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होमखेलक्रिकेटगौतम गंभीर की 643 मिनट की ‘मैराथन तपस्या’, टेस्ट बचाने के लिए खेली 436 गेंद

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gambhir cricket record: 2009 में गंभीर ने मैच बचाने के लिए आक्रामक क्रिकेट को पूरी तरह छोड़ दिया और क्रीज पर खूंटा गाड़ लिया. उन्होंने दूसरी पारी में 137 रनों की बेहद धैर्यपूर्ण पारी खेली. यह सिर्फ एक शतक नहीं था, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की सबसे लंबी पारियों में से एक थी. गंभीर ने इस पारी के लिए 436 गेंदों का सामना किया और करीब 643 मिनट (10 घंटे से अधिक) तक क्रीज पर डटे रहे.

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2009 में नेपियर टेस्ट मैच बचाने के लिए मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर ने की थी 10 घंटे बल्लेबाजी

नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर कई पारियां शतक और दोहरे शतक के लिए याद रखी जाती हैं, लेकिन कुछ पारियां ऐसी होती हैं जो हार के जबड़े से जीत या ड्रॉ छीनने के लिए इतिहास के पन्नों में अमर हो जाती हैं आज से करीब 17 साल पहले, साल 2009 में न्यूज़ीलैंड के नेपियर मैदान पर टीम इंडिया के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर ने एक ऐसी ही ‘संकटमोचक’ पारी खेली थी, जिसने भारतीय क्रिकेट को एक शर्मनाक हार से बचाया था.

हाल ही में श्रीलंका के उभरते हुए खिलाड़ी सोनल दिनुषा ने घरेलू क्रिकेट में कुछ ऐसा ही कमाल किया, जिसने पूरी दुनिया को भारतीय कोच गौतम गंभीर के उस ऐतिहासिक और जुझारू सफर की याद दिला दी. इसीलिए मैच के बाद गंभीर ने सोनल के जज्बे की जमकर तारीफ की. आइए चलते हैं 17 साल पीछे, नेपियर के उस ऐतिहासिक महा-संग्राम में जहां गंभीर ने अपनी बल्लेबाजी को ‘तपस्या’ बना दिया था.

जब बैकफुट पर थी टीम इंडिया

मार्च 2009 में भारतीय टीम न्यूज़ीलैंड के दौरे पर थी. नेपियर में खेले गए सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच में न्यूज़ीलैंड ने पहली पारी में 9 विकेट पर 619 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था. जवाब में भारतीय टीम पहली पारी में सिर्फ 305 रनों पर सिमट गई और उसे फॉलोऑन खेलने पर मजबूर होना पड़ा. भारत के सामने दूसरी पारी में ढाई दिन बल्लेबाजी करने और मैच बचाने की असंभव सी चुनौती थी. न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज पूरी तरह हावी थे और भारत की हार तय लग रही थी.

गंभीर की वो 643 मिनट की ‘मैराथन तपस्या’

जब भारत ने दूसरी पारी की शुरुआत की, तो सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर के कंधों पर पूरे देश की उम्मीदों का बोझ था. गंभीर ने मैच बचाने के लिए आक्रामक क्रिकेट को पूरी तरह छोड़ दिया और क्रीज पर खूंटा गाड़ लिया. उन्होंने दूसरी पारी में 137 रनों की बेहद धैर्यपूर्ण पारी खेली. यह सिर्फ एक शतक नहीं था, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की सबसे लंबी पारियों में से एक थी. गंभीर ने इस पारी के लिए 436 गेंदों का सामना किया और करीब 643 मिनट (10 घंटे से अधिक) तक क्रीज पर डटे रहे. उन्होंने वीवीएस लक्ष्मण (124*) और राहुल द्रविड़ (62) के साथ मिलकर न्यूज़ीलैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह थका दिया. गंभीर के इस चट्टानी प्रदर्शन की बदौलत भारत ने दूसरी पारी में 4 विकेट पर 476 रन बनाए और मैच को शानदार तरीके से ड्रॉ कराया.
इस पारी के लिए गंभीर को ‘द वॉल’ राहुल द्रविड़ ने भी सलाम किया था.

सोनल दिनुषा ने कैसे ताजा की यादें?

हाल ही में श्रीलंका के सोनल दिनुषा ने कोलंबो में एक बेहद संघर्षपूर्ण पारी खेली, जिसने फैंस और विशेषज्ञों को गंभीर के नेपियर टेस्ट की याद दिला दी. दिनुषा ने भी अपनी टीम को हार से बचाने के लिए ठीक वैसे ही सैकड़ों गेंदें खेलीं और क्रीज पर घंटों बिताए. सोशल मीडिया और क्रिकेट गलियारों में तुरंत चर्चा शुरू हो गई कि सोनल दिनुषा ने फैंस को 17 साल पहले के गंभीर के उस ऐतिहासिक नेपियर सफर पर वापस भेज दिया है, जहां रनों से ज्यादा क्रीज पर टिकने का समय मायने रखता था. आज गौतम गंभीर भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच की भूमिका में हैं उनका वही कभी न हार मानने वाला और जुझारू रवैया आज के युवा भारतीय खिलाड़ियों में भी दिखाई देता है. नेपियर की वह पारी आज भी हर उस युवा क्रिकेटर के लिए एक बानगी है जो विपरीत परिस्थितियों में टीम के लिए दीवार बनना चाहता है.

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Rajeev MishraAssociate editor

राजीव मिश्रा, खेल पत्रकारिता में एक जाना पहचाना चेहरा है जो अपनी बेबाक विशलेषण के लिए जाने जाते है. वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स …

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