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होमखेलक्रिकेटसबसे ज्यादा टेस्ट हारने वाले 5 कप्तान, 12 साल से अटूट है विश्व कीर्तिमान

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5 captains most lost test matches: टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक कप्तानी करना एक बड़ी चुनौती है. खेल के इतिहास में ग्रीम स्मिथ, स्टीफन फ्लेमिंग, जो रूट , ब्रायन लारा और एलन बॉर्डर जैसे महान कप्तानों के नाम सबसे ज्यादा मैच हारने का अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज है. इन दिग्गजों ने भले ही अपनी टीमों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, लेकिन लंबे नेतृत्व का यह कड़वा सच भी उनके करियर का हिस्सा रहा. टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक मैच हारने वाले इन टॉप 5 कप्तानों के संघर्ष और उनके व्यक्तिगत शानदार बल्लेबाजी आंकड़ों के बारे में आइए जानते हैं.

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विश्व के पांच कप्तान जिन्होंने सबसे ज्यादा टेस्ट मैच हारे.

नई दिल्ली. टेस्ट क्रिकेट का मैदान केवल रनों की बरसात या शतक ठोकने का मंच नहीं है. यह एक कप्तान की सोच, धैर्य और नेतृत्व क्षमता की असली परीक्षा है. क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे महान नाम हुए हैं जिन्होंने अपने नेतृत्व में टीम को नई बुलंदियों पर पहुंचाया. हालांकि, सबसे लंबे फॉर्मेट में लगातार कप्तानी करने की अपनी एक अलग कीमत होती है. जब कोई कप्तान लंबे समय तक देश की बागडोर संभालता है, तो जीत के साथ-साथ हार का ग्राफ भी अपने आप बढ़ता चला जाता है. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा मैच हारने वाले पांच कप्तानों की लिस्ट में खेल के दिग्गज शामिल हैं. खास बात यह है कि ये सभी वही खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपनी-अपनी टीमों की किस्मत बदली और वर्षों तक कप्तानी का भारी बोझ अपने कंधों पर उठाया.

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज सलामी बल्लेबाज ग्रीम स्मिथ (Graeme Smith) को बेहद कम उम्र में टीम की कमान सौंप दी गई थी. उन्होंने 2003 से 2014 के बीच 109 टेस्ट मैचों में कप्तानी की, जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है. हालांकि, लंबे कप्तानी करियर का एक पहलू यह भी रहा कि स्मिथ सबसे ज्यादा टेस्ट मैच हारने वाले कप्तानों की लिस्ट में शीर्ष पर हैं. अपने करियर में कप्तान के तौर पर उन्होंने 29 टेस्ट मैचों में हार का स्वाद चखा. इस दौरान स्मिथ ने 57 पारियों में 25.22 की औसत से 1362 रन बनाए, जिसमें 8 अर्धशतक शामिल थे. हालांकि वह कप्तान के तौर पर अपने इस दौर में शतक नहीं जमा सके, लेकिन उन्होंने एक युवा और बिखरी हुई टीम को विश्व की सबसे मजबूत टेस्ट टीमों में से एक बनाया.

विश्व के पांच कप्तान जिन्होंने सबसे ज्यादा टेस्ट मैच हारे.

स्टीफन फ्लेमिंग दूसरे नंबर पर
न्यूजीलैंड के सबसे सफल और चतुर कप्तानों में शुमार स्टीफन फ्लेमिंग (Stephen Fleming) इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं. 1997 से 2006 के बीच फ्लेमिंग ने न्यूजीलैंड की कप्तानी संभाली और टीम को एक जुझारू पहचान दी. उनके कप्तानी काल में न्यूजीलैंड ने 27 टेस्ट मैच गंवाए. मैदान पर रणनीति बनाने में माहिर फ्लेमिंग ने इन मैचों की 54 पारियों में 29.42 की औसत से 1589 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 117 रनों की एक शतकीय पारी खेली और 11 अर्धशतक भी जड़े. न्यूजीलैंड जैसे छोटे क्रिकेटिंग राष्ट्र के लिए सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार चुनौती पेश करना फ्लेमिंग की कप्तानी की सबसे बड़ी ताकत थी.

मॉडर्न दौर में इंग्लैंड का संकटमोचक जो रूट
मॉडर्न डे क्रिकेट के महान बल्लेबाजों में से एक जो रूट (Joe Root) ने 2017 से 2026 के बीच इंग्लैंड की टेस्ट कप्तानी का दायित्व निभाया. जब इंग्लैंड की टीम बदलाव के दौर से गुजर रही थी, तब रूट ने अकेले दम पर बल्लेबाजी का भार संभाला. कप्तानी के दौर में रूट ने कुल 27 टेस्ट मैचों में हार का सामना किया, जिससे वह फ्लेमिंग के साथ बराबरी पर हैं. हार के बावजूद कप्तान के रूप में रूट का व्यक्तिगत प्रदर्शन शानदार रहा. उन्होंने इन 27 मुकाबलों की 54 पारियों में 34.48 की औसत से 1793 रन बनाए. उनके बल्ले से नाबाद 180 रनों का एक यादगार शतक और 15 अर्धशतक निकले. रूट का कप्तानी कार्यकाल यह दर्शाता है कि एक खिलाड़ी का बल्ला कितना भी रन उगले, टेस्ट मैच जीतने के लिए पूरी टीम के सामूहिक योगदान की जरूरत होती है.

वेस्टइंडीज के ढलते सूरज का अकेला योद्धा ब्रायन लारा
क्रिकेट इतिहास के सबसे प्रतिभाशाली बल्लेबाजों में गिने जाने वाले वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा (Brian Lara) का नाम भी इस फेहरिस्त में शामिल है. 1998 से 2006 के बीच लारा ने वेस्टइंडीज की कप्तानी तब संभाली जब कैरेबियाई क्रिकेट का स्वर्णिम दौर समाप्त हो रहा था. लारा के नेतृत्व में वेस्टइंडीज ने 26 टेस्ट मैच गंवाए. हालांकि, हारने वाले मैचों में भी लारा का बल्ला जमकर बोला. इन 26 मैचों की 52 पारियों में उन्होंने 40.50 की बेहतरीन औसत से 2106 रन बनाए. इसमें 202 रनों के सर्वोच्च स्कोर के साथ 5 शतक और 11 अर्धशतक शामिल थे. लारा अक्सर एक अकेले योद्धा की तरह मैदान पर डटे रहे, लेकिन दूसरे छोर से समर्थन न मिलने के कारण टीम को हार का सामना करना पड़ा.

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के नए युग के जनक एलन बॉर्डर
1980 और 1990 के दशक में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की तस्वीर बदलने का श्रेय एलन बॉर्डर (Allan Border) को जाता है. 1984 से 1994 के बीच बॉर्डर ने ऑस्ट्रेलियाई टीम की कमान संभाली. उनके कप्तानी दौर में ऑस्ट्रेलिया को 22 टेस्ट मैचों में हार मिली. कप्तानी के दौरान दबाव के क्षणों में बॉर्डर ने 44 पारियों में 27.14 की औसत से 1140 रन बनाए, जिसमें नाबाद 152 रनों की शतकीय पारी और 4 अर्धशतक शामिल थे. बॉर्डर ने जिस टीम की नींव रखी, उसी पर आगे चलकर ऑस्ट्रेलिया ने विश्व क्रिकेट पर एकछत्र राज किया.

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…

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