Noida Chotpur Colony Ground Report : नोएडा की चोटपुर कालोनी के लोग इस वक्त काफी परेशान हैं. उनका आरोप है कि पूरी कॉलोनी में केवल 5 से 10 प्रतिशत घरों में ही बिजली के मीटर दिए गए हैं. अरविंद प्रजापति समेत कुछ अन्य निवासियों ने आरोप लगाया कि जानबूझकर बड़ी संख्या में लोगों को मीटर नहीं दिए गए, ताकि अवैध तरीके से बिजली उपलब्ध कराने के नाम पर अधिकारी मोटा पैसा कमा सकें. हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि उनकी मांग किसी मुफ्त सुविधा की नहीं है. वे चाहते हैं कि उन्हें वैध बिजली कनेक्शन दिया जाए और वे उसका निर्धारित भुगतान करने के लिए तैयार हैं.
कैंडल की रोशनी में अक्षर दिखाई नहीं देते
रियलिटी चेक के दौरान लोकल 18 की टीम ने उन छात्रों से बात की, जो उमस भरी गर्मी में घर के अंदर बिना बिजली के मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ाई कर रहे थे. क्लास 7 में पढ़ने वाले हेमंत ने बताया कि कॉलोनी में पिछले चार-पांच दिनों से बिजली की समस्या बनी हुई है. उनका कहना है कि कैंडल की रोशनी में किताब के अक्षर ठीक से दिखाई नहीं देते, लेकिन मजबूरी में उन्हें इसी तरह पढ़ना पड़ रहा है, क्योंकि आने वाले दिनों में उनके एग्जाम हैं. उनका कहना है कि अगर पढ़ाई नहीं करेंगे तो परीक्षा में पीछे रह जाएंगे. वहीं सुमित और खुशी ने बताया कि वे नोएडा जैसे शहर में रहते हैं, लेकिन पढ़ाई के लिए कैंडल का सहारा लेना पड़ रहा है. उनके मुताबिक, यह उनके लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. गर्मी और उमस के बीच भी उन्हें मोमबत्ती की सीमित रोशनी में किसी तरह पढ़ाई करनी पड़ रही है, क्योंकि इन परिवारों के पास फिलहाल कोई दूसरा विकल्प नहीं है.
चंद एक दो किमी दूर चमचमाता दिखेगा नोएडा
ये तस्वीरें नोएडा के किसी दूर-दराज या अछूते इलाके की नहीं हैं. चंद एक-दो किलोमीटर की दूरी पर जहां चमचमाती इमारतें और आधुनिक नोएडा की तस्वीर दिखाई देती है, वहीं दूसरी तरफ चोटपुर कॉलोनी में बच्चे रात के अंधेरे में मोमबत्ती जलाकर अपने एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं. यह तस्वीर अपने आप में कई सवाल खड़े करती है. एक तरफ आधुनिक शहर और विकास की चमक है, तो दूसरी तरफ उसी शहर में बच्चे बिजली के बिना अंधेरे घरों में बैठकर अपनी पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं.
लाखों की आबादी बसती गई, अधिकारियों को पता नहीं चला
गृहिणी कमलेश का कहना है कि बच्चों को इसी तरह मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ते हुए करीब पांच दिन हो गए हैं. मजबूरी में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी और लाखों की आबादी वाली कॉलोनी में हजारों परिवार कब से बस रहे हैं, तब संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई. अब ऐसी स्थिति बन गई है कि लाखों लोगों को अंधेरे में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. बिजली नहीं होने का असर सिर्फ बच्चों की पढ़ाई पर नहीं, बल्कि पानी, खाना बनाने और परिवार की पूरी दिनचर्या पर पड़ रहा है.
रियलिटी चेक के दौरान अरविंद प्रजापति अंधेरे में पढ़ रहे बच्चों को गाइड करते हुए मिले. उन्होंने कहा कि जब देश 2047 तक विकसित भारत का सपना देख रहा है, तो ऐसे हालात में उस लक्ष्य को कैसे हासिल किया जाएगा. उन्हें लगता है कि आगे बढ़ने के बजाय लोग पीछे की ओर जा रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब यहां रहने वाले लोगों के घरों के पते पर उनके जरूरी दस्तावेज बने हुए हैं, उन्हें राशन मिलता है और वे वोट भी देते हैं, तो फिर उन्हें किस आधार पर गलत ठहराया जा रहा है. उनके मुताबिक यहां रहने वाले लोगों के पास राशन कार्ड, वोटर आईडी और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज मौजूद हैं.
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Sandeep Kumar is a senior journalist and digital newsroom leader with more than 20 years of experience in print and digital journalism. He currently serves as Senior Assistant Editor at News18 Hindi, where he l…
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