संजय निषाद ने कहा कि पिछली सरकार में किस तरीके से रेल आंदोलन किया था. आप सभी को पता होगा. 2015 में 60 गाड़ियां फुंकवाईं, गोली चलवाया, मेरे भाई को मरवाया. लोगों को बंद किया. हमें अपराधी घोषित कर दिया जाता.
निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद.
एनडीए की सरकार में सभी जातियों को मौका मिले.
संजय निषाद ने सवाल का जवाब देते हुए कहा कि अगर अखिलेस यादव की सरकार सभी जातियों का अवसर मिलता तो सभी जाति के लोग विधानसभा और लोकसभा में जाते. सभी जातियों के लोग आईएएस और आईपीएसस बनते और सभी जाति इनके साथ रहती. जातियों को धोखा देने का काम किया है. इसीलिए सभी जातियों ने मिलकर इनको सत्ता से बाहर कर दिया. हमारे यहाँ धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि जिसकी जैसी सोच होती है, वैसे ही मुहूर्त देखता है. इनके समय में जाति देखकर गोली चलाई जाती थी, जाति देखकर लोगों को नौकरी दी जाती थी.
आधा तो हाथी-साइकिल वाले नौकरी में हैं.
एसटीएफ को लेकर अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार करते हुए संजय निषाद ने कहा कि वो 28, 00, 000 नौकरी वाले किस जाति के हैं. आप सोच लीजिए 28,00,000 में 14,00,000 में ये हाथी-साइकिल वाले हैं. आज कम से कम सरकार को धन्यवाद देते हैं कि अब जो भर्ती निकलती है, लोक सेवा आयोग की तरफ से होता हैं. इसके चलते सभा जाति के लोग नौकरी पाती हें, एसपी बन रहे हैं और तहसीलदार बन रहे हैं. नहीं तो पहले दिखाई नहीं देते थे. कहीं निषाद खोजने चलिए थाने में तो 50 सिपाही होंगे. आधे से ज्यादा लोग तो यही हैं.
इनकी सरकार में निषाद समाज का चपरसी तक नहीं मिलता था
इसके आगे संजय निषाद ने कहा कि बताइए इनके शासन काल में निषाद समाज का एक चपरासी और होमगार्ड तक नहीं मिला था. भर-राजभर नहीं मिलता था. 61,500 करोड़ रुपया अलग से मंत्रालय ने जारी किया है और इनके बच्चों को शिक्षा के लिए पैसा दिया है. इनके रोजगार के दे दिया. प्रधानमंत्री ने केसीसी दिया है और मुख्यमंत्री की संपदा योजना में पट्टेदारक पैसा ले जाएं, मछली पाले.
मेरे सामने मेरे भाई को गोली मारी गई
इसके आगे संजय निषाद ने कहा कि पिछली सरकार में किस तरीके से रेल आंदोलन किया था. आप सभी को पता होगा. 2015 में 60 गाड़ियां फुंकवाईं, गोली चलवाया, मेरे भाई को मरवाया. लोगों को बंद किया. हमें अपराधी घोषित कर दिया जाता. जो बस में जाते थे, तो उनकी जाति देखकर उनको मारते थे. बहन बेटों की कैसे पिटाई हुई? लड़कों को कैसे पिटा? इनको पूछा जाना चाहिए. इनके एसपी गए पूछे कौन है, कौन पड़ा है, कौन पड़ा भी है, वो सोचा होगा, ज्यादा पड़े होंगे तो छोड़ देंगे. उनको कट्टे में बंद कर दिया। और जब हमने जब 156 दिन दाखिल किया तो कोर्ट ने कहा ये पुलिस ने गलत गोली चलाई है और ये गोली पुलिस की गोली से मरा हाथ में है.
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Prashant Rai is a digital journalist with over 9 years of experience in Hindi journalism, specializing in politics, crime, hyper-local reporting, and viral news. He currently serves as Chief Sub Editor at News1…
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