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85.80 लाख की नशीली कफ सिरप बरामद, तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश

ऑपरेशन प्रहार में तीन गिरफ्तार, गोदाम से 49,600 बोतलों की 310 पेटियां मिलीं, फर्जी कंपनियों से चल रहा था कारोबार

हर महीने दो लाख बोतलों की तस्करी का दावा, दिल्ली के कारोबारी समेत अन्य आरोपियों की तलाश तेज

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। साहिबाबाद थाना पुलिस ने ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 85.80 लाख रुपए मूल्य की 49,600नशीली कफ  सिरप बोतलों की 310 पेटियां बरामद कर तीन आरोपी को गिरफ्तार किया है। इन बोतलों की कीमत करीब 85.80 लाख रुपए बताई गई है। स्वॉट टीम, सर्विलांस, औषधि विभाग और साहिबाबाद थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कोडीन सिरप की 49,600 बोतलें बरामद की हैं। पुलिस की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर सोमवार रात साहिबाबाद क्षेत्र के सीमापुरी स्थित कसाना क्रेन कंपाउंड स्थित एक गोदाम में छापेमारी की थी। गोदाम में विस्कोरेक्स कफ सिरप की 310 पेटियां छिपाकर रखी मिलीं। इनमें कुल 49,600 बोतलें थीं। कफ सिरप की 310 पेटियों की कीमत 85.80 लाख रुपए बताई गई है।इस कार्रवाई में पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इस कारोबार का नेटवर्क हिमाचल प्रदेश से दिल्ली होते हुए बिहार तक फैला हुआ है। मौके पर मिले श्याम एंक्लेव निवासी वीरेंद्र सिंह,दिल्ली के विपिन गार्डन निवासी शिव शंकर कुमार और शहीद नगर निवासी राजेश कुमार तिवारी कफ सिरप के वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाए। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया।

मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रभारी सहायक पुलिस आयुक्त साहिबाबाद अमित सक्सेना ने बताया कि पुलिस ने मौके पर मिले तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है।छानबीन में पता चला है कि यह सीरप दिल्ली की जेवरन हेल्थ केयर कंपनी के नाम पर खरीदा गया था। हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब स्थित 3बी हेल्थ केयर लिमिटेड की ओर से तैयार किया जाने वाला सीरप जेवरन हेल्थ केयर के दिल्ली गोदाम पर ही होना चाहिए था,लेकिन इसे गाजियाबाद से बिहार भेजा जाना था। इसमें भी फर्जीवाड़ा मिला। आरोपियों ने जेवरन कंपनी से समस्तीपुर बिहार की नूतन फार्मा कंपनी को बिक्री दिखा रखी थी और माल पटना भेजने वाले थे। पुलिस जेवरन कंपनी के मालिक पुरोहित गुप्ता उर्फ भोला की भी तलाश कर रही है। पुलिस के मुताबिक दिल्ली के कारोबारी भोला बिहार का है। सीरप लाने ओर ले जाने वाली संध्या ट्रांसपोर्ट कंपनी भी बिहार की है। खास बात यह है कि जेवरन कंपनी दो साल से सीरप मंगाकर सिर्फ बिहार में बेच रही है। संध्या ट्रांसपोर्ट कंपनी भी करीब दो साल से सिर्फ कोडीन युक्त कफ सिरप को ही ट्रांसपोर्ट कर रही है।

दूसरा किसी भी तरह का कोई माल इस कंपनी ने नहीं भेजा। सहायक पुलिस आयुक्त ने बताया कि ये सभी फर्जी कंपनी सिर्फ कफ सिरप की तस्करी के लिए बनाई गई है। पुलिस के मुताबिक,सामान्य मेडिकल स्टोर के जरिए सीरप की बिक्री करने के मुकाबले नशे के लिए तस्करी करने में कमाई 10 गुना तक होती है। एसीपी का कहना है कि मेडिकल स्टोर से लोग बीमारी के लिए खरीदते हैं और यह एमआरपी पर ही बिकती है। वहीं,तस्करी वाली सीरप का इस्तेमाल नशे में होता है। नशे में इसका सेवन अधिक मात्रा में होता है,जिस कारण खपत अधिक होती है। एमआरपी से दो से तीन गुना कीमत में बिकती है और बांग्लादेश में इसकी बिक्री पांच गुना दाम पर की जाती है। इसीलिए फर्जी फर्म बनाकर सीरप की तस्करी की जाती है। ड्राई स्टेट जैसे बिहार और गुजरात में इसकी सबसे ज्यादा तस्करी की जाती है। आरोपियों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में कंपनी से माल दिल्ली के बजाय सीधे गाजियबाद में उतारा जाता है।

इसके बाद बिना पहचान वाले गत्तों में भरकर ट्रकों में लोडिंग की जाती है। पुलिस,राज्य कर विभाग,औषधि विभाग समेत तमाम टीमों से बचने के लिए परचून का सामान भी ट्रकों में भर लेते हैं। इसके बाद गाजियाबाद से बिहार माल भेजा जाता है। आरोपियों ने बताया कि हर महीने तीन से चार बार माल मंगाकर बिहार भेजा जाता है यानि कि हर महीने सीरप की दो लाख बोतलों की तस्करी की जा रही है। पुलिस इस मामले में निर्माता कंपनी से भी पूछताछ करेगी। कंपनी कब से माल खरीद रही थी और कितनी खरीदारी की जा चुकी है। वहीं, बिहार की नूतन फार्मा की भी जांच की जा रही है। पूर्व में पकड़े गए गिरोह से इन आरोपियों का लिंक अभी तक नहीं मिला है। पुलिस भोला समेत अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।

कोडीन युक्त कफ सीरप तस्करी का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय सीमाओं बांग्लादेश तक फैला हुआ है। नवंबर 2025 में नंदग्राम पुलिस ओर क्राइम ब्रांच की टीम ने मेरठ रोड स्थित मछली गोदाम पर छापा मारकर 3.40 करोड़ रुपए की सीरप की बोतलें बरामद की थीं। यह नेटवर्क इंदौर से गुवाहटी और बांग्लादेश सीरप की तस्करी करता था। आरोपियों को बचाने के लिए चार लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में इंस्पेक्टर सिद्धू को गिरफ्तार किया गया था। फरवरी 2026 में मुख्य आरोपी सौरभ त्यागी की दो करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति कुर्क की गई थी। आरेपी विभोर राणा और विशाल सिंह की सहारनपुर में 12.55 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति को फ्रीज किया गया था।

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