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झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC से जुड़े चर्चित मामले की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट की दूसरी बेंच करेगी. सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस वेंकिटा सुब्रमणि मोहना वकालत के दौरान इस मामले में कुछ पक्षकारों की ओर से पेश हो चुकी थीं. इसके बाद मामले को उनकी बेंच से हटाकर दूसरी बेंच के सामने भेजने का फैसला किया गया.

यह मामला अब 5 अक्टूबर को दूसरी बेंच के सामने सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है. इस दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं करने और मामले से जुड़ी सभी एफआईआर अदालत के सामने पेश करने की मांग भी रखी गई.

आखिर क्यों बदली गई JPSC केस की बेंच?

सुनवाई के दौरान जब जस्टिस मोहना के पुराने जुड़ाव की जानकारी सामने आई, तो मामले की निष्पक्ष सुनवाई को ध्यान में रखते हुए इसे दूसरी बेंच को भेज दिया गया. दरअसल, कोर्ट को बताया गया कि जस्टिस मोहना ने वकालत के दौरान इस मामले में कुछ पक्षकारों की ओर से पेश होकर पैरवी की थी.

कौन हैं जस्टिस मोहना?

JPSC मामले की वजह से चर्चा में आईं जस्टिस वेंकिटा सुब्रमणि मोहना हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की जज बनी हैं. केंद्र सरकार ने जून 2026 में उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी थी. वह सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाली दूसरी महिला वकील हैं. उनसे पहले 2018 में जस्टिस इंदु मल्होत्रा को सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया था.

जस्टिस मोहना का सफर भी काफी दिलचस्प रहा है. उनका जन्म तमिलनाडु के पोल्लाची में हुआ और वह 13 भाई-बहनों वाले बड़े परिवार में पली-बढ़ीं. उनके पिता सेना में सेवा देने के बाद तमिलनाडु सरकार में वरिष्ठ एंटोमोलॉजिस्ट रहे. परिवार में अनुशासन और पढ़ाई को काफी महत्व दिया जाता था.

उनकी मां ने ज्यादा पढ़ाई नहीं की थी, लेकिन उन्होंने बेटी में बहस और सार्वजनिक बोलने की प्रतिभा को पहचाना और कानून की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया.

जस्टिस मोहना ने 1983 में शुरू हुए देश के शुरुआती पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड BA LLB कार्यक्रम के पहले बैच में दाखिला लिया. उन्होंने कोयंबटूर लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की. उस समय कॉलेज की सुविधाएं आज के मुकाबले काफी सीमित थीं और क्लास भी किराए की इमारतों में लगती थीं. उन्होंने 1988 में कानून की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद वकालत के क्षेत्र में अपना करियर बनाया.

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने का सफर

लगातार कई वर्षों तक सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने के बाद उन्हें 2015 में वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा मिला. इसके बाद 2026 में उन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया.

उनके साथ पढ़ने वाले छात्रों में केवी विश्वनाथन भी शामिल थे, जो आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रहे और बाद में सुप्रीम कोर्ट के जज बने.

अब JPSC केस पर निगाहें

जस्टिस मोहना के बेंच से अलग होने के बाद JPSC मामले की सुनवाई दूसरी बेंच करेगी. फिलहाल याचिकाकर्ताओं की ओर से छात्रों के खिलाफ कार्रवाई रोकने और मामले से जुड़ी FIR अदालत के सामने लाने की मांग की गई है.

अब 5 अक्टूबर की सुनवाई अहम होगी. इस दिन यह साफ हो सकता है कि अदालत छात्रों को लेकर क्या निर्देश देती है और JPSC से जुड़े विवाद में आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है.

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