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5 batsman No ducks in Test career: टेस्ट क्रिकेट में 0 पर आउट हुए बिना अपना करियर खत्म करना बेहद कठिन और दुर्लभ काम है. 149 से ज्यादा वर्षों के इतिहास में सीन विलियम्स, जिम बर्क, रेजी डफ, ब्रिजेश पटेल और रॉबर्ट क्रिस्टियानी ऐसे 5 दिग्गज बल्लेबाज हैं, जिन्होंने 20 से अधिक टेस्ट मैच और दर्जनों पारियां खेलने के बाद भी कभी ‘डक’ का सामना नहीं किया. गेंदबाजों के कड़े प्रहार और कठिन परिस्थितियों के बावजूद इन सूरमाओं का खाता हर बार खुला.
टेस्ट के 5 बल्लेबाज जो कभी नहीं हुए जीरो पर आउट.
इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड में पारियों और निरंतरता की बात करें, तो जिम्बाब्वे के सीन विलियम्स (Sean Williams) का नाम सबसे ऊपर चमकता है. वर्ष 2013 से 2025 तक के अपने 12 साल के लंबे टेस्ट करियर में विलियम्स ने 24 मुकाबले खेले और 47 पारियों में बल्लेबाजी की. अपनी टीम के मजबूत स्तंभ रहे इस बल्लेबाज ने 4 बार नाबाद रहते हुए 45.25 की शानदार औसत से कुल 1946 रन बनाए. उनका सर्वोच्च स्कोर 154 रन रहा, जबकि स्ट्राइक रेट 64.43 का रहा. अपनी 3020 गेंदों की मैराथन पारियों में उन्होंने 6 शतक और 7 अर्धशतक जमाए. उनके बल्ले से 222 चौके और 16 छक्के निकले, लेकिन 47 बार क्रीज पर उतरने के बावजूद किस्मत या तकनीक ने उन्हें कभी भी 0 पर पवेलियन लौटने नहीं दिया.
टेस्ट के 5 बल्लेबाज जो कभी नहीं हुए जीरो पर आउट.
ऑस्ट्रेलियाई मध्यक्रम की मजबूत दीवार जिम बर्क
इस फेहरिस्त में दूसरा बड़ा नाम ऑस्ट्रेलिया के जिम बर्क (Jim Burke) का है. 1950 के दशक में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी को मजबूती देने वाले बर्क ने 1951 से 1959 के दौरान 24 टेस्ट मैचों की 44 पारियों में हिस्सा लिया. 7 बार नाबाद लौटते हुए उन्होंने 34.59 की औसत से कुल 1280 रन जुटाए. 189 रनों के अपने सर्वोच्च स्कोर वाले इस बल्लेबाज ने 3 शतक और 5 अर्धशतकीय पारियां खेलीं. उनकी ठोस तकनीक का ही नतीजा था कि 44 पारियों में गेंदबाजों की तमाम कोशिशों के बावजूद वे कभी ‘डक’ का शिकार नहीं बने.
20वीं सदी की शुरुआत का अनोखा रिकॉर्ड रेजी डफ के नाम
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास का पन्ना थोड़ा और पीछे पलटें, तो 20वीं सदी की शुरुआत में रेजी डफ (Reggie Duff) ने भी ऐसा ही कारनामा करके दिखाया था. 1902 से 1905 के छोटे लेकिन प्रभावी करियर में डफ ने 22 टेस्ट मैच खेले. 40 पारियों में 3 बार नाबाद रहते हुए उन्होंने 35.59 की औसत से 1317 बनाए. 146 रनों के उच्चतम व्यक्तिगत स्कोर के साथ उनके नाम 2 शतक और 6 अर्धशतक दर्ज हुए. उस दौर में जब पिचें बेहद अनिश्चित होती थीं, डफ अपनी 40 पारियों में एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए.
भारतीय फैंस के लिए गर्व का पल
भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए इस सूची में ब्रिजेश पटेल (Brijesh Patel) का नाम गर्व का विषय है. 1974 से 1977 के बीच भारत की मध्यक्रम बल्लेबाजी का हिस्सा रहे ब्रिजेश पटेल ने 21 टेस्ट मैचों में देश का प्रतिनिधित्व किया. इस दौरान उन्होंने 38 पारियों में बल्लेबाजी करते हुए 5 बार नाबाद रहते हुए 972 रन जुटाए. उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नाबाद 115 रहा, और उनका औसत 29.45 का रहा. 794 से अधिक गेंदों का सामना करते हुए उन्होंने 1 शतक और 5 अर्धशतक लगाए. उनके बल्ले से 86 से ज्यादा चौके और 7 शानदार छक्के निकले. भारतीय टीम के लिए खेलते हुए 38 पारियों में वे हर बार अपना खाता खोलने में सफल रहे.
कैरेबियाई आक्रामकता के बीच गजब का धैर्य रॉबर्ट क्रिस्टियानी
वेस्टइंडीज के क्रिकेट की जब बात आती है, तो उनके आक्रामक खेल का जिक्र होता है, लेकिन रॉबर्ट क्रिस्टियानी (Robert Christiani) ने धैर्य का अनूठा उदाहरण पेश किया था. 1948 से 1954 के दौर में क्रिस्टियानी ने वेस्टइंडीज के लिए 22 टेस्ट मैचों में शिरकत की. 37 पारियों में 3 बार नाबाद रहते हुए उन्होंने 26.35 की औसत से 896 रन बनाए. 107 रनों की शतकीय पारी के साथ उन्होंने करियर में 1 शतक और 4 अर्धशतक जड़े. विपक्षी गेंदबाजों की भयानक गेंदों का सामना करते हुए भी उन्होंने अपनी 37 पारियों में कभी 0 का सामना नहीं किया.
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कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…
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