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Meena Kumari Entire Life Encapsulated In This Song : एक ऐसा गीत, जिसे सुनते ही लगता है जैसे मीना कुमारी की पूरी जिंदगी आंखों के सामने उतर आई हो. मोहब्बत की पहली आहट से लेकर बिछड़ने का दर्द और उम्रभर की तन्हाई तक, इसके हर बोल में एक अधूरी कहानी सांस लेती है. कैफी आजमी के लिखे शब्द और लता मंगेशकर की दर्द में डूबी आवाज जब मीना की जिंदगी से जुड़ते हैं, तो यह महज फिल्मी गीत नहीं रह जाता. वक्त ने इसे ऐसा गीत बना दिया, जिसमें एक अदाकारा का प्यार, दर्द और अधूरापन हमेशा के लिए कैद हो गया.

नई दिल्ली. मीना कुमारी के मशहूर गानों की बात हो तो उनकी जिंदगी और पर्दे के बीच का फर्क मिटता हुआ नजर आता है. ‘अजीब दास्तां है ये’, ‘नैना बरसे रिमझिम रिमझिम’ और ‘ठाड़े रहियो’ जैसे गीतों में उनकी आंखों का दर्द, तन्हाई और मोहब्बत साफ महसूस होती है. लेकिन एक गीत ऐसा भी है, जिसे सुनते हुए लगता है जैसे मीना कुमारी की पूरी जिंदगी कुछ मिनटों में सिमट गई हो. दिलचस्प बात यह है कि इसे उनकी जिंदगी का गीत बनाने की कोई योजना नहीं थी, मगर वक्त के साथ इसके बोल उनकी कहानी पर ऐसे फिट बैठे कि यह महज एक फिल्मी गाना नहीं रहा.

भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी हीरोइन आईं, जिन्होंने अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज किया. लेकिन ‘ट्रेजेडी क्वीन’ के नाम से मशहूर मीना कुमारी जैसा दर्द शायद ही किसी और के हिस्से आया हो. उनकी नशीली आंखें, गहरी खामोशी और हर किरदार में उतर जाने की काबिलियत ने उन्हें एक ऐसी मल्लिका बनाया जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है. लेकिन नियति का खेल तो देखिए, पर्दे पर दर्द को जीवंत करने वाली यह अदाकारा अपनी निजी जिंदगी में भी ताउम्र उसी तन्हाई और टूटे हुए दिल के दर्द को सहती रही. फोटो साभार-@.rediff

उनकी जिंदगी के इस समंदर जैसे दर्द को, उनकी आखिरी सांसों से ठीक पहले, एक ऐसा गाना मिला जिसने अनजाने में ही सही, उनकी पूरी जीवन-गाथा को 5 मिनट और 57 सेकंड के अंदर समेट कर रख दिया. ये गीत है ‘चलते चलते यूं ही कोई’ आज भी मीना कुमारी की पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है. इसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी, संगीत गुलाम मोहम्मद का था और इसके बोल कैफी आजमी ने लिखे थे. गीत में एक ऐसी स्त्री का दर्द है, जो किसी के चले जाने के बाद भी उसी रास्ते, उसी याद और उसी इंतजार में ठहरी हुई है. फोटो साभार-@.rediff

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फिल्म में मीना कुमारी का किरदार ‘साहिबजान’ जब इस गीत पर थिरकता है तो यह सिर्फ एक खूबसूरत फिल्मी सीन नहीं लगता. उसकी अदाओं के पीछे एक बेचैनी है, चेहरे पर एक अधूरी चाहत है और आंखों में ऐसा दर्द है, जिसे शब्दों की जरूरत नहीं पड़ती. यही वजह है कि दशकों बाद भी जब यह गीत बजता है, तो लोगों को अकसर साहिबजान से ज्यादा मीना कुमारी याद आती हैं. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

इस गीत की सबसे खास बात यह है कि इसके शब्दों को अगर मीना कुमारी की जिंदगी के संदर्भ में सुना जाए तो उनका अर्थ और गहरा हो जाता है. ‘चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था’ जैसी पंक्तियों में अचानक मिली मोहब्बत की खुशी है, लेकिन उसी के साथ उसके खो जाने का डर और उसकी याद भी है. मीना कुमारी की निजी जिंदगी में भी मोहब्बत, रिश्ते, अकेलापन और टूटन एक-दूसरे से अलग नहीं थे. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

गाने को बोले- ‘चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था, सरे राह चलते चलते…’. मीना कुमारी की जिंदगी भी तो कुछ ऐसी ही रही. बचपन से ही कैमरे के सामने काम करने वाली मीना कुमारी को अपनी जिंदगी के सफर में प्यार की तलाश थी. निर्देशक कमाल अमरोही के रूप में उन्हें हमसफर मिला भी, लेकिन वह रिश्ता खुशी से ज्यादा दर्द दे गया. रिश्तों का टूटना, अकेलापन, शराब की लत और गिरती सेह. इस सबने उनके जीवन को उस मोड़ पर ला खड़ा किया जहां रास्ते धुंधले होते चले गए. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

गाने के बोल आगे कहते हैं ‘वहीं थम के रह गई है मेरी रात ढलते ढलते…’ यह लाइन मीना कुमारी की असल जिंदगी का कड़वा सच बन गई. फिल्म ‘पाकीजा’ को बनने में लगभग 14 साल का लंबा वक्त लगा. जब यह फिल्म बनकर तैयार हुई, तब तक मीना कुमारी लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी की जकड़ में आ चुकी थीं. उनकी जिंदगी की रात सचमुच ढलने की कगार पर थी. फोटो साभार-@.rediff

‘ये चिराग बुझ रहे हैं मेरे साथ ढलते ढलते…’फिल्म के इस सीन में मीना कुमारी शमा को देख डांस करती नजर आती हैं. परदे पर बुझते चिराग का वो मंजर इस बात का दुखद संकेत था कि इस महान अदाकारा की अपनी जिंदगी की लौ भी अब बुझने ही वाली है. इस गाने की शूटिंग के दौरान मीना कुमारी इतनी बीमार थीं कि कई मुश्किल डांस स्टेप्स के लिए बॉडी डबल का इस्तेमाल करना पड़ा था, लेकिन चेहरे के जो क्लोज-अप शॉट्स मीना कुमारी ने दिए, उनमें उनका अंदरूनी दर्द साफ छलक रहा था. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

4 फरवरी 1972 को जब ‘पाकीज़ा’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई तो दर्शकों ने मीना कुमारी के इस रूप और इस गाने को सिर आंखों पर बैठा लिया. थिएटर्स में ‘चलते चलते’ गाने पर लोग स्क्रीन पर सिक्के उछाला करते थे. लेकिन इस ऐतिहासिक सफलता का जश्न मनाने के लिए मीना कुमारी के पास वक्त ही नहीं बचा था. फिल्म रिलीज होने के महज दो महीने बाद, 31 मार्च 1972 को महज 38 साल की उम्र में मीना कुमारी ने दुनिया को अलविदा कह दिया. जिस गाने में उन्होंने गाया था कि ‘ये चिराग बुझ रहे हैं…’, ठीक वही हुआ. फिल्म की सफलता के उजाले के बीच भारतीय सिनेमा का वो सबसे जगमगाता चिराग हमेशा के लिए बुझ गया. फोटो साभार-@.rediff

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