लाल किला के पास में हुए कार विस्फोट मामले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की चार्जशीट से फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में कथित आतंकी मॉड्यूल की गतिविधियों का सिलसिलेवार खुलासा हुआ है।
जांच के मुताबिक, विस्फोटक तैयार करने व उनका परीक्षण करने की शुरुआत यूनिवर्सिटी परिसर से हुई। पहला सफल परीक्षण परिसर में ट्यूबवेल के पास किया गया। इसके बाद आरोपियों ने यूनिवर्सिटी से बाहर सुनसान खेत में टेस्ट ब्लास्ट किया और फिर गतिविधियों को धौज की अरावली के जंगलों तक ले गए।
एनआईए के मुताबिक, यही मॉड्यूल बाद में अधिक मात्रा में आईईडी तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ा। खेत में परीक्षण के बाद कथित मॉड्यूल ने फरीदाबाद की अरावली पहाड़ियों का रुख किया। धौज क्रशर जोन की ओर जंगलों में उमर उन नबी और मुजम्मिल गनाई द्वारा टीएटीपी के परीक्षण किए जाने का आरोप है। एनआईए ने एक परीक्षण में इस्तेमाल पाइप जैसी वस्तु के अवशेष बरामद होने का भी दावा किया है।
चार्जशीट में दावा किया कि शुरुआत में आरोपी उर्वरक आधारित विस्फोटकों के साथ प्रयोग कर रहे थे। परीक्षणों के बाद उन्होंने टीएटीपी की ओर रुख किया। इसके बाद कथित मॉड्यूल की गतिविधियां छोटे प्रयोगों से आगे बढ़कर आईईडी तैयार करने तक पहुंच गईं।
एनआईए की चार्जशीट में अल-फलाह यूनिवर्सिटी परिसर स्थित फ्लैट नंबर चार में भी टीएटीपी तैयार करने के प्रयोग किए जाने का उल्लेख है। जांच एजेंसी के अनुसार, नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान मुख्य आरोपी उमर उन नबी ने इस फ्लैट में प्रयोग किए।
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