-बाजार में समय बिताना, बाजार का सही समय पकडऩे से ज्यादा महत्वपूर्ण: रविंद्र तिवारी
-रूस-यूक्रेन युद्ध, महंगाई और वैश्विक तनाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने दिखाई मजबूती
-2026 से 2029 के बीच मजबूत संपत्ति निर्माण की उम्मीद, विविधीकृत निवेश पर 10 से 13 प्रतिशत औसत रिटर्न का अनुमान
उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। मार्च 2020 का कोविड संकट भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के सबसे कठिन दौर में शामिल रहा। महामारी के शुरुआती झटके में निफ्टी करीब 7500 और सेंसेक्स भी अपने महत्वपूर्ण निचले स्तरों तक पहुंच गया था। बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल था, लेकिन इसके बाद भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार ने जिस तरह वापसी की, उसने लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख छोड़ी। फाइनेंशियल कंसलटेंट रविंद्र कुमार तिवारी के अनुसार, बाजार की दिशा केवल संकटों से नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, कंपनियों की आय और विकास क्षमता से भी तय होती है। रविंद्र तिवारी का कहना है कि कोविड के बाद भारतीय बाजार ने रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक महंगाई, ऊंची ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों, भारत-पाकिस्तान तनाव और पश्चिम एशिया के संघर्ष जैसे कई बड़े झटकों का सामना किया। इसके बावजूद बाजार ने कई बार अपनी पिछली ऊंचाइयों को पार किया। उनका मानना है कि इक्विटी बाजार में तेजी और गिरावट दोनों उसकी स्वाभाविक प्रकृति हैं।
इसलिए गिरावट को बाजार की स्थायी कमजोरी मानना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में भी बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक युद्ध की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये की चाल और वैश्विक ब्याज दरें बाजार को प्रभावित कर सकती हैं। निफ्टी में 21,500 से 22,000 के स्तर तक अतिरिक्त गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इस स्तर को निश्चित निचला स्तर मानना भी सही नहीं होगा। रविंद्र तिवारी के अनुसार यदि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि, घरेलू खपत, बुनियादी ढांचे में निवेश, विनिर्माण और कंपनियों की आय में मजबूती बनी रहती है तो 2026 से 2029 के बीच शेयर बाजार में फिर मजबूत संपत्ति निर्माण की संभावना बन सकती है। उनके आकलन के अनुसार निफ्टी 28,000 से 32,000 के क्षेत्र तक पहुंच सकता है। हालांकि यह अनुमान वैश्विक परिस्थितियों और बाजार की वास्तविक चाल पर निर्भर करेगा। उनका मानना है कि अगले तीन वर्षों में विविधीकृत इक्विटी पोर्टफोलियो से 10 से 13 प्रतिशत सालाना औसत रिटर्न एक उचित दीर्घकालिक उम्मीद हो सकती है।
यह निश्चित या गारंटीकृत रिटर्न नहीं है और वास्तविक परिणाम निवेश के प्रकार तथा निवेशक की जोखिम क्षमता पर निर्भर करेंगे। तिवारी निवेशकों को मौजूदा अस्थिरता के बीच बड़ी रकम एक साथ लगाने के बजाय तीन से छह चरणों में निवेश करने की सलाह देते हैं। नियमित एसआईपी करने वाले निवेशकों को भी केवल बाजार में गिरावट देखकर अपनी रणनीति बदलने के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान घबराकर निवेश निकालने वाले निवेशक बाद की तेज रिकवरी का पूरा लाभ नहीं उठा सके। इसके विपरीत, अनुशासित तरीके से निवेश जारी रखने वालों को बाजार की वापसी का फायदा मिला।
उनके अनुसार, बाजार में समय बिताना, बाजार का सही समय पकडऩे से ज्यादा महत्वपूर्ण है। रविंद्र कुमार तिवारी का कहना है कि बाजार में डर के समय घबराहट के बजाय सही परिसंपत्ति आवंटन और अनुशासित निवेश जरूरी है। कोविड ने बाजार को जरूर गिराया, लेकिन उसी संकट ने लंबी अवधि के निवेशकों के सामने बड़े अवसर भी पैदा किए। आने वाले वर्षों में भी अस्थिरता रहेगी, लेकिन धैर्य और सही रणनीति रखने वाले दीर्घकालीन निवेशकों के लिए अवसर बने रह सकते हैं।
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