठ फीसदी के आसपास रही।

पराली के धुएं का बढ़ेगा असर 

डीएसएस के पूर्वानुमान के मुताबिक, मंगलवार से दिल्ली की हवा में पराली के धुएं की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ सकती है। अगले तीन दिनों में इसके बढ़कर 22 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान वाहनों से होने वाले प्रदूषण का योगदान भी 15 फीसदी के आसपास बना रह सकता है। ऐसे में मौसमी परिस्थितियों में कुछ सुधार के बावजूद प्रदूषण के स्तर में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। 

राहत की उम्मीद कम : 

पूर्वानुमान के अनुसार, अगले चार दिनों तक दिल्ली का आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा। हालांकि, नमी के कारण सुबह के समय धुंध छाई रह सकती है। इस दौरान हवाओं की दिशा उत्तर-पश्चिमी रहने का अनुमान है। दोपहर में हवा की रफ्तार 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि शाम और रात में यह घटकर 10 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है।

प्रदूषकों के फैलाव के लिए अनुकूल होंगी परिस्थितियां

मौसमी परिस्थितियों में बदलाव के साथ प्रदूषकों के फैलाव की स्थिति में भी सुधार होने का अनुमान है। तीन नवंबर को दिल्ली में मिक्सिंग डेप्थ 1,750 मीटर रहने की संभावना है। यह वायुमंडल की उस परत की ऊंचाई को दर्शाती है, जिसमें प्रदूषक फैल सकते हैं। वहीं, वेंटिलेशन इंडेक्स तीन नवंबर को 9,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड रहने का अनुमान है। इसके चार और पांच नवंबर को बढ़कर क्रमशः 13,500 और 14,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड पहुंचने की संभावना है। वेंटिलेशन इंडेक्स और हवा की गति में सुधार से प्रदूषकों के फैलाव में मदद मिल सकती है। हालांकि, पराली के धुएं की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण दिल्ली की वायु गुणवत्ता में तत्काल बड़े सुधार की संभावना कम है। 

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