दिल्ली की बसों में महिलाओं के मुफ्त और सुगम सफर के लिए एक अक्तूबर से अनिवार्य किए गए पिंक सहेली कार्ड की प्रक्रिया अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई है। पूर्वी दिल्ली के विभिन्न बस डिपो पर कार्ड बनवाने पहुंचीं महिलाओं को सुविधा के बजाय भारी असुविधा और अधिकारियों के दुर्व्यवहार के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुबह 9 बजे से कतारों में लगी महिलाओं को सर्वर डाउन होने और ओटीपी न आने के कारण घंटों बाद मायूस होकर खाली हाथ घर लौटना पड़ा।
पूर्वी दिल्ली के शाहदरा, हसनपुर और नंद नगरी समेत तमाम बस डिपो पर सुबह 9 बजे से ही महिलाओं की लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। कड़ी धूप में खड़ी महिलाएं सिर्फ एक उम्मीद में हैं कि उनका कार्ड जल्दी बन जाए, लेकिन, जब घंटों धूप में खड़े रहने के बाद भी काम नहीं हुआ। शाहदरा डीपो पर इंतजार कर रही महिलाओं ने जब डिपो अधिकारियों से देरी का कारण पूछा, तो कुछ महिलाओं ने दावा किया कि अफसरों ने उनके साथ बेहद अभद्रता से बात की।
सिस्टम की नाकामी और अधिकारियों के इस रवैये से महिलाओं में भारी रोष है। लाइन में इंतजार कर रही कोई महिला अपने एक साल के मासूम बच्चे को घर पर रोता हुआ छोड़कर आई है, कोई अपने स्कूल या कॉलेज की छुट्टी करके आई है, तो कोई अपने बीमार पति को घर पर अकेला छोड़कर डिपो पहुंची है।
इसके बावजूद जब अफसर रूखेपन और तल्खी से बात करते हैं, तो महिलाओं का दर्द और गुस्सा दोनों ही बढ़ जाते है। दिनभर अपनी बारी का इंतजार करने के बाद ज्यादातर महिलाओं को मायूसी के साथ खाली हाथ ही घर लौटना पड़ रहा है। नए नियमों के तहत दिल्ली निवासी महिलाओं के लिए मुफ्त सफर हेतु यह कार्ड आवश्यक है, जबकि अन्य राज्यों की महिलाओं को टिकट लेकर यात्रा करनी पड़ती है।
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



