संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। जन्माष्टमी के अवसर पर दिल्ली में कृष्ण के बाल स्वरूप, प्रेम, प्रतिरोध और दर्शन को विभिन्न मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शाया गया। इन आयोजनों में परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक और शास्त्रीय नृत्य का सुंदर मेल दिखाई दिया। यह मंचन कृष्ण की लीलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बना।
श्रीराम भारतीय कला केंद्र की कृष्ण प्रस्तुति ने इस वर्ष अपने पचास साल पूरे किए। सुमित्रा चरत राम की परिकल्पना से शुरू यह मंचन कृष्ण की लीलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाता रहा है। निर्देशक शोभा दीपक सिंह ने कहा कि कृष्ण केवल देवता नहीं, बल्कि यशोदा के नटखट लाल, गोपियों के प्रिय और अत्याचार के खिलाफ नायक भी हैं। रणभूमि में अर्जुन के सारथी के रूप में उनका दार्शनिक स्वरूप सामने आता है। माखनचोर कृष्ण में बालमन, राधा के कृष्ण में प्रेम और गीता के कृष्ण में दर्शन दिखाई देता है। कथक नृत्यांगना उमा शर्मा ने कृष्ण लीलाओं के मंचन में शास्त्रीय नृत्य की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में उमा शर्मा और शिष्यों के बाईसवें वार्षिक कार्यक्रम राम-श्याम में कथक से राम और कृष्ण के स्वरूप सामने आए। शिष्यों ने गोवर्धन लीला, माखन चोरी और कालिया मर्दन जैसे प्रसंगों को नृत्य में साकार किया।
तकनीक से जुड़ा कान्हा का स्वरूप
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने द्वारका के सेक्टर-दस स्थित डीडीए ग्राउंड में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया। यहां तकनीक और परंपरा का अद्भुत मेल देखने को मिला। डिजी-कल्चरल पवेलियन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, संवर्धित वास्तविकता और संवादात्मक खेल क्षेत्रों से कृष्ण कथा को नई पीढ़ी की तकनीकी भाषा से जोड़ा गया। ब्रज की होली, संगीतमय कार्यक्रम और भजन क्लबिंग जैसी प्रस्तुतियां भी हुईं।
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