महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मीरा रोड निवासी 81 साल के असगरअली वोहरा को जमीन विवाद में बड़ी राहत मिली है। पीएम मोदी से मुलाकात के कुछ दिन बाद भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और प्लॉट की निर्माण अनुमति सरेंडर करने की बात कही है। विधायक नरेंद्र मेहता ने वोहरा के खिलाफ पहले की गई पुलिस शिकायत वापस लेने की बात भी कही। वोहरा ने 8 सितंबर को मोदी से मुलाकात कर जमीन विवाद में दखल देने और सीबीआई जांच की मांग की थी। उनका दावा है कि उन्होंने गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में पीएम मोदी के साथ पढ़ाई की थी। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने पीएम मोदी और असगरअली वोहरा की मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थीं। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि प्रधानमंत्री अपने स्कूलमेट के मामले में न्याय सुनिश्चित करेंगे। भाजपा विधायक के साथ 15 साल से था विवाद वोहरा के मुताबिक, जमीन को लेकर वह करीब 15 साल से अलग-अलग सरकारी विभागों के सामने मामला उठा रहे थे। उनका आरोप है कि उनकी जानकारी के बिना फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और जमीन को दो कंपनियों के बीच बांट दिया गया। इन कंपनियों के नाम स्वयम बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस हैं। वोहरा ने दोनों कंपनियों को नरेंद्र मेहता से जुड़ा बताया था। इस मामले में 2015 में एफआईआर भी दर्ज हुई थी। विधायक की कंपनी ने नगर निगम को पत्र दिया सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने मीरा-भायंदर नगर निगम के सहायक टाउन प्लानिंग निदेशक को पत्र दिया। इसमें कंपनी ने प्लॉट का निर्माण प्रमाणपत्र सरेंडर करने की जानकारी दी। कंपनी ने बताया कि उसने 13 जून 2019 को रजिस्टर्ड डीड के जरिए जमीन खरीदी थी। इसके बाद 17 अप्रैल 2026 को उसे निर्माण की अनुमति मिली थी। अब जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद के कारण कंपनी ने यह अनुमति वापस करने का फैसला लिया। कंपनी ने नगर निगम से निर्माण परमिट रद्द करने और प्रोजेक्ट के लिए जमा की गई फीस वापस करने का आग्रह भी किया। वोहरा के खिलाफ शिकायत भी वापस होगी नरेंद्र मेहता ने पुलिस कमिश्नर को अलग पत्र भेजा। इसमें उन्होंने वोहरा के खिलाफ अपनी पुरानी शिकायत वापस लेने की बात कही। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। यह शिकायत वोहरा और उनके सहयोगी अजय ढोका के खिलाफ की गई थी। इसमें कथित आपराधिक अतिक्रमण और धमकी के आरोप लगाए गए थे। शिकायत वापस लेने से जुड़े आधिकारिक पत्र संबंधित अधिकारियों को सौंपे गए हैं। मंत्रालय में हुई बैठक मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी ने मंत्रालय में मामले को लेकर बैठक की। इसमें असगरअली वोहरा, नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे मौजूद रहे। बैठक में मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को जमीन का कब्जा छोड़ने और निर्माण अनुमति सरेंडर करने से जुड़ा पत्र सौंपा। 16 सितंबर को नगर निगम में सुनवाई मीरा-भायंदर नगर निगम ने दोनों कंपनियों के प्रबंधन को 16 सितंबर को स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया था। इसी दिन मामले की सुनवाई भी तय थी। वोहरा ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि मामले का समाधान होगा।
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