अमेठी के कार्यक्रम में ऐसा क्या हुआ?
सपा के पाले में आखिर क्यों गहराया शक?
आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब महाराजी देवी ने योगी आदित्यनाथ की तारीफ की हो. वह पहले भी कई बार मुख्यमंत्री से मुलाकात कर चुकी हैं. यही वजह है कि समाजवादी पार्टी के अंदर उन्हें लेकर हमेशा शक का माहौल बना रहता है.
इस शक की सबसे बड़ी वजह राज्यसभा चुनाव के दौरान देखने को मिली थी. जब सपा के मुख्य सचेतक मनोज पांडे समेत करीब 7-8 विधायकों ने बागी होकर बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी, उस समय महाराजी देवी वोट डालने ही नहीं पहुंचीं और उन्होंने अपनी तबीयत खराब होने का हवाला दे दिया. तभी से उन्हें बागी विधायकों की सूची में देखा जाने लगा.
महाराजी देवी और उनके परिवार का सियासी सफर
- 2022 विधानसभा चुनाव: महाराजी देवी ने अमेठी की हाई-प्रोफाइल सीट से बीजेपी के दिग्गज नेता ‘राजा’ संजय सिंह को भारी मतों से हराया.
- 1993 व 1996 चुनाव: पति गायत्री प्रजापति पहली बार 1993 में बहुजन क्रांति पार्टी और 1996 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन दोनों बार हार का सामना करना पड़ा.
- 2002 व 2007 चुनाव: गायत्री प्रजापति को लगातार दो और चुनावों (2002 और 2007) में शिकस्त झेलनी पड़ी.
- 2012 चुनाव और मंत्री पद: 2012 में अखिलेश यादव की सरकार बनने पर गायत्री प्रजापति ने चुनाव जीता और उन्हें राज्य का प्रभावशाली खनन मंत्रालय मिला.
- 2017 से अब तक: साल 2017 में लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में महिला की ओर से रेप का मामला दर्ज होने और अवैध खनन जांच के बाद से गायत्री प्रजापति जेल में बंद हैं.
पेंटर से मंत्री बनने तक का सफर
महाराजी देवी के पति गायत्री प्रजापति की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. अमेठी के पसराना गांव के एक बेहद गरीब कुम्हार परिवार में जन्मे गायत्री एक समय बीपीएल (BPL) कार्डधारक थे. उनका मन पुश्तैनी काम में नहीं लगा, तो वे रंगाई-पुताई (पेंटर) का काम करने लगे.
वे स्थानीय नाटकों में विदूषक (कॉमेडियन) की भूमिका भी निभाते थे. इसी दौरान वे छोटे-मोटे ठेके लेने लगे और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आए. मुलायम सिंह का हाथ सिर पर आते ही उनकी किस्मत बदल गई और वे धीरे-धीरे सपा के बड़े चेहरे बन गए.
अचानक बढ़ी संपत्ति और कानूनी शिकंजा
2012 में खनन मंत्री बनने के बाद गायत्री प्रजापति की संपत्ति में अचानक बेतहाशा बढ़ोतरी हुई. 2002 तक जो व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहा था, वह अचानक करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन गया. इसके बाद उन पर अवैध खनन और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे. 2017 में उन पर आपराधिक केस दर्ज हुआ और उन्हें जेल जाना पड़ा. जेल में रहने के दौरान उन पर हमला भी हुआ था.
क्या 2027 से पहले पार्टी बदलेंगी महाराजी देवी?
हालांकि राज्यसभा चुनाव में दूरी बनाने के बाद, जब अखिलेश यादव खुद गायत्री प्रजापति की बेटी की शादी में पहुंचे, तो लगा कि यह परिवार अभी भी सपा के साथ मजबूती से खड़ा है. लेकिन महाराजी देवी का बार-बार योगी आदित्यनाथ की तारीफ करना और अपने पति के लिए राहत की गुहार लगाना कुछ और ही इशारा करता है.
अमेठी सदर सीट पर बीजेपी को महाराजी देवी के मुकाबले एक मजबूत चेहरे की तलाश है. वहीं सपा पहले ही गौरीगंज से अपने विधायक राकेश प्रताप सिंह को बीजेपी में जाते देख चुकी है, ऐसे में वह महाराजी देवी को खोना नहीं चाहेगी. अब देखना यह होगा कि 2027 के चुनाव से पहले यह तारीफ केवल एक औपचारिक धन्यवाद है या किसी नए राजनीतिक मोड़ की शुरुआत.
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