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40 मिनट पहले

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हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत उन 12 हजार शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिन्होंने अब तक हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (HTET) पास नहीं की है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय (हरियाणा) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए एक नोटिस जारी किया है।

इस नोटिस के तहत बिना HTET पास किए नौकरी कर रहे शिक्षकों को अब यह परीक्षा पास करनी होगी। जो टीचर यह परीक्षा नहीं देंगे, उन्हें नौकरी छोड़नी होगी या कंप्लसरी रिटायरमेंट दे दिया जाएगा। उन्हें प्रमोशन भी नहीं मिलेगा। हालांकि, सरकार ने इसमें रिटायरमेंट के 5 साल से कम या अधिक सेवा वाली शर्त भी जोड़ी है।

निदेशालय ने भिवानी बोर्ड (BSEH) को साल में दो बार HTET परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि शिक्षकों को परीक्षा पास करने का पर्याप्त मौका मिल सके।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हुई थी टीचर्स के लिए HTET शुरू

शिक्षा निदेशालय के अनुसार, यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा सिविल अपील संख्या 1385/2025 (अंजुमन इशात-ए-तलीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य) में 1 सितंबर 2025 को दिए गए आदेश और रिव्यू पिटीशन में 29 मई 2026 को पारित आदेशों के अनुसार लिया गया है।

शिक्षा निदेशालय द्वारा HTET के लिए जारी किया गया नोटिस

शिक्षा निदेशालय द्वारा HTET के लिए जारी किया गया नोटिस

निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEOs) को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के सभी शिक्षकों तक यह सूचना तुरंत पहुंचाएं। इस फैसले के खिलाफ हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन फिर से सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बैंच में याचिका दायर करने पर विचार कर रही है।

इसके बाद पश्चिम बंगाल में TET की तैयारी

पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा विभाग ने इन-सर्विस प्राइमरी शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) कराने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के चलते उठाया गया है। इस प्रक्रिया के अंदर करीब 90 हजार इन-सर्विस शिक्षक आ सकते हैं। हालांकि, अभी परीक्षा की तारीख, आवेदन प्रक्रिया और शेड्यूल जारी नहीं किया गया है।

किन शिक्षकों को देना होगा TET

यह मामला खास तौर पर उन इन-सर्विस शिक्षकों से जुड़ा है, जिनकी नियुक्ति RTE Act, 2009 के लागू होने से पहले हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से अधिक समय बाकी है, उन्हें TET पास करना होगा, तभी वे सेवा में बने रह सकेंगे। वहीं, जिन शिक्षकों के रिटायरमेंट में पांच साल या उससे कम समय बचा है, उन्हें नौकरी जारी रखने के लिए TET से छूट दी गई है। हालांकि, जो शिक्षक प्रमोशन चाहते हैं उनके लिए भी TET पास करना जरूरी होगा।

शिक्षकों ने जताई नाराजगी

सरकार के इस कदम के बाद पश्चिम बंगाल में शिक्षक संगठनों की ओर से विरोध भी किया जा रहा है। कुछ संगठनों का कहना है कि लंबे समय से पढ़ा रहे शिक्षकों पर नौकरी के दौरान दोबारा पात्रता परीक्षा का फैसला सही नहीं है। उन्होंने खासकर पुराने नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से बाहर रखने की मांग की है।

यूपी में टीचर के लिए UPTET पास करना जरूरी

1 सितंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने फैसला दिया कि बगैर TET पास किए प्राइमरी शिक्षक बने उम्‍मीदवारों को भी अब TET पास करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर उन्‍हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा। ऐसे में 1.85 लाख कैंडिडेट्स ने 2 से 4 जुलाई 2026 के बीच आयोजित हुई UPTET परीक्षा दी।

हालांकि, शिक्षकों ने इस फैसले का जमकर विरोध किया। इस संबंध में प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे गए और संसद में भी इस कानून में संशोधन की मांग उठाई। लेकिन ये सारी कोशिशें सुप्रीम कोर्ट के परीक्षा अनिवार्य करने के फैसले के सामने बेकार रहीं।

तनाव में हुई 2 शिक्षकों की मौत

कई ऐसे शिक्षक भी हैं, जो 20 – 25 साल से पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी नौकरी के बाद फिर से परीक्षा लेना कहां तक तर्कसंगत है? शिक्षक संघों का दावा है कि इसी तनाव में 2 शिक्षकों की मौत भी हो चुकी है।

एग्जाम देने के लिए दी स्कूल से छुट्‌टी

यूपी सरकार ने इस एग्जाम को लेकर सेवारत शिक्षकों के लिए दो बड़े फैसले लिए हैं। पहला अब कार्यरत शिक्षकों के लिए भी TET आयोजित की जाएगी। दूसरा UPTET में शामिल होने वाले सेवारत शिक्षकों को परीक्षा देने के लिए स्कूल से छुट्‌टी भी मिलेगी।

यह परीक्षा साल में 2 बार कराई जाएगी। विभाग ने परीक्षा पास करने के लिए 2 साल का समय तय किया है। इसके बाद भी परीक्षा पास न कर पाने पर नौकरी जाएगी। फिर चाहे टीचर्स की उम्र 40-45 साल ही क्यों न हो।

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