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ग्रेटर नोएडा: अल्फा-1 कमर्शियल बेल्ट में खाने-पीने की कई दुकानें हैं, लेकिन करीब 20 साल से लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए हुए ‘अंकल पेटीज’ की कहानी कुछ खास है. कभी छोटी सी दुकान से शुरू हुआ यह सफर आज करीब 35 से 40 तरह की वेज और नॉनवेज पेटीज तक पहुंच चुका है. खास बात यह है कि यहां पेटीज को ग्राहकों की पसंद के अनुसार कस्टमाइज करके तैयार किया जाता है.

दुकान संचालक संजय अरोड़ा बताते हैं कि शुरुआत में उन्होंने पढ़ाई के साथ एक छोटी सी पेटीज की दुकान शुरू की थी. उस समय आसपास बड़ी संख्या में छात्र आते थे. छात्र उन्हें अक्सर ‘अंकल’ कहकर बुलाते थे. कोई कहता, ‘अंकल ये दे दो’, तो कोई कहता, ‘अंकल वो दे दो’. धीरे-धीरे यही संबोधन दुकान की पहचान बन गया और दुकान का नाम ‘अंकल पेटीज’ पड़ गया.

ग्राहकों की पंसद के अनुसार तैयार होती पेटीज 
संजय अरोड़ा के मुताबिक, शुरुआत में दुकान पर पेटीज की कुछ ही वैरायटी उपलब्ध थीं, लेकिन ग्राहकों की पसंद और मांग को देखते हुए धीरे-धीरे इसमें नए स्वाद जोड़े गए. आज दुकान पर करीब 35 से 40 प्रकार की वेज और नॉनवेज पेटीज उपलब्ध हैं. यही अलग-अलग वैरायटी दुकान को दूसरी दुकानों से अलग पहचान देती हैं.

‘अंकल पेटीज’ की खासियत सिर्फ वैरायटी तक सीमित नहीं है. यहां ग्राहक की पसंद के मुताबिक पेटीज को कस्टमाइज करके तैयार किया जाता है. ग्राहक अपनी पसंद की सामग्री और स्वाद के अनुसार पेटीज बनवा सकते हैं. इसी वजह से नियमित ग्राहकों के साथ-साथ नए ग्राहक भी यहां पहुंचते हैं.

पेटीज की कई वैरायटी मौजूद
दुकान पर वेज और नॉनवेज दोनों तरह की पेटीज उपलब्ध हैं. वेज में पनीर समेत कई विकल्प हैं, जबकि नॉनवेज में चिकन एग पेटीज, चिकन पेटीज, मखनी पेटीज और चिकन पेरी-पेरी जैसी वैरायटी ग्राहकों को मिलती हैं. दुकान संचालक का कहना है कि लगातार नए स्वाद और ग्राहकों की मांग के अनुसार विकल्प बढ़ाने की कोशिश की जाती है.

छात्रों के साथ प्रोफेसरों की भी पसंद
अल्फा-1 कमर्शियल बेल्ट में दुकान की लोकेशन होने के कारण यहां छात्रों के साथ आसपास के संस्थानों में काम करने वाले लोग भी पहुंचते हैं. संजय अरोड़ा बताते हैं कि दुकान पर आने वाले ग्राहकों में छात्रों की संख्या काफी अधिक है. कई ग्राहक ऐसे हैं जो वर्षों से यहां पैटी खाने के लिए आते रहे हैं.

स्थानीय ग्राहक और प्रोफेसर आरबी सिंह बताते हैं कि वह करीब 15 साल से ‘अंकल पेटीज’ पर आते हैं. उन्होंने कहा कि वह खुद प्रोफेसर हैं और उनके साथ उनके छात्र भी कई बार यहां पेटीज खाने आते हैं. जब भी कुछ अलग खाने का मन होता है, तो अल्फा-1 कमर्शियल बेल्ट स्थित इस दुकान का रुख करते हैं.

स्थानीय लोगों में भी बनी पहचान
स्थानीय निवासी जोगिंदर खारी भी इस दुकान के नियमित ग्राहकों में शामिल हैं. उनका कहना है कि उन्हें यहां की पेटीज काफी पसंद है और वह अक्सर यहां खाने के लिए आते हैं. उनके मुताबिक, स्वाद और अलग-अलग विकल्पों के कारण दुकान पर ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है.

समय के साथ बढ़ रहा ग्राहकों का भरोसा
करीब दो दशक पहले एक छोटी सी दुकान से शुरू हुआ ‘अंकल पेटीज’ का सफर अब एक स्थानीय पहचान बन चुका है. दुकान के नाम के पीछे छात्रों से जुड़ी कहानी हो या फिर पेटीज की अलग-अलग वैरायटी, दोनों ही इसे खास बनाते हैं. संजय अरोड़ा के लिए यह सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि पढ़ाई के साथ शुरू किया गया वह सफर है, जो समय के साथ ग्राहकों के प्यार और भरोसे से आगे बढ़ता गया.

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