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लखनऊ/रामपुर : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने बुधवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान और उनके छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम खान से रामपुर जेल में मुलाकात की. जेल में करीब एक घंटे चली इस मुलाकात के बाद शिवपाल आजम खान की पत्नी से मिलने उनके घर भी गए. इसके बाद वह आजम खान के बड़े बेटे अदीब आजम खान के साथ जौहर विश्वविद्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने अपने दिल की बातें मीडिया के सामने रखीं. शिवपाल ने कहा कि ‘इस संकट की घड़ी में आजम खान के परिवार के साथ खड़े होने के लिए वह जौहर विश्वविद्यालय आए हैं. साथ ही उन्‍होंने कहा कि 2027 में सपा की सरकार बनने पर आजम खान को गृह मंत्री बनाएंगे.’ शिवपाल के इस बयान को अखिलेश के PDA फॉर्मूले को धार देने के रूप में देखा जा रहा है. उनके ऐसा कहने के पीछे मायने क्‍या है, चलिए समझते हैं..

शिवपाल ने क्‍या-क्‍या कहा?
दरअसल, शिवपाल ने कहा कि आजम खान और जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर ‘जरूर सजा मिलेगी.’ यह पूछे जाने पर कि क्या जौहर विश्वविद्यालय अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनेगा, शिवपाल ने कहा, ‘बिल्कुल, यह विश्वविद्यालय एक मुद्दा होगा.’ उन्होंने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और पेपर लीक भी चुनावी मुद्दे बनेंगे. जेन-जी के विरोध प्रदर्शनों पर राजनीति करने और उनके आंदोलन को भुनाने के सवाल पर शिवपाल ने कहा कि समाजवादी पार्टी जेन-जी सहित सभी छात्रों को साथ लेकर आंदोलन करेगी.

उन्‍होंने कहा कि इस चुनावों में मजबूती से लड़ेंगे और अखिलेश यादव को मुख्‍यमंत्री बनाना है. इस पर वहां मौजूद एक शख्‍स ने कहा कि और आजम भाई को रक्षा मंत्री. इस पर शिवपाल यादव ने कहा कि रक्षा मंत्री से पहले उन्‍हें गृह मंत्री बनाएंगे. यह सुन वहां खड़े सभी लोग तालियां बजाने लगते हैं.

शिवपाल के बयान के राजनीतिक मायने समझें
शिवपाल के ऐसा कहने के पीछे कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. सबसे पहले तो इसे पीडीए फॉर्मूले के तहत मुस्लिम वोटरों पर एक संकेतात्‍मक छाप छोड़ने के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि मुसलमान वोटरों को रिझाया जा सके और यह मैसेज जाए कि आजम खान के साथ पार्टी कितनी मजबूती से खड़ी है. पश्चिमी यूपी में आजम खान की मजबूत पकड़ को पार्टी खोना नहीं चाहती और वह हर हाल में 2027 में इसे भुनाना चाहती है, ताकि दलितों के साथ ही मुलसमान वोटरों को भी अपने पक्ष में ज्‍यादा से ज्‍यादा किया जा सके.

राजनीतिक विश्‍लेषक प्रोफेसर आरबी सिंह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपने-अपने राजनीतिक और सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुट गए हैं. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव का जेल में आजम खान से मिलना और उनके समर्थन में यह कहना कि अगर सपा की सरकार बनती है तो आजम खान को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी, इसे मुस्लिम मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा सकता है.

उनके अनुसार, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव का आजम खान के समर्थन में यह कहना कि सरकार बनने पर उन्हें गृह मंत्री बनाया जा सकता है, उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा सकता है. इसे केवल व्यक्तिगत समर्थन के तौर पर नहीं, बल्कि मुस्लिम मतदाताओं तक एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है. आजम खान लंबे समय से सपा के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में रहे हैं और रामपुर तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनका प्रभाव रहा है.

प्रो. सिंह मानते हैं कि उत्तर प्रदेश में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी भी सक्रिय है, इसलिए मुस्लिम मतदाताओं के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ना स्वाभाविक है. वहीं, बहुजन समाज पार्टी भी आगामी चुनाव को देखते हुए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और अपने पारंपरिक वोट आधार को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रही है. कुल मिलाकर, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सभी दल अपने-अपने सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने में जुटे हैं. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कौन-सी पार्टी इन समीकरणों को प्रभावी वोट में बदल पाती है. शिवपाल यादव का आजम खान पर भरोसा सपा के पुराने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश माना जा सकता है. लेकिन 2027 में इस रणनीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सपा मुस्लिम मतदाताओं के साथ-साथ पिछड़े, दलित और युवा मतदाताओं को कितना व्यापक राजनीतिक गठजोड़ दे पाती है.

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