-यीडा ने कार्पस फंड रेगुलेशन तैयार किया, वन टाइम लीज रेंट की राशि से होगा शहर का रखरखाव
-बोर्ड बैठक में दी जानकारी, इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की डीपीआर तैयार, जल्द अधिसूचित होंगे उपविधि
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में तेजी से बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास हो रहे विकास के बीच शहर की नागरिक सुविधाओं को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने के लिए प्राधिकरण ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। अब विकसित क्षेत्रों में सड़क, पार्क, हरित क्षेत्र, सफाई और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव के लिए फंड की कमी आड़े नहीं आएगी। यीडा ने इसके लिए कार्पस फंड रेगुलेशन तैयार किया है। इसके तहत वन टाइम लीज रेंट से प्राप्त राशि कार्पस फंड में जमा की जाएगी और इस फंड का इस्तेमाल शहर की नागरिक सुविधाओं के दीर्घकालिक रखरखाव और विकास में किया जाएगा। इसी के साथ यीडा क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था को भी वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम तेज किया गया है। क्षेत्र में इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए डीपीआर तैयार हो चुकी है। अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए रेगुलेशन एंड कंट्रोल से संबंधित उपविधियों का ड्राफ्ट भी तैयार किया गया है। इसे जल्द अधिसूचित किए जाने की प्रक्रिया है। इसके लागू होने के बाद कचरे के संग्रह, प्रबंधन और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
सोमवार को हुई यीडा की 93वीं बोर्ड बैठक में क्षेत्र के दीर्घकालिक और सुनियोजित विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक सोमवार को चेयरमैन आलोक कुमार की अध्यक्षता में हुई। इसमें यीडा सीईओ आरके सिंह, एसीईओ मनीष मीणा, एसीईओ शैलेंद्र भाटिया, एसीईओ राजेश कुमार, ग्रेनो अथॉरिटी के एसीईओ सुनील सिंह आदि मौजूद रहे। इसमें नागरिक सुविधाओं के रखरखाव के लिए कार्पस फंड बनाने से लेकर कूड़ा निस्तारण, मास्टर प्लान, एयरपोर्ट के आसपास विकास, औद्योगिक सेक्टरों और किसानों को सात प्रतिशत विकसित आबादी भूखण्ड देने की प्रगति तक की समीक्षा की गई।
यीडा क्षेत्र में नए विकसित होने वाले क्षेत्रों में आबादी बढऩे के साथ सड़क, पार्क, हरित क्षेत्र, सफाई और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की जरूरत भी लगातार बढ़ेगी। इन सुविधाओं के रखरखाव के लिए भविष्य में वित्तीय संसाधनों की कमी न हो, इसके लिए कार्पस फंड की व्यवस्था की गई है। डेवलपर्स से प्राप्त होने वाले वन टाइम लीज रेंट की निर्धारित राशि कार्पस फंड में जमा की जाएगी। इस फंड से विकसित क्षेत्रों में लंबे समय तक नागरिक सुविधाओं का रखरखाव किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल तत्काल रखरखाव ही नहीं, बल्कि शहर की सुविधाओं के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था तैयार करना है। इससे यीडा क्षेत्र के विस्तार के साथ नागरिक सुविधाओं को बनाए रखने की जिम्मेदारी के लिए पहले से वित्तीय आधार तैयार रहेगा।
कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण की तैयारी
यीडा क्षेत्र में तेजी से हो रहे आवासीय और औद्योगिक विकास के साथ कचरे की मात्रा भी बढऩे की संभावना है। इसे देखते हुए प्राधिकरण ने इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की डीपीआर तैयार की है। इसके तहत ठोस और अर्द्ध ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की व्यवस्था विकसित करने की योजना है।अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए रेगुलेशन एंड कंट्रोल संबंधी उपविधियों का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। इसे ड्राफ्ट गजट अधिसूचना के रूप में जारी करने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। 60 दिन की मानक अवधि के बाद प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर नियमानुसार विचार किया जा रहा है। इसके बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे क्षेत्र में स्वच्छता, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और पर्यावरण संरक्षण को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।
मास्टर प्लान-2041 में संशोधन के बाद शासन को भेजा जाएगा
बोर्ड बैठक में आगरा अर्बन सेंटर की महायोजना-2041 की प्रगति से भी अवगत कराया गया। पहले बोर्ड के समक्ष इसका ड्राफ्ट रखा गया था और जनसामान्य से आपत्तियां एवं सुझाव मांगे गए थे। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का परीक्षण किया जा चुका है। इनके आधार पर संशोधित ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। संशोधन पूरा होने के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा। इस महायोजना के जरिए आगरा क्षेत्र के भविष्य के विकास को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की योजना है। आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने पर जोर है।
एयरपोर्ट के दक्षिण में आठ हजार हेक्टेयर का अर्बन नोड
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास विकास को भी यीडा की योजनाओं में प्रमुख स्थान दिया गया है। एयरपोर्ट के दक्षिणी क्षेत्र में करीब आठ हजार हेक्टेयर में प्रस्तावित अर्बन नोड की प्रगति से बोर्ड को अवगत कराया गया। इस क्षेत्र में मास्टर प्लान के अनुरूप औद्योगिक और अन्य गतिविधियों को विकसित करने की योजना है। एयरपोर्ट के आसपास उपलब्ध भूमि के आवंटन को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला किया गया है। एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के आसपास की भूमि को नीलामी के माध्यम से आवंटित किया जाएगा। इससे क्षेत्र में निवेश और नियोजित विकास के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
औद्योगिक विकास की रफ्तार बढ़ाने पर जोर
यीडा क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सेक्टरों में भूखण्डों के आवंटन और निर्माण की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रस्तावित औद्योगिक नोड के लिए चार हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में 295 औद्योगिक भूखण्डों की योजना है। इनमें 181 भूखण्डों का लॉटरी के माध्यम से चिन्हांकन किया गया है। 152 आवेदकों को कुल 69 भूखण्डों का आवंटन नियमों के तहत किया गया है। सेक्टर-28 में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग से संबंधित गतिविधियों के लिए भी भूखण्ड आवंटन और विकास की प्रक्रिया चल रही है।
यहां 203 भूखण्डों की योजना के साथ 123 भूखण्डों के लिए भूमि आवंटन, 75 भूखण्डों के लिए प्लॉट और 28 भूखण्डों पर निर्माण शुरू होने की जानकारी दी गई। इसके अलावा प्रोटोटाइप लैब, इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सेस सुविधा, आईएमटी, बायोमैटेरियल और कॉमन आईटी सुविधा जैसी गतिविधियों के लिए भी स्थान चिन्हित किए गए हैं। सेक्टर-29 में करीब 50 एकड़ क्षेत्र में 100 भूखण्डों का आवंटन किया गया है। वहीं सेक्टर-33 में 148 भूखण्ड आवंटित किए जा चुके हैं और अतिरिक्त भूखण्डों पर निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है। प्राधिकरण का जोर आवंटन के बाद निर्माण शुरू कराने और परियोजनाओं को धरातल पर उतारने पर है।
किसानों को सात प्रतिशत आबादी भूखण्ड देने की प्रक्रिया तेज
भूमि अधिग्रहण से प्रभावित पात्र किसानों को सात प्रतिशत विकसित आबादी भूखण्ड देने की प्रक्रिया भी प्राधिकरण की प्राथमिकताओं में शामिल है। अब तक 10,069 किसानों को सात प्रतिशत भूमि का लाभ दिया जा चुका है। 4,978 भूखण्डों का चिन्हांकन किया गया है, जबकि 49 किसानों को उनके सात प्रतिशत आबादी भूखण्ड का कब्जा भी दिया जा चुका है। इसके अलावा शेष पात्र किसानों की प्रक्रिया को भी निस्तारित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्राधिकरण का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को विकास की मुख्यधारा से जोडऩा और उन्हें विकसित भूमि का लाभ उपलब्ध कराना है।
वित्तीय स्थिति में भी बढ़ोतरी
प्राधिकरण की वित्तीय स्थिति में भी पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल प्राप्तियां 1,495.43 करोड़ रुपये थीं, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में 14 सितंबर 2026 तक कुल प्राप्तियां बढ़कर 4,222.37 करोड़ रुपये हो गईं। इसी अवधि में प्राधिकरण के कुल व्यय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 14 सितंबर तक कुल व्यय 5,501.71 करोड़ रुपये बताया गया है। इसमें कृषि भूमि अधिग्रहण से संबंधित विभिन्न मदों में करीब 135.73 करोड़ रुपये का व्यय शामिल है। इसके अलावा भूमि के रूप में उपलब्ध कराए गए भूखण्डों से संबंधित मद में 4,344.34 करोड़ रुपये का व्यय हुआ है।
शहर, उद्योग और एयरपोर्ट आधारित विकास पर एक साथ फोकस
यीडा क्षेत्र में एक तरफ एयरपोर्ट के आसपास बड़े स्तर पर विकास की योजना आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक सेक्टरों में निवेश और निर्माण गतिविधियों को गति देने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही किसानों को विकसित आबादी भूखण्ड देने, शहर की नागरिक सुविधाओं के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था बनाने और कूड़ा निस्तारण की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर है। बोर्ड बैठक में लिए गए फैसलों से स्पष्ट है कि यीडा क्षेत्र में केवल नई परियोजनाओं के विकास के बजाय मौजूदा और भविष्य की नागरिक सुविधाओं के दीर्घकालिक रखरखाव की व्यवस्था तैयार करने पर भी फोकस किया जा रहा है। कार्पस फंड और इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट जैसी व्यवस्थाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
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