संगठन ने बच्चे की सुरक्षा और परवरिश पर सवाल उठाते हुए मामले की आधिकारिक जांच की मांग की है. उनका कहना है कि इतनी मासूम उम्र में बच्चे को इस तरह के हिंसक व्यवहार और माहौल के बीच लाना उसके मानसिक विकास और बाल अधिकारों के लिहाज से बेहद चिंताजनक है. यह मामला सुखदीप सिंह सिद्धू से जुड़ा है, जिन्हें ‘छोटा सिद्धू’ के नाम से जाना जाता है; वे मूसे वाला के माता-पिता, बलकौर सिंह और चरण कौर के छोटे बेटे हैं.
9 अक्टूबर के कॉन्सर्ट में बंदूक वाले इशारे
बताया जा रहा है कि यह घटना 9 अक्टूबर को कनाडा के टोरंटो में ‘स्कोशियाबैंक एरिना’ में आयोजित ‘साइंड टू गॉड वर्ल्ड टूर’ होलोग्राम कॉन्सर्ट के पहले शो के दौरान हुई. शिकायत के अनुसार, सुखदीप को उसके माता-पिता की मौजूदगी में मंच पर लाया गया. इस छोटे बच्चे को अपने हाथ से बंदूक चलाने का इशारा करते और “धांय-धांय” की आवाज निकालकर गोली चलने की नकल करते देखा गया. उसने ‘थापी’ (जांघ पर हाथ मारना) वाला इशारा भी किया, जो उसके दिवंगत बड़े भाई से जुड़ा हुआ था.
संस्था ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो का भी हवाला दिया है, जिनमें कथित तौर पर बच्चे के आस-पास मौजूद लोग उसे ऐसे ही इशारे दोहराने के लिए उकसाते हुए दिख रहे हैं. शिकायत में अधिकारियों से यह जांच करने की मांग की गई है कि किन हालात में बच्चा इन गतिविधियों के संपर्क में आया और क्या किसी ने उसे ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया था.
मूसे वाला की मौत से चिंता और बढ़ी
29 मई 2022 को पंजाब के मानसा जिले में जवाहरके गांव के पास सिद्धू मूसे वाला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस बच्चे के सार्वजनिक रूप से सामने आने के मामले में जो शिकायत दर्ज कराई गई है, उसमें मूसे वाला की हत्या का जिक्र एक अहम संदर्भ के तौर पर किया गया है. ‘लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल’ का तर्क है कि इतनी कम उम्र में बार-बार हथियारों से जुड़ी तस्वीरें या दृश्य देखने से बच्चे के विकास पर असर पड़ सकता है और उसे हिंसक व्यवहार सामान्य लग सकता है. उन्होंने बच्चे की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है.
हालांकि, इस संगठन ने किसी को श्रद्धांजलि देने और हिंसक हरकतें करने के बीच फर्क बताया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि अगर सुखदीप अपने दिवंगत भाई की याद में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होता है, तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है. उनकी आपत्ति खास तौर पर इस बात पर है कि बच्चे को गोली चलाने या अन्य हिंसक हरकतें करने के लिए सिखाया जा रहा है, उसे बढ़ावा दिया जा रहा है या ऐसा करने की छूट दी जा रही है.
काउंसलिंग और निगरानी की मांग
इस शिकायत में ‘जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015’ के तहत कार्रवाई की मांग की गई है. मांगों में यह भी शामिल है कि बलकौर सिंह और चरण कौर को ‘जिला बाल संरक्षण इकाई’ (District Child Protection Unit) या किसी योग्य बाल काउंसलर के जरिए काउंसलिंग दी जाए. संगठन ने अधिकारियों से यह भी कहा है कि वे ऐसे निर्देश जारी करें जिससे बच्चा ऐसी हिंसक हरकतें न कर सके, और साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि इन निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं. इसके अलावा, उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट से आग्रह किया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि इस मामले को तुरंत ‘बाल कल्याण समिति’ (Child Welfare Committee) के सामने रखा जाए, ताकि इस पर उचित विचार किया जा सके.
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