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नई दिल्ली. पाकिस्तान ने वित्तवर्ष 2026-27 का बजट पेश किया है. इसमें साफ दिख रहा है कि भारत को आंखें दिखाने वाला यह पड़ोसी देश असल में किस कदर कर्ज तले दबा हुआ है. वैसे तो यह बजट 18.77 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये का है, लेकिन इसमें से 8 लाख करोड़ से भी ज्यादा की रकम तो सिर्फ ब्याज चुकाने में जा रही है. इसके अलावा 3 लाख करोड़ से ज्यादा का आवंटन रक्षा क्षेत्र के लिए किया गया है. इसका मतलब है कि कुल बजट में से 11 लाख करोड़ से ज्यादा तो इसी दो मद में जा रहे, यानी बाकी काम के लिए पाकिस्तान ने 7 लाख करोड़ से भी कम की रकम रखी है.

पाकिस्तान में वित्तवर्ष की शुरुआत जुलाई से जून तक होती है और उसने चालू वित्तवर्ष के लिए अपना बजट पेश किया है. इस बजट से पहले आए इकनॉमिक सर्वे में विकास दर का अनुमान 4 फीसदी के आसपास रखा गया है. पिछले साल यह विकास दर 3.7 फीसदी के आसपास थी. पाकिस्तान का यह बजट पश्चिम एशिया में जारी तनाव और टैरिफ से कारोबार पर पड़े असर के बीच आई है. ऊपर से आईएमएफ ने भी पाकिस्तान पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं.

हाशिये पर जा रहे विकास कार्य
पाकिस्तान के बजट पर नजर डालें तो साफ दिख रहा है कि उसके लिए विकास कार्य अंतिम पायदान पर आते हैं. यही वजह है कि पाकिस्तान ने इस साल भी अपने विकास कार्यों के लिए सिर्फ 1 लाख करोड़ का आवंटन किया है. महंगाई का ध्यान रखते हुए उसने विकस कार्यों पर होने वाले खर्च में कटौती कर दी है. वहीं, रक्षा बजट को बढ़ाकर 3 लाख करोड़ से भी ज्यादा कर दिया है. यह कुल बजट अनुमान का करीब 16 फीसदी है. इसमें 82.2 हजार करोड़ रुपये पेंशन वाले भी जोड़ दें तो कुल रक्षा बजट, 3.82 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये पहुंच जाएगा.

केंद्र के कुल बजट का 33 फीसदी हथियारों पर खर्च
पाकिस्तान के पास खाने के लिए भले ही राशन हो या न हो, लेकिन लड़नके लिए हथियारों का पूरा प्रबंध है. उसके कुल बजट में राज्यों की हिस्सेदारी करीब 8.84 लाख करोड़ है और इस रकम को अलग कर दिया जाए तो केंद्र के पास महज 11.75 लाख करोड़ का ही बजट रहता है. ऐसे में रक्षा बजट कुल बजट का करीब 32.71 फीसदी होगा. भारत के साथ ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान ने लगातार 2 रक्षा बजट पेश किया है और दोनों में क्रमश: 18.52 और 16.2 फीसदी की बढ़ोतरी की है.

विकास के लिए राज्यों पर निर्भर
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की सबसे खराब स्थिति यह है कि इसके बजट में शामिल केंद्र सरकार की पूरी हिस्सेदारी सिर्फ 2 मद में खर्च हो जा रही है. संघीय सरकार का राजस्व करीब 11 लाख करोड़ के आसपास है, जिसमें से 8 लाख करोड़ तो कर्ज का ब्याज चुकाने में और 3.83 लाख करोड़ रक्षा बजट में चले जाते हैं. जाहिर है कि सरकार को विकास के लिए राज्यों के राजस्व पर निर्भर होना पड़ता है. यह स्थिति गरीबी की ओर बढ़ती पाकिस्तान की जनता के लिए और गंभीर हो सकती है.

खर्चे के लिए कर्ज पर निर्भर सरकार
पाकिस्तान के लिए कर्ज से पीछा छुड़ाना आसान नहीं है, क्योंकि संघीय सरकार के पास अपने खर्चे चलाने के लिए भी पैसे नहीं हैं और इस काम के लिए उसे फिर नया कर्ज लेना पड़ सकता है. ऐसा हुआ तो पाकिस्तान को अगले बजट में फिर से ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ेगा और गणित गड़बड़ हो जाएगा. फिलहाल पाकिस्तान की संघीय सरकार अपने राजकोषीय घाटे को कम दिखाने के लिए राज्यों पर सरप्लस रेवेन्यू बनाने का दबाव डालती है. इस साल भी बजट में पाकिस्तान के राज्यों ने 1.79 लाख करोड़ का सरप्लस रेवेन्यू दिखाने का अनुमान है, जबकि संघीय सरकार को 7 लाख करोड़ से ज्यादा का घाटा दिख रहा है. दोनों को समायोजित किया जाए तो पाकिस्तान का कुल राजकोषीय घाटा 5.22 लाख करोड़ रुपये आता है. यह जीडीपी का 3.6 फीसदी है.

पीओके और गिलगित के लिए बढ़ाई राशि
पाकिस्तान ने भले ही विकास कार्यों पैसे न बढ़ाए हों, लेकिन पाक अधिकृत कश्मीर यानी पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान के लिए सहायता राशि बढ़ा दी है. पाकिस्तान ने पीओके को 4.3 फीसदी बढ़ाकर 14.60 हजार करोड़ का आवंटन किया है, जो पिछले साल 14 हजार करोड़ ही था. इसी तरह, गिलगित-बाल्टिस्तान को 8,800 करोड़ का आवंटन किया है, जो पिछले साल 8 हजार करोड़ रहा था. पीओके की आबादी करीब 32 लाख जबकि गिलगित और बाल्टिसतान की जनसंख्या 10 लाख के आसपास है.

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