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Palm Leaf Manuscripts: हैदराबाद के पुरातत्व विभाग के संग्रहालय में करीब 5,000 प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियां सुरक्षित हैं. इनमें 11वीं सदी की आंध्र महाभारतम्, मोल्ला रामायण और आयुर्वेद के दुर्लभ ग्रंथ शामिल हैं. जानिए, सदियों बाद भी इन पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने की प्राचीन भारतीय तकनीक का रहस्य.
हैदराबाद. आधुनिकता और डिजिटल तकनीक के इस दौर में भी भारत की प्राचीन साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर जीवंत रूप में सुरक्षित है. ताड़ के पत्तों पर लिखे गए ऐतिहासिक ताड़पत्र ग्रंथ हमारे पूर्वजों के गहन ज्ञान, कला और उन्नत संरक्षण तकनीकों का जिंदा सबूत हैं. हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार पुरातत्व विभाग के संग्रहालय और अभिलेखागार में लगभग 5,000 प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियां अत्यंत सुरक्षित अवस्था में संरक्षित रखी गई हैं. इन अमूल्य पांडुलिपियों में सबसे प्रमुख आकर्षण आंध्र महाभारतम् की मूल ताड़पत्र प्रति है. इतिहास के जानकारी सूर्याकोंडी अनुसार इस महाकाव्य की रचना 11वीं सदी के चालुक्य राजा राजराज नरेंद्र के संरक्षण में शुरू हुई थी. तेलुगु साहित्य के तीन सर्वश्रेष्ठ कवियों—नन्नय्य, तिक्कना और एर्रना, जिन्हें सम्मिलित रूप से कवित्रयम् कहा जाता है सभी ने मिलकर संस्कृत महाभारत का तेलुगु में भव्य काव्यानुवाद किया था.
हालांकि इन महान कवियों की कोई तस्वीर आज उपलब्ध नहीं है लेकिन उनके द्वारा पत्तों पर उकेरे गए शब्द आज भी ठोस सबूत बनकर हमारे सामने मौजूद हैं. इन ताड़पत्रों का रहस्य प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक पद्धति में छिपा है, ताड़ के पत्तों पर लिखने से पहले उन्हें पानी में भिगोया जाता था और फिर उबाला जाता था. इसके बाद पत्तों को कीड़ों, सीलन और फफूंद से बचाने के लिए उन पर विशेष आयुर्वेदिक तेलों और जड़ी-बूटियों के लेप लगाए जाते थे. यही कारण है कि सदियों का समय बीत जाने के बाद भी ये पत्ते और इन पर नुकीली धातु की कलम से उकेरे गए बारीक अक्षर आज भी पूरी तरह सुरक्षित हैं.
पुरातत्व विभाग के संग्रह में केवल महाभारत ही नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य की कई अन्य अनमोल कृतियां भी मौजूद हैं. इनमें भक्त कवि पोतना द्वारा रचित श्रीमद्भागवत, कवयित्री मोल्ला द्वारा रचित मोल्ला रामायण, और महाकवि श्रीनाथ की प्रसिद्ध कृति शृंगार नैषधम शामिल हैं. इनके साथ ही प्राचीन आयुर्वेद, खगोल विज्ञान, ज्योतिष और संत अन्नमाचार्य के दुर्लभ संकीर्तन भी इन पांडुलिपियों में दर्ज हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्राचीन ताड़पत्रों में प्रयुक्त शास्त्रीय भाषा अत्यंत गूढ़ और उच्च कोटि की है जिसे डिकोड करने के लिए भाषाविदों और विद्वानों की मदद ली जा रही है. भौतिक संपत्तियों से परे, ज्ञान और संस्कृति का यह अमूल्य भंडार हमारी ऐतिहासिक विरासत की सबसे मजबूत नींव है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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