Image Slider

Last Updated:

‘हनुमान अंश’ में एक ऐसी सीट है, जो हर शो में खाली रखी जाती है. वो है सीट नंबर 9. क्या ये मजबूरी या अंधविश्वास है? आखिर क्यों मेकर्स ने इस सीट को किसी दर्शक के लिए बुक नहीं किया? इसके पीछे की वजह जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. क्या यह सिर्फ आस्था है या फिल्म से जुड़ा कोई खास रहस्य? जानिए सीट नंबर 9 की पूरी कहानी…

Zoom

नई दिल्ली. सिनेमाघरों में फिल्म देखने के लिए लोग अपनी पसंद की सीट पहले से बुक करते हैं, लेकिन इन दिनों एक फिल्म की स्क्रीनिंग में एक खास सीट दर्शकों के लिए उपलब्ध ही नहीं है. वजह भी बेहद दिलचस्प है. आस्था और सिनेमा के इस अनोखे मेल ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है. फिल्म की कहानी जिस आध्यात्मिक शख्सियत से जुड़ी है, उनके सम्मान में हर शो में एक सीट खाली रखी जा रही है. सवाल उठता है कि आखिर सीट नंबर 9 ही क्यों?

‘हनुमान अंश’ की स्क्रीनिंग के दौरान मिराज सिनेमाज ने सीट नंबर 9 को रिजर्व रखने का फैसला किया है. सिनेमा चेन ने सोशल मीडिया पर बताया कि हर दिन, हर शो में यह सीट नीम करोली बाबा के लिए रखी जाएगी. मान्यता है कि बाबा अपने भक्तों के साथ फिल्म देखने आएंगे. इस ऐलान के बाद लोगों के बीच सबसे ज्यादा एक्साइटमेंट इसी बात को लेकर है कि आखिर नंबर 9 का चुनाव क्यों किया गया.

हनुमान जी से कैसे जुड़ा है नंबर 9?

मिराज सिनेमाज के इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर सीट नंबर 9 ही क्यों चुनी गई? भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं और अंकशास्त्र (Numerology) के मुताबिक, नंबर 9 का संबंध भगवान हनुमान से गहराई से जुड़ा हुआ है. अंकशास्त्र में नंबर 9 को मंगल ग्रह का प्रतीक माना जाता है. मंगल ग्रह साहस, शक्ति, ऊर्जा और दृढ़ संकल्प का प्रतिनिधित्व करता है. ये सभी गुण भगवान हनुमान के स्वरूप से सीधे तौर पर जुड़े हैं. इसके अलावा, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना करने से शनिदेव सहित अन्य ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है.

ये है वजह?

नीम करोली बाबा के भक्तों और उनसे जुड़ी आध्यात्मिक परंपराओं में उन्हें भगवान हनुमान का अंश माना जाता है. वहीं, कुछ हिंदू धार्मिक और अंक-ज्योतिष संबंधी मान्यताओं में नंबर 9 को हनुमान जी से जोड़ा जाता है. इसका संबंध मंगल ग्रह से बताया जाता है, जिसे साहस, शक्ति, ऊर्जा और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है. यही, गुण हनुमान जी से भी जुड़े माने जाते हैं. इसलिए सीट नंबर 9 को नीम करोली बाबा के लिए रिजर्व करने की वजह के तौर पर यह एक आस्था और परंपरा से जुड़ी मान्यता है.

कौन थे नीम करौली बाबा?

नीम करौली बाबा का वास्तविक नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था. उनका जन्म 1900 के आस-पास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में हुआ था. उन्होंने अपना पूरा जीवन मानव सेवा, करुणा और भगवान हनुमान की भक्ति में समर्पित कर दिया. 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में उन्होंने देह त्याग दी. बाबा के जीवन से जुड़े अनगिनत चमत्कारों की कहानियां उनके भक्तों के बीच रची-बसी हैं.

बॉक्स ऑफिस पर ‘हनुमान अंश’ का चमत्कारिक सफर

करीब 1.75 से 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने पहले दिन महज 10 लाख रुपये की धीमी शुरुआत की थी. हालांकि, दर्शकों की जबरदस्त रिव्यूज के दम पर फिल्म ने ऐसा मोड़ लिया कि यह इस साल की सबसे बड़ी सरप्राइज हिट बन गई. ट्रेड आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने अपनी रिलीज के 25वें दिन तक भारत में 45.28 करोड़ रुपये का नेट और 53.43 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन दर्ज कर लिया था, जो कि इसके निर्माण बजट से कई गुना अधिक है.

About the Author

authorimg

Shikha Pandey

15 साल पहले पत्रकारिता से शुरू हुआ शिखा पाण्डेय का सफर आज भी उसी जुनून के साथ जारी है. दिसंबर 2019 में न्यूज18 हिंदी से जुड़ने के बाद वह चीफ सब एडिटर के रूप मे…

और पढ़ें

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||