ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन दिवस पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और शीर्ष प्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए राजधानी में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था जारी रहेगी। भारत मंडपम, विदेशी मेहमानों के ठहरने वाले होटल, एयरपोर्ट और वीवीआईपी आवागमन वाले मार्गों को हाईटेक सिक्योरिटी ग्रिड से जोड़ा गया है।
सुरक्षा एजेंसियों का जोर किसी घटना के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय खतरे के संकेत पहले ही पकड़ने पर है। इसके लिए साइबर मॉनिटरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरे, इंटेलिजेंस शेयरिंग और थ्रेट एनालिसिस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
आईबी सूत्रों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था में केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था अहम है। अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले इनपुट को एक साथ रखकर संदिग्ध गतिविधियों और खतरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। इससे किसी खतरे की सूचना मिलने पर संबंधित एजेंसी को तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
सुरक्षा ग्रिड का एक प्रमुख हिस्सा मल्टी-एजेंसी सेंटर (एमएसी) है। इसके जरिये साइबर हमले, हैकिंग और साइबर जासूसी से जुड़े इनपुट की निगरानी की जाएगी। किसी संदिग्ध साइबर गतिविधि की जानकारी मिलने पर उसे संबंधित सुरक्षा और जांच एजेंसियों के साथ साझा करने की व्यवस्था है। यानी सम्मेलन की सुरक्षा अब केवल जमीन पर मौजूद सुरक्षा बलों और बैरिकेडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर स्पेस की गतिविधियों को भी निगरानी के दायरे में रखा गया है।
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