पुलिस के मुताबिक, आरोपी की कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग की रणनीति भी बेहद शातिर थी. शुरुआत में वह महिला बनकर लोगों से दोस्ती करता था. जब कोई व्यक्ति उसकी बातों में आकर अपनी निजी तस्वीरें या वीडियो साझा कर देता, तो वह खुद को उस महिला का भाई बताकर सामने आता था. इसके बाद पीड़ितों को धमकी दी जाती थी कि उनकी तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक कर दिए जाएंगे या उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी जाएगी. इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी उनसे पैसे मांगता था. पुलिस के अनुसार, वह फोन कॉल, व्हाट्सऐप मैसेज और सोशल मीडिया के जरिए पीड़ितों पर दबाव बनाता था. कुछ मामलों में उसने कथित तौर पर लोगों से आमने-सामने मिलकर भी पैसे वसूले.
18 लाख रुपये की कमाई, कुल रकम 25.16 लाख रुपये तक पहुंची
इस मामले में पुलिस ने करीब 18 लाख रुपये की वसूली का खुलासा किया है. इसके अलावा, पीड़ितों से 7.16 लाख रुपये की और कथित धोखाधड़ी सामने आई है. इस तरह पुलिस के मुताबिक, सामने आए मामलों में कुल रकम 25.16 लाख रुपये तक पहुंचती है. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपने डिप्लोमा कोर्स के एक दोस्त से कथित तौर पर 4 लाख रुपये ऐंठे थे. इसके अलावा, निवेश पर रिटर्न देने का वादा करके एक सॉफ्टवेयर कर्मचारी से करीब 7 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप भी है. पुलिस ने दो अन्य अज्ञात पीड़ितों से क्रमशः 6.8 लाख रुपये और 7 लाख रुपये की कथित वसूली का भी जिक्र किया है. जांचकर्ताओं का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और पीड़ित सामने आ सकते हैं.
1,000 से ज्यादा लोगों से संपर्क, 82 ने साझा कीं निजी तस्वीरें
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए 1,000 से अधिक लोगों से संपर्क किया था. इनमें से 82 लोगों ने कथित तौर पर उसके साथ अपनी नग्न तस्वीरें या वीडियो साझा किए थे. जांच में तेलंगाना के अलावा आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों से 24 पीड़ितों की पहचान की गई है. वहीं, दुबई, तुर्की, पाकिस्तान और कनाडा जैसे देशों से भी नौ पीड़ितों का पता चला है. पुलिस के मुताबिक, कथित पीड़ितों में डॉक्टर, कारोबारी, लेक्चरर, निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी, डिलीवरी स्टाफ और गिग वर्कर शामिल हैं. जांच में सैकड़ों संभावित पीड़ितों और हजारों च्हासट्सऐप चैट से जुड़ी जानकारी मिलने की बात भी कही गई है.
पुलिस अधिकारी को भी बनाया निशाना
इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब आरोपी ने कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी को महिला बनकर व्हाट्सऐप चैट के जरिए अपने जाल में फंसाया और बाद में पैसों की मांग की. चारमीनार जोन के पुलिस उपायुक्त (DCP) खरे किरण प्रभाकर ने आरोपी को मीडिया के सामने पेश करते हुए बताया कि शिकायत और उपलब्ध जानकारी के आधार पर जांच शुरू की गई थी. जांच के बाद आरोपी को पकड़ लिया गया. पुलिस अब उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स, मोबाइल नंबरों और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क में कितने लोग प्रभावित हुए और क्या इस तरह की अन्य घटनाएं भी हुई हैं.
तीन मोबाइल फोन, लैपटॉप और पेन ड्राइव जब्त
पुलिस ने आरोपी के पास से तीन मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और 16 GB की पेन ड्राइव जब्त की है. जांच के अनुसार, वह दो व्हाट्सऐप अकाउंट चलाता था और पीड़ितों से बातचीत करने के लिए कई मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता था. पुलिस इन डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है. इनसे कथित चैट, तस्वीरों, वीडियो, पैसों के लेनदेन और अन्य संभावित पीड़ितों से जुड़ी जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है.
पढ़ाई छोड़कर परिवार को बीटेक करने का भरोसा दिलाया
पुलिस के मुताबिक, पवन कुमार ने बालानगर स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ टूल डिजाइन (CITD) में अपना डिप्लोमा कोर्स बीच में ही छोड़ दिया था. हालांकि, उसने कथित तौर पर अपने माता-पिता को यह विश्वास दिला रखा था कि वह एक निजी कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहा है. फिलहाल पुलिस इस मामले की आगे जांच कर रही है. आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(7) और 351(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66C, 66D, 66E और 67A के तहत मामला दर्ज किया गया है.
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