‘ना दूरी है ना खाई है, मोदी हमारा भाई है’ का चर्चित नारा देने वाले कुंवर बासित अली को यह बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसे बीजेपी के मुस्लिम आउटरीच और खासकर पसमांदा मुसलमानों को जोड़ने की मुहिम के एक अहम हिस्से के रूप में देखा जा रहा है.
बड़ी जिम्मेदारी मिलने पर क्या बोले बासित अली?
बीजेपी में अब क्या करेंगे बासित अली?
- बूथ स्तर पर मजबूती: हर जिले, मंडल और बूथ स्तर तक जाकर पार्टी के संगठन को धार दी जाएगी.
- सरकारी योजनाओं का प्रचार: ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र के तहत सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को हर घर तक पहुंचाया जाएगा.
- अल्पसंख्यक समाज से सीधा संवाद: मुस्लिम समुदाय के साथ लगातार संवाद कायम किया जाएगा, ताकि भ्रम और गलतफहमियों को दूर किया जा सके.
- विपक्ष के दुष्प्रचार का तोड़: विपक्षी दलों द्वारा मुसलमानों को भटकाने और डराने की राजनीति का सही तथ्यों के साथ जवाब दिया जाएगा.
पसमांदा समाज और बीजेपी का अंत्योदय फोकस
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह फैसला पसमांदा मुसलमानों को जोड़ने के लिए लिया गया है, तो उन्होंने बीजेपी की कार्यशैली को स्पष्ट किया. बासित अली ने कहा कि पार्टी में शामिल होने वाले हर कार्यकर्ता का पहला लक्ष्य ‘अंत्योदय’ यानी समाज के अंतिम व्यक्ति और गरीब-पिछड़ों का कल्याण करना होता है.
उन्होंने बताया कि जो समाज हाशिए पर छूट गया है, उसकी चिंता करना और सेवा के जरिए लोगों का दिल जीतना ही बीजेपी की प्राथमिकता है. इसी उद्देश्य के साथ वे समाज के बीच जाएंगे और लोगों को पार्टी की विचारधारा से जोड़ेंगे.
सपा और कांग्रेस पर बासित अली का तीखा हमला
समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के इस आरोप पर कि BJP चुनाव से ठीक पहले मुसलमानों को भ्रमित करने के लिए ऐसे पद बांट रही है, बासित अली ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने हमेशा मुसलमानों का इस्तेमाल सिर्फ वोट बैंक की तरह किया है.
विपक्ष पर बासित अली के प्रमुख आरोप
झूठे मुकदमों से राहत: सपा सरकार के दौरान मुस्लिम बाहुल्य थानों में साल में 2 से 3 हजार मुकदमे दर्ज होते थे, जो BJP शासन में घटकर बेहद कम रह गए हैं. BJP ने मुसलमानों को फर्जी मुकदमों से बचाया है.
योजनाओं में बिना भेदभाव के हिस्सेदारी: आज मुस्लिम समुदाय को बिना किसी भेदभाव के आवास, शौचालय, स्कॉलरशिप, सड़कें, अस्पताल और स्कूल मिल रहे हैं. यहां तक कि हज का कोटा भी दोगुना इस सरकार के दौरान ही हुआ.
सपा-कांग्रेस का रवैया: बासित अली के मुताबिक, सपा ने मुस्लिम युवाओं का इस्तेमाल केवल दलाली के लिए किया, जबकि कांग्रेस ने समाज में मुसलमानों की ऐसी छवि बनाई जिससे उन्हें शक की निगाह से देखा जाए.
शिवपाल यादव के बयान पर सियासी पलटवार
उन्होंने कहा कि सपा नेताओं की नीयत में खोट है. यदि वे वास्तव में मुस्लिम समाज की भलाई चाहते हैं, तो अखिलेश यादव को हटाकर आजम खान को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष क्यों नहीं बना देते? 18% आबादी वाले समाज को केवल बहकाने और लटकाने-भटकाने के लिए ऐसे बयान दिए जाते हैं.
अभियान की शुरुआत आज से ही
अपनी नई भूमिका को लेकर बेहद गंभीर दिख रहे कुंवर बासित अली ने साफ कर दिया है कि वे अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में एक दिन की भी देरी नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन पर जो भरोसा जताया है, उस पर वे खरा उतरेंगे और आज से ही पसमांदा समाज व अल्पसंख्यक समुदाय के बीच जाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का काम शुरू कर रहे हैं.
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