नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुनियोजित शहरी विकास को गति देने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने लैंड पूलिंग क्षेत्रों में महीनेभर का जनसंपर्क अभियान शुरू किया है. उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य जमीन मालिकों और किसानों को लैंड पूलिंग पॉलिसी की जानकारी देना, उनकी समस्याओं का समाधान करना और विकास प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ाना है. इस योजना के तहत दिल्ली में 12 लाख मकान बनाए जाने की तैयारी है, जो 200 वर्गकिलोमीटर में बनाए जाएंगे.
दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 के तहत लैंड पूलिंग पॉलिसी को प्राथमिकता दी जा रही है. इस पॉलिसी के तहत करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में योजनाबद्ध शहरी विकास की संभावना है. इसमें करीब 12 लाख नए घर बनाए जा सकते हैं. साथ ही 600 किलोमीटर से अधिक अतिरिक्त सड़क नेटवर्क विकसित करने की योजना है. पॉलिसी के तहत सड़क, पानी, बिजली, सीवर और अन्य बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए विकास किया जाएगा. इसके अलावा आवासीय क्षेत्रों के साथ स्कूल, अस्पताल, पार्क, बाजार, व्यावसायिक केंद्र और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की योजना है.
गांवों में पहुंच रहे DDA अधिकारी
अभियान के तहत DDA अब तक बक्करवाला, तिगीपुर और सुल्तानपुर डाबास गांवों में संवाद कार्यक्रम आयोजित कर चुका है. ये कार्यक्रम क्रमशः जोन K-1, P-II और N से जुड़े क्षेत्रों में हुए. इनमें जमीन मालिकों और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया और पॉलिसी के क्रियान्वयन से जुड़े सवाल पूछे. DDA अधिकारियों ने बताया कि सड़क नेटवर्क योजना और जमीन के अलग-अलग भूखंडों से जुड़ी जानकारी जल्द अधिसूचित की जाएगी. अभियान के तहत आगे छावला, सरनपुर, नेब सराय, खेड़ा कलां और मुखमेलपुर में भी शिविर लगाए जाएंगे. इन कार्यक्रमों के जरिए जमीन मालिकों को विकास मॉडल, प्रक्रिया और उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी जाएगी.
जमीन मालिकों की भागीदारी से होगा विकास
लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत जमीन मालिक स्वेच्छा से अपनी जमीन को एक साथ मिलाकर योजनाबद्ध विकास में भाग ले सकते हैं. इस प्रक्रिया में DDA और निजी संस्थाओं की भागीदारी से जमीन का विकास किया जाएगा. इसके लिए टाउन प्लानिंग स्कीम सहित अन्य मॉडल अपनाए जा सकते हैं. पॉलिसी के तहत 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ाई वाली सड़कों के विकास के लिए चरणबद्ध योजना बनाई गई है. इसका उद्देश्य पहले बुनियादी ढांचा तैयार करना और उसके बाद शहरी विकास को आगे बढ़ाना है. इसके अलावा 20 हेक्टेयर की छोटी प्लानिंग स्कीम का प्रावधान किया गया है, ताकि बड़े भूखंडों के एक साथ उपलब्ध होने का इंतजार किए बिना भी चरणबद्ध विकास शुरू किया जा सके.
आवास के साथ रोजगार को बढ़ावा
अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (UER-II) के आसपास हाई डेंसिटी कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी है. इसके तहत किफायती आवास, व्यावसायिक गतिविधियों, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जा सकता है. DDA के मुताबिक, इस पॉलिसी के तहत कई प्रक्रियाओं को सरल बनाने और अनावश्यक नियामकीय बाधाओं को कम करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके.
2 इलाकों में शुरू हो गया काम
DDA के अनुसार, सेक्टर 8B के गांव गादी खासरो और इब्राहिमपुर लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत क्रियान्वयन के लिए तैयार या अधिसूचित शुरुआती क्षेत्र के रूप में सामने आए हैं. इसे पॉलिसी को जमीन पर लागू करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. लैंड पूलिंग पॉलिसी दिल्ली के जोन K-I, L, N, P-II और जोन J के कुछ हिस्सों सहित अधिसूचित क्षेत्रों में लागू है. DDA का कहना है कि जमीन मालिकों और स्थानीय समुदायों के साथ लगातार संवाद के जरिए पॉलिसी के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाया जाएगा. योजना का उद्देश्य दिल्ली में सुनियोजित शहरी विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी, आवास और रोजगार के अवसर बढ़ाना है.
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