Sakhu-Teak Trees Farming: साखू एक महत्वपूर्ण पेड़ है, जिसका इस्तेमाल जंगल और ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से होता रहा है. इसके पत्तों से दोना-पत्तल बनाए जाते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार और कमाई का अवसर मिलता है. इसकी लकड़ी भी इमारती कामों में इस्तेमाल की जाती है और इसकी बाजार में मांग रहती है. साखू की एक खासियत यह भी है कि इसे अलग-अलग तरह के क्षेत्रों में लगाया जा सकता है.
गोरखपुर: किसान अक्सर साखू और सागवान जैसे इमारती लकड़ी वाले पेड़ों की खेती करते हैं, लेकिन कई बार उन्हें इन पेड़ों की खासियत और सही जगह के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती. ऐसे में गलत स्थान पर पेड़ लगाने से खेती और मिट्टी पर असर पड़ सकता है. गोरखपुर यूनिवर्सिटी के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के प्रोफेसर आरआर. सिंह के मुताबिक साखू और सागवान दोनों ही उपयोगी पेड़ हैं, लेकिन इनकी प्रकृति और उपयोग में काफी अंतर है.
साखू के पत्तों से दोना और लकड़ी से कमाई
प्रोफेसर आर. आर. सिंह बताते हैं कि साखू एक महत्वपूर्ण पेड़ है, जिसका इस्तेमाल जंगल और ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से होता रहा है. इसके पत्तों से दोना-पत्तल बनाए जाते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार और कमाई का अवसर मिलता है. इसकी लकड़ी भी इमारती कामों में इस्तेमाल की जाती है और इसकी बाजार में मांग रहती है. साखू की एक खासियत यह भी है कि इसे अलग-अलग तरह के क्षेत्रों में लगाया जा सकता है. कई आदिवासी समुदाय जंगलों से मिलने वाले साखू के पत्तों और अन्य उत्पादों के जरिए अपनी आजीविका चलाते हैं. यही वजह है कि साखू सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी हिस्सा माना जाता है.
सागवान लगाने से पहले जगह का रखें ध्यान
वहीं सागवान की खेती को लेकर प्रोफेसर आर. आर. सिंह सावधानी बरतने की सलाह देते हैं. उनके मुताबिक सागवान के पत्तों और छाल में टैनिक एसिड जैसे तत्व पाए जाते हैं. इनसे संवेदनशील त्वचा पर संपर्क होने पर जलन या अन्य प्रभाव हो सकता है. सागवान के पत्तों और जैविक अवशेषों के लगातार गिरने से उसके आसपास की जमीन पर भी असर पड़ सकता है. ऐसी परिस्थितियों में पेड़ के नीचे दूसरी वनस्पतियों और घास का विकास प्रभावित हो सकता है. इसलिए सागवान को रिहायशी इलाकों या ऐसी जगहों पर लगाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है.
खेती में पेड़ की जानकारी भी जरूरी
प्रोफेसर का कहना है कि किसानों को सिर्फ यह देखकर पेड़ नहीं लगाना चाहिए कि उसकी लकड़ी महंगी बिकती है. पेड़ की प्रकृति, मिट्टी, आसपास का वातावरण और उसके प्रभाव को समझना भी जरूरी है. साखू और सागवान दोनों उपयोगी हैं, लेकिन सही जगह और सही तरीके से लगाया जाए तभी इनसे बेहतर फायदा हासिल किया जा सकता है.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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