Last Updated:
वंदे मातरम को लेकर श्रीनगर से शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच टकराव में बदल गया है. अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में पूरा वंदे मातरम बजने के दौरान उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला सम्मान में खड़े हुए. कांग्रेस ने पूरे गीत को लेकर आपत्ति जताई और एनसी से अपने रुख का समर्थन करने को कहा. जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस को साफ शब्दों में कह दिया कि गठबंधन सहयोगी अपनी शर्तें नहीं थोप सकता. इसके बाद बीजेपी भी मैदान में उतर आई. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और उसे 21वीं सदी की मुस्लिम लीग तक बता दिया.
वंदे मातरम विवाद में उमर और फारूक अब्दुल्ला के पूरे गीत पर खड़े होने से कांग्रेस नाराज हुई. (फोटो वीडियो ग्रैब)
वंदे मातरम को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. इस बार मामला जम्मू-कश्मीर से उठा है और सीधे कांग्रेस के गठबंधन सहयोगी ने ही पार्टी को जवाब दे दिया है. श्रीनगर में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के कार्यक्रम में वंदे मातरम का पूरा संस्करण बजाया गया. मंच पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला मौजूद थे. दोनों पूरे गीत के दौरान सम्मान में खड़े नजर आए. बस यहीं से सियासी कहानी ने नया मोड़ ले लिया. कांग्रेस ने पूरे वंदे मातरम को लेकर आपत्ति जताई और अपने सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस से पार्टी के रुख के साथ खड़े होने की अपील कर दी. कांग्रेस के इस बयान पर एनसी ने भी साफ कर दिया कि गठबंधन में रहना अलग बात है, लेकिन सहयोगी दल अपनी शर्तें थोप नहीं सकता.
मामला इतना बढ़ा कि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच सार्वजनिक बयानबाजी शुरू हो गई. कांग्रेस महासचिव और संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने पूरे वंदे मातरम के गायन पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि पूरा गीत भारत के उस समन्वयवादी और बहुलतावादी विचार से मेल नहीं खाता, जिसकी कल्पना स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी. उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना आजाद, सरोजिनी नायडू और दूसरे नेताओं के विचारों का हवाला दिया. कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में 1937 के फैसले के मुताबिक वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरों तक सीमित रहने का फैसला किया है. लेकिन एनसी ने इस लाइन को मानने से इनकार कर दिया. इसके बाद बीजेपी भी मैदान में कूद गई और कांग्रेस पर तीखा हमला बोल दिया.
The full version of Vande Mataram sits uneasily with the syncretic and pluralist ethos that our freedom fighters envisioned and nurtured for India.
For us, the considered judgment of Mahatma Gandhi, Pandit Nehru, Sardar Patel, Subhash Chandra Bose, Rajendra Prasad, Acharya… pic.twitter.com/VngmVUmevz
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



