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manav suthar shoes controversey: पहली पारी में 4 विकेट लेकर सनसनी मचाने वाले युवा भारतीय स्पिनर मानव सुथार जब भारत की दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने आए, तो वह सामान्य बैटिंग शूज के बजाय फुल बॉलिंग स्पाइक्स (लंबे लोहे के कीलों वाले जूते) पहनकर क्रीज पर उतर गए. बल्लेबाजी के दौरान मानव सुथार बार-बार पिच के ‘डेंजर ज़ोन में कदम रख रहे थे. इसे देखते ही श्रीलंका के कप्तान धनंजय डी सिल्वा भड़क गए उन्होंने तुरंत मैदानी अंपायर के पास जाकर इसका कड़ा विरोध जताया.
गॉल टेस्ट के चौथे दिन मानव सुथार ने बॉलिंग स्पाइक्स पहनकर की बल्लेबाजी, हुआ मैदान पर बवाल
पहली पारी में 4 विकेट लेकर सनसनी मचाने वाले युवा भारतीय स्पिनर मानव सुथार जब भारत की दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने आए, तो वह सामान्य बैटिंग शूज के बजाय फुल बॉलिंग स्पाइक्स (लंबे लोहे के कीलों वाले जूते) पहनकर क्रीज पर उतर गए. बल्लेबाजी के दौरान मानव सुथार बार-बार पिच के ‘डेंजर ज़ोन में कदम रख रहे थे. इसे देखते ही श्रीलंका के कप्तान धनंजय डी सिल्वा भड़क गए उन्होंने तुरंत मैदानी अंपायर के पास जाकर इसका कड़ा विरोध जताया. धनंजय की चिंता पूरी तरह जायज थी, क्योंकि मैच की अंतिम यानी चौथी पारी में श्रीलंका को ही इस टर्निंग ट्रैक पर विशाल लक्ष्य का पीछा करना है. ऐसे में स्पाइक्स से पिच पर बने गड्ढे भारतीय स्पिनरों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होते.
क्यों मना है फुल स्पाइक्स पहनकर बल्लेबाजी करना?
आईसीसी (ICC) के नियमों के मुताबिक, कोई भी बल्लेबाज जानबूझकर या लापरवाही से पिच के डेंजर ज़ोन (विकेटों के बीच का वह हिस्सा जहाँ गेंद टप्पा खाती है) को नुकसान नहीं पहुँचा सकता. बॉलिंग स्पाइक्स में नीचे की तरफ लंबी और नुकीली धातु की कीलें (Spikes) होती हैं, जो गेंदबाजों को ग्रिप देती हैं. यदि कोई बल्लेबाज इन्हें पहनकर दौड़ता है या क्रीज पर पैर घसीटता है, तो पिच की मिट्टी उखड़ जाती है. टर्निंग पिचों पर ये उखड़ी हुई मिट्टी या गड्ढे गेंदबाजों, विशेषकर स्पिनरों के लिए खतरनाक साबित होते हैं. वहाँ टप्पा खाते ही गेंद अप्रत्याशित रूप से टर्न और बाउंस लेती है, जिससे बल्लेबाजी करना असंभव हो जाता है. नियमों के तहत पहली गलती पर अंपायर बल्लेबाज और टीम को आधिकारिक चेतावनी देते हैं. यदि यह हरकत दोबारा होती है, तो विरोधी टीम के खाते में 5 पेनल्टी रन जोड़ दिए जाते हैं.
टेलंडर्स अक्सर ऐसा क्यों करते हैं?
क्रिकेट में यह कोई नई बात नहीं है, निचले क्रम के बल्लेबाज या मुख्य गेंदबाज अक्सर ऐसा करते पाए जाते हैं इसके पीछे दो मुख्य कारण होते हैं हैं. कई बार टीमें जानबूझकर अपने पुछल्ले बल्लेबाजों को ऐसा करने का इशारा करती हैं, ताकि वे अपनी बल्लेबाजी के दौरान पिच पर कुछ ‘रफ’ (खुरदरा हिस्सा) बना सकें, जिसका फायदा उनकी टीम के स्पिनर बाद में उठा सकें. गेंदबाज जब लंबे स्पैल फेंककर थक जाते हैं, या जब अचानक विकेट गिरते हैं, तो वे जल्दबाजी में बैटिंग शूज बदलने का आलस्य कर जाते हैं और उन्हीं जूतों में आ जाते
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
क्रिकेट इतिहास में पिच को नुकसान पहुँचाने या स्पाइक्स के इस्तेमाल को लेकर कई बड़े विवाद हुए हैं. पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान लाइव कैमरे पर अपने जूतों के स्पाइक्स से जानबूझकर पिच को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की थी, जिसके बाद उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. भारतीय स्पिनरों को भी अतीत में कई बार बल्लेबाजी या गेंदबाजी के फॉलो-थ्रू के दौरान अनजाने में डेंजर जोन में कदम रखने के लिए अंपायरों से कड़ी चेतावनी मिल चुकी है, जिसके कारण टीम पर पेनल्टी का खतरा मंडराने लगा था.
गॉल टेस्ट में मानव सुथार की इस हरकत ने मैच में रणनीतिक तनाव को बढ़ा दिया. जहाँ भारतीय खेमा इसे एक अनजानी भूल बता सकता है, वहीं श्रीलंकाई टीम इसे चौथी पारी से पहले पिच को खराब करने की एक सोची-समझी कोशिश के रूप में देख रही है. अंपायरों की मुस्तैदी ने मामले को संभाल लिया है, लेकिन खेल के चौथे दिन इस ‘स्पाइक कांड’ ने मुकाबले को और ज्यादा गरमा दिया इसमें कोई शक नहीं.
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राजीव मिश्रा, खेल पत्रकारिता में एक जाना पहचाना चेहरा है जो अपनी बेबाक विशलेषण के लिए जाने जाते है. वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स …
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