एनडीटीवी से एक बातचीत में, दिवंगत गायक जुबिन गर्ग की पत्नी गरिमा गर्ग ने उनकी पहली पुण्यतिथि और इस मौके पर उमड़े जन सैलाब को लेकर अपने जज्बात साझा किए. उन्होंने कहा कि उन्हें आज भी जुबिन हर तरफ नजर आते हैं, क्योंकि उनके चाहने वाले हर जाति, धर्म या पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर केवल एक इंसान के तौर पर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं. गरिमा कहती हैं कि असम को लेकर जुबिन का यही सपना था. वो चाहते थे कि हर शख्स अपनी जाति, धर्म और पहचान को छोड़कर बस एक इंसान की तरह रहे.
जुबिन की पुण्यतिथि पर शोक नहीं, उत्सव मना रहे फैंस
गरिमा ने आगे कहा कि असम के लोग उनकी पुण्यतिथि पर शोक या मातम नहीं मना रहे, बल्कि ‘जुबिन दिवस’ के रूप में एक उत्सव मना रहे हैं. उनके फैंस जुबिन की सकारात्मक सोच, रचनात्मकता और उनके आदर्शों को अपने दिलों में संजोकर आगे बढ़ा रहे हैं. जुबिन के संघर्षों को याद करते हुए पत्नी गरिमा ने बताया कि सिंगर में हर मुश्किल परिस्थिति, तनाव या अवसाद को अपनी आंतरिक शक्ति के सहारे रचनात्मकता में बदल देने का हुनर था.
फैंस के जरिए जिंदा हैं जुबिन
जुबिन गर्ग की पत्नी कहती हैं कि सिंगर का मानना था कि एनर्जी कभी खत्म नहीं होती है. वो बस एक शख्स से दूसरे शख्स में ट्रांसफर हो जाती है. गरिमा का कहना है कि जुबिन की एनर्जी आज उनके लाखों फैंस के दिलों में जिंदा है. वो आज अपने फैंस और चाहनेवालों के जरिए सबके बीच में जिंदा हैं.
जुबिन की पत्नी कहती हैं कि दिवंगत सिंगर के जीवन में जो भी मुश्किलें आईं, जो भी दुख आया, उसे उन्होंने कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. उन्होंने अपनी एनर्जी को पॉजिटिविटी में बदला और उसे क्रिएटिव रूप दिया.
जुबिन की पत्नी को है न्याय का इंतजार
सिंगापुर में जुबिन गर्ग की मौत एक एक्सीडेंट थी या कोई सोची-समझी साजिश, इसकी जांच के लिए असम सरकार ने आदेश दिए थे, और इस मामले में अदालत में कानूनी कार्यवाही भी चल रही है. इस बारे में बात करते हुए दिवंगत सिंगर की पत्नी कहती हैं, ‘हमें न्याय चाहिए. प्रक्रिया अभी कोर्ट में चल रही है. इसलिए हम सब जुबिन गर्ग के लिए इंसाफ चाहते हैं. हम यह जानना चाहते हैं कि 19 सितंबर को सिंगापुर में असल में क्या हुआ था. हम अभी भी इस जवाब का इंतजार कर रहे हैं’.
वो आगे कहती हैं, ‘हमें न्याय हासिल करना ही होगा. अगर जुबिन को न्याय नहीं मिला, तो फिर किसे मिलेगा? क्या इसका कोई मतलब रह जाता है? कम से कम असम में तो हमें जुबिन गर्ग के लिए इंसाफ मिलना ही चाहिए’.
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