Akhilesh Yadav News: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने मंगलवार को एक पोस्ट कर एनडीए में होने वाले सीट शेयरिंग फॉर्मूला शेयर किया. अब इस पोस्ट के बाद सियासी घमासान शुरू हो गया और सवाल उठने लगे हैं कि क्या अखिलेश यादव ने बीजेपी को प्रेशर में डाल दिया है या फिर एनडीए के सहयोगी दलों में फूट डालने की कोशिश की है.
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बताया कि एनडीए के घटक दलों को बीजेपी कितनी सीटें देने वाली है.
क्या फूट डालो, राज करो की नीति अपना रहे अखिलेश
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में जो नंबर जारी किए हैं, उसके मुताबिक बीजेपी अपने सहयोगी दलों को 162 सीट देने की तैयारी है. अखिलेश यादव के दावे के मुताबिक रालोद को 73, सुभासपा को 39, निषाद पार्टी को 31 और अपना दल (एस) को 19 सीटें मिलने वाली हैं. हालांकि अखिलेश यादव ने यह आंकड़े सूत्रों के हवाले से जारी किए हैं. लेकिन सवाल यह है कि अखिलेश यादव ने विपक्षी गठबंधन की सीटों का संभावित फॉर्मूला पब्लिक क्यों किया है. क्या है बीजेपी पर दबाव बनाने की राजनीति है या फिर फूट डालने की कोशिश. क्योंकि निषाद पार्टी और सुभासपा अधिक सीटों की मांग पहले से कर रही है.
सीटों की संख्या तय करती है सियासत में कद
राजनीति में किसी भी सहयोगी दल के लिए सीटों की संख्या केवल चुनाव लड़ने का मौका नहीं होता है. बल्कि उसे अपना सियासी कद दिखाने का भी मौका होता है. साथ ही संगठन के विस्तार से भी यह फैसला जुड़ा होता है. अब अखिलेश यादव ने जैसे ही सीटों की गणित बताई, वैसे ही अब एनडीए के हर सहयोगी दलों के मन में कम या ज्यादा की भावना आ सकती है. हालांकि खुद सहयोगी दल और बीजेपी फिलहाल सीटों के बंटवारे पर होने वाले विवाद रोकना चाहेगी. क्योंकि यह प्रदेश में बहस का मुद्दा बन सकता है.
क्या अखिलेश ने जयंत और राजभर का बढ़ा दी राजनीतिक हैसियत
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में बताया था कि रालोद को 73 और सुभासपा को 39 सीटें मिल रही हैं तो यह जाहिर है कि अगर यह आंकड़े सही साबित होते हैं तो यह सामान्य बात नहीं होगी. क्योंकि छोटे दलों को इतनी सीटें देना आम बात नहीं है. अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट से यह मैसेज दिया है कि बीजेपी को अपने सहयोगियों की जरूरत इतनी बढ़ गई है कि उसे बड़ी संख्या में सीटें छोड़नी पड़ रही हैं. यानी वह BJP के मजबूत होने की कहानी को पलटकर जनता के सामने पेश कर रहे हैं. इसे हम और आप पॉलिटिकल नैरेटिव भी कह सकते हैं.
PDA बनाम NDA
अखिलेश ने अपने बयान को सिर्फ सीट शेयरिंग तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने इसे PDA के मुकाबले NDA की रणनीति के तौर पर पेश किया है. उनका तर्क है कि BJP पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA के सामाजिक समीकरण की काट निकालने के लिए अपने सहयोगी दलों को ज्यादा सीटें देने की तैयारी कर रही है. यहां अखिलेश का मकसद आंकड़ों से ज्यादा राजनीतिक फ्रेम तय करना है. अगर BJP, RLD को पश्चिमी यूपी में, SBSP को पूर्वांचल में, निषाद पार्टी को तराई क्षेत्र और निषाद बहुल इलाकों में तथा अपना दल को गैर-यादव OBC क्षेत्रों में ज्यादा सीटें देती है, तो इसका अर्थ होगा कि NDA चुनाव को सामाजिक समूहों के प्रतिनिधित्व के आधार पर भी लड़ना चाहता है.
162 सीटों का आंकड़ा BJP के लिए राजनीतिक असहजता क्यों
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं. अखिलेश यादव के बताए आंकड़े के मुताबिक अगर सहयोगियों को 162 सीटें मिलती हैं तो BJP के हिस्से में करीब 241 सीटें बचेंगी. यहीं से दूसरा सवाल पैदा होता है कि क्या BJP अपने सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले राज्य में इतनी बड़ी संख्या में सीटें सहयोगियों के लिए छोड़ेगी? यह सवाल BJP के सामने राजनीतिक दबाव बनाएगा. क्योंकि सीट छोड़ना सिर्फ गठबंधन धर्म निभाना नहीं है. इसका मतलब अपने मौजूदा विधायकों, दावेदारों और संगठन के नेताओं को टिकट से दूर करना भी हो सकता है.
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Prashant Rai is a digital journalist with over 9 years of experience in Hindi journalism, specializing in politics, crime, hyper-local reporting, and viral news. He currently serves as Chief Sub Editor at News1…
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