भूमि चिन्हित होने के बाद भी नहीं दिलाया जा रहा कब्जा
लोकल 18 से बात करते हुए मऊ जनपद के मधुबन तहसील क्षेत्र के जमुनीपुर गांव निवासी बब्बन राजभर बताते हैं कि उनका बड़ा बेटा नीतीश कुमार 90 फीसदी तक दिव्यांग है. दिव्यांग पुत्र के पालन-पोषण के लिए प्रशासन ने वर्ष 2025 में गाटा संख्या 370 में 56 कड़ी एक मंडा भूमि आवंटित की थी. यह भूमि राजस्व विभाग में दिव्यांग नीतीश कुमार के नाम पर दर्ज है.
पिछले 10 अक्टूबर 2025 को लेखपाल, कानूनगो आदि की टीम गांव में आई थी और भूमि को चिन्हित करके चली गई. उस दिन वह अपने दिव्यांग बेटे को लेकर उपचार के लिए लखनऊ गए हुए थे. इस दौरान राजस्व टीम ने भूमि को चिन्हित तो कर दिया, लेकिन कोई पत्थर नसब नहीं किया. जब वह लखनऊ से लौटे तो मधुबन तहसील गए और लेखपाल से मिलकर सीमांकन की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.
ओमप्रकाश राजभर की भी नहीं सुन रहे मऊ के अधिकारी
बब्बन राजभर का कहना है कि मऊ जनपद में अधिकारी पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर की भी नहीं सुन रहे हैं. उनके लेटर पैड पर यह भूमि आवंटित हुई है, लेकिन उनसे भी कई बार शिकायत करने के बाद आज तक उन्हें भूमि पर कब्जा नहीं दिलाया गया है.
अब वह अपने 90 फीसदी दिव्यांग बेटे को कंधे पर बैठाकर तहसील से लेकर जिला कलेक्ट्रेट तक चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई उनकी सुनवाई नहीं कर रहा है. उनका आरोप है कि जिस गाटा संख्या में उनके बेटे के नाम भूमि आवंटित की गई है, उस पर किसी दूसरे व्यक्ति ने कब्जा कर रखा है. अब वह सभी सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है.
3 किलोमीटर दूर भूमि देने की बात कह रहा लेखपाल
पीड़ित का कहना है कि जब वह न्याय के लिए अधिकारियों के पास पहुंचता है तो उल्टा लेखपाल वहां पहुंचकर उसका ही वीडियो बनाने लगता है. उनका आरोप है कि लेखपाल 3 किलोमीटर दूर 25 कड़ी भूमि देने की बात कह रहे हैं, जबकि उनके बेटे के नाम एक मंडा जमीन आवंटित की गई है.
जब वह अपने बेटे को लेकर लखनऊ दवा के लिए गए थे, तब उनके ही परिवार के लोगों द्वारा जंजीर खिंचवाकर भूमि चिन्हित कराई गई थी, लेकिन कोई पत्थर नसब नहीं किया गया और जमीन को ऐसे ही छोड़ दिया गया. तब से वह भूमि पर कब्जा दिलाने के लिए सभी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है.
पीड़ित पिता का कहना है कि आज वह जिंदा हैं, इसलिए अपने 90 फीसदी दिव्यांग बेटे को पीठ पर बांधकर घूम रहे हैं और जहां जाना होता है, वहां जाते हैं. लेकिन कल जब वह नहीं रहेंगे, तो उनके बेटे की देखरेख कौन करेगा? यही चिंता उन्हें लगातार परेशान कर रही है.
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