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महाराष्ट्र सरकार ने मराठी न जानने वाले ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक साल का समय दिया। गुरुवार को मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इस बीच में ड्राइवरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। इस कदम से मराठी भाषा की शर्त को लागू करने का काम एक साल के लिए टल गया है। ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवर संगठनों ने फडणवीस से मुलाकात कर नियम का पालन करने के लिए और समय मांगा था। फडणवीस ने यह भी कहा कि मुंबई में काम करने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी की कामचलाऊ जानकारी जरूरी होने का संगठनों ने समर्थन किया है। उन्होंने तर्क दिया कि ड्राइवर अलग-अलग उम्र के हैं और कई लोग लंबे समय से पढ़ाई से दूर हैं। इसलिए उन्हें मराठी सीखने में समय लग सकता है ।
उन्होंने कहा कि सरकार इस समय का इस्तेमाल सिर्फ़ रियायती अवधि के तौर पर नहीं, बल्कि क्लास और स्टडी मटीरियल के ज़रिए ड्राइवरों को सीखने में मदद करने के लिए करेगी। फडणवीस ने कहा, “इस एक साल के दौरान उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। हम अलग-अलग तरह की क्लास और स्टडी मटीरियल तैयार करके उनकी मदद करेंगे ताकि वे बुनियादी मराठी सीख सकें।” यह घोषणा मुंबई में मराठी के इस्तेमाल को लेकर फिर से शुरू हुई राजनीतिक बहस और लोगों से जुड़ी सेवाओं के लिए भाषा की शर्त को लागू करने की राज्य सरकार की कोशिशों के बीच आई है। इस मुद्दे का असर खास तौर पर शहर के टैक्सी और ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों पर पड़ा है, जिनमें से कई दूसरे राज्यों से आए हैं। ड्राइवर संगठनों ने और समय की मांग की थी, क्योंकि उनका कहना था कि इतने बड़े और अलग-अलग तरह के वर्कफोर्स पर कम समय में भाषा की शर्त लागू करने में व्यावहारिक दिक्कतें हैं। करीब 6 लाख ड्राइवरों को मराठी सिखाने की योजना सरकार के मुताबिक, महाराष्ट्र में करीब 9.16 लाख ऑटो-रिक्शा और 61,657 टैक्सियां हैं। इनमें बड़ी संख्या मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में चलती हैं। सरकार करीब 6 लाख ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सीखने की पहल से जोड़ना चाहती है। सरनाईक ने बताया कि कुछ महीने पहले शुरू किए गए इस अभियान में अब तक 1,65,601 ड्राइवर शामिल हो चुके हैं। खबर अपडेट हो रही है…

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