Akhilesh VS Jayant: उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘चवन्नी’ वाले बयान के बाद समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच तकरार लगातार बढ़ती जा रही है. अब सहारनपुर में अखिलेश यादव के दौरे और प्रस्तावित रैली को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है. जहां एक तरफ रालोद नेताओं का दावा है कि जाट समाज और चौधरी परिवार पर की गई टिप्पणी के विरोध के चलते सपा को अपनी रैली रद्द करनी पड़ी, वहीं सपा प्रवक्ता फखरुल हसन ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि जब कोई रैली तय ही नहीं थी, तो उसके रद्द होने का सवाल ही नहीं उठता. इस सियासी खींचतान ने पश्चिमी यूपी के राजनीतिक समीकरणों को गरमा दिया है.
अखिलेश के सहारनपुर की रैली रद्द होने के दावों को लेकर सपा-रालोद आमने सामने.
सहारनपुर में अखिलेश यादव के दौरे और प्रस्तावित रैली को लेकर बखेड़ा खड़ हो गया है. ऐसा दावा किया जा रहा है कि अखिलेश के रैली को लेकर चौधरी परिवारों ने बहिष्कार करने का ऐलान किया था. अब रालोद के नेता ने चुटकी लेते हुए कहा कि 6 तारीख को होने वाली सपा की रैली रद्द हो गई. हालांकि, सपा ने पलटवार करते हुए कहा कि कैसी रैली, कहां की रैली, जब रैली होगी तो डंके की चोट पर होगी. अब दोनों दलों के नेताओं के बीच सोशल मीडिया से लेकर बयानों के जरिए एक-दूसरे को घेरने का दौर शुरू हो गया है.
सहारनपुर रैली को लेकर दावे
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी के एक धड़े ने दावा किया कि अखिलेश यादव आगामी 6 तारीख को सहारनपुर पहुंचेंगे और एक विशाल रैली को संबोधित करेंगे. हालांकि, पार्टी के भीतर ही कुछ स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों ने इस पर सवाल खड़े कर दिए कि अगर ऐसी कोई बड़ी रैली तय थी, तो स्थानीय संगठन और नेताओं को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई. इसी बीच, रालोद नेताओं ने दावा किया कि अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान से जाट समाज में भारी नाराजगी है और इसी विरोध के डर से सपा को अपनी यह रैली रद्द करनी पड़ी.
सोशल मीडिया पर रालोद बनाम सपा
इस पूरे मामले पर रालोद नेता रोहित अग्रवाल ने एक्स पर हमला बोलाते हुए लिखा, ‘6 सितंबर को सहारनपुर में अखिलेश यादव की रैली प्रस्तावित थी. चौधरी परिवार पर की गई टिप्पणी के बाद 36 बिरादरी ने रैली के विरोध का निर्णय लिया. चौधरी परिवार हमारा सम्मान है, उस पर टिप्पणी करोगे तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पैर रखने नहीं देंगे.’
इसके जवाब में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन ने पलटवार करते हुए लिखा, ‘कौन-सी रैली, कैसी रैली? जब रैली का कोई कार्यक्रम ही नहीं बना तो रैली रद्द कौन सी हो गई? दिन में सपने देखना बंद करो, रैली जब भी होगी ऐतिहासिक और डंके की चोट पर होगी.’ इसके साथ ही उन्होंने किसानों के मुद्दों और आलू की कीमतों को लेकर भी सरकार और विरोधियों पर निशाना साधा.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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