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सच्ची घटनाओं से प्रेरित होकर हिंदी सिनेमा में कई फिल्में बनी. इन फिल्मों ने अच्छा परफॉर्म करने में सफल भी हुई. आज आपको एक ऐसे ही केस और इस पर बनी तीन फिल्मों के बारे में बताते हैं. एक बार अक्षय कुमार नजर आए तो एक बार गुलजार ने अलग प्रयोग करके पॉपुलैरिटी हासिल की.

दरअसल हम बात कर रहे हैं K.M नानावती वर्सेज स्टेट ऑफ महाराष्ट्र केस की. ये 1959 की घटना थी जब एक ऐतिहासिक भारतीय आपराधिक मामला सामने आया है. भारतीय नौसेना के कमांडर कावस मानेकशॉ नानावती पर उनकी पत्नी के प्रेमी प्रेम आहूजा की हत्या का मुकदमा चलाया गया था. ये वही केस है जिससे जाने-माने अधिवक्ता राम जेठमलानी (Ram Jethmalani) को फेम मिला था.

नानावती को लोग बहुत सपोर्ट करते थे. वह अपनी वर्दी के प्रति इतना वफादार थे कि इन आरोपों के बावजूद लोगों का प्यार कम नहीं हुआ. जहां सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सुनियोजित हत्या मानते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी तो बाद में बाद में महाराष्ट्र की राज्यपाल व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू विजयलक्ष्मी पंडित ने उनकी सजा माफ कर दी थी. (फोटो साभार: PTI)

ये केस उस जमाने में इतना फेमस हुआ था कि खूब मीडिया कवरेज मिला था और लोगों की रुचि को देखते हुए गुलजार से लेकर अक्षय कुमार ने फिल्में बनाईं. अक्षय कुमार की फिल्म तो बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफल हुई तो नेशनल अवॉर्ड भी जीता. सबसे पहले साल 1963 में सुनील दत्त की फिल्म इसी केस पर आई. (फोटो साभार: पोस्टर)

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साल 1963 में ‘ये रास्ते हैं प्यार के’ नानावती केस पर आधारित थी. जिसमें सुनील दत्त के साथ नीला नायडू नजर आईं. फिल्म को आर.के नाय्यर ने बनाया था. फिल्म में अशोक कुमार भी नजर आए. नानावती के किरदार में सुनील दत्त नजर आए जिनका नाम अनिल सहानी रखा गया. (फोटो साभार: पोस्टर)

फिर आते हैं गुलजार की फिल्म ‘अचानक’ पर. साल 1973 में लिरिसिस्ट गुलजार ने डायरेक्शन की कुर्सी संभाली और एक नया प्रयोग किया. फिल्म नानावती केस पर उन्होंने बिना गाने वाली फिल्म बनाई. खुद लिरिसिस्ट होते हुए भी उन्होंने फिल्म में गाना नहीं डाला. उन्होंने इस सब्जेक्ट की गंभीरता को समझा और इसे इसी अंदाज में पेश किया. (फोटो साभार: पोस्टर)

‘अचानक’ में विनोद खन्ना ने लीड रोल निभाया. फिल्म के लिए के.ए अब्बास की स्टोरी के लिए और गुलजार को डायरेक्शन के लिए फिल्मफेयर नॉमिनेशन भी मिला. फिल्म का असली मैसेज सिर्फ शादी में बेवफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कहीं ज्यादा गहरा है. (फोटो साभार: पोस्टर)

फिल्म में विनोद खन्ना के अलावा ओम शिवपुरी, लिली चक्रवर्ती, फरीदा जलाल से लेकर असरानी जैसे कलाकार नजर आए. फिल्म में गाने नहीं थे लेकिन बैकग्राउंड वसंत देसाई ने दिया था. गुलजार की बेटी मेघना गुलजार इन दिनों दायरा फिल्म लेकर आ रही हैं. जिसकी तुलना उनके पिता के डायरेक्शन के प्रयोग से ही की जा रही है. कहा जा रहा है कि करीना कपूर-पृथ्वीराज की फिल्म में भी गाना नहीं है सिर्फ फिल्म के खत्म होने पर एक ट्रैक होगा. (फोटो साभार: पोस्टर)

अब आते हैं अक्षय कुमार की रुस्तम में. ये सुपरहिट फिल्म नानावती केस पर ही बनी थी. जिसके गाने भी हिट थे तो कहानी भी. फिल्म में शानदार काम को देखते हुए एक्टर को नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा गया था. टीनू सुरेश देसाई की फिल्म में अक्षय कुमार के अपोजिट इलियाना डीक्रूज नजर आईं तो ईशा गुप्ता, पवन मल्होत्रा, कुमुद मिश्रा, परमीत सेठी से लेकर बिजेंद्र काला जैसे सितारे नजर है. (फोटो साभार: पोस्टर)

रुस्तम के गाने भी सुपरहिट थे. फिल्म में तेरे संग यारा, देखा हजारों दफा से लेकर ढल जाऊं मैं जैसे गाने थे. ये गाने मनोज मुंतशिर ने लिखे तो आतिफ असलम, अंकित तिवारी से लेकर अरिजीत सिंह, पलक मुच्छल जैसे सिंगर्स की आवाज सुनाई दी. (फोटो साभार: पोस्टर)

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