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90 के दशक में बॉलीवुड की इस मशहूर मियां-बीवी जोड़ी ने फिल्मों की दुनिया में अलग-अलग मोर्चे पर दांव लगाया, लेकिन नतीजे बिल्कुल उलट रहे. एक ने बॉक्स ऑफिस पर राज किया तो दूसरा सुपरफ्लॉप रहा. आखिर दोनों ने ये फिल्में क्यों बनाईं, कौन-कौन से सितारे जुड़े थे और किसकी फिल्म ने मारी बाजी? जानिए पूरा दिलचस्प किस्सा…

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नई दिल्ली. 90 का दशक बॉलीवुड का वो दौर जब हर शुक्रवार को सिनेमाघरों के बाहर किस्मत के फैसले हुआ करते थे. हीरो-हीरोइन का पर्दे पर टकराना तो आम बात थी, लेकिन सोचिए क्या हो जब असल जिंदगी के ‘पति-पत्नी’ और बॉलीवुड की सबसे पसंदीदा जोड़ी ही बॉक्स ऑफिस पर बतौर प्रोड्यूसर और डायरेक्टर आमने-सामने आ खड़ी हो? एक तरफ थे बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र तो दूसरी तरफ थीं उनकी हमसफर ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी.

यह कहानी है 90 के दशक के उस दौर की, जब धर्मेंद्र ने बेटों के करियर को संवारने के लिए करोड़ों छापे. वहीं हेमा मालिनी ने एक नए सितारे पर दांव लगाया लेकिन बॉक्स ऑफिस के गणित ने इस ‘पावर कपल’ के बीच जीत और हार की एक ऐसी लकीर खींच दी, जो आज भी बॉलीवुड के गलियारों में याद की जाती है.

80 का दशक खत्म होते-होते धर्मेंद्र समझ चुके थे कि सिनेमा बदल रहा है. अपने होम प्रोडक्शन ‘विजेता फिल्म्स’ के तहत उन्होंने केवल फिल्में नहीं बनाईं, बल्कि भारतीय सिनेमा को दो बड़े एक्शन और रोमांटिक स्टार दिए सनी देओल और बॉबी देओल.

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साल 1990 में जब सनी देओल का करियर ढलान पर आ गया था तब धर्मेंद्र ने अपने बड़े बेटे सनी देओल के लिए फिल्म ‘घायल’ बनाने का फैसला किया. इस फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया था. कहानी एक मुक्केबाज अजय मेहरा की थी, जो अपने भाई की मौत का बदला लेने के लिए भ्रष्ट सिस्टम से भिड़ जाता है. उस दौर में इस तरह के रॉ और इंटेंस एक्शन की किसी ने कल्पना नहीं की थी.

‘घायल’ 22 जून 1990 को रिलीज हुई थी. उसी दिन आमिर खान की ब्लॉकबस्टर ‘दिल’ भी रिलीज हुई थी. इस जबरदस्त क्लैश के बावजूद ‘घायल’ ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया. करीब 2.5 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने भारत में लगभग 20 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया और उस साल की सबसे बड़ी हिट्स में शुमार हुई. फिल्म को 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स और नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला.

सनी देओल का करियर चमका तो हेमा मालिनी ने भी पर्दे के पीछे से काम करने का फैसला किया. धर्मेंद्र बतौर प्रोड्यूसर सफलता के झंडे गाड़े. वहीं, हेमा मालिनी ने एक अलग रास्ता चुना. वे सिर्फ प्रोड्यूसर ही नहीं बनीं, बल्कि उन्होंने निर्देशन की कमान भी संभाली. 1992 में वह फिल्म ‘दिल आशना है’ लेकर आईं. अस फिल्म के साथ वह अपने निर्देशन करियर में कुछ नया और आधुनिक करना चाहती थीं. वे एक ऐसी कहानी पर फिल्म बनाना चाहती थीं जो एक लड़की की अपनी बायोलॉजिकल मां की तलाश पर आधारित हो.

इस फिल्म की लीड एक्ट्रेस दिव्या भारती थीं. लेकिन इस फिल्म की सबसे खास बात थी इसका हीरो… हेमा मालिनी ने छोटे पर्दे (टीवी) के एक उभरते हुए एक्टर को चुना, जिनका नाम है शाहरुख खान. हेमा मालिनी उन शुरुआती लोगों में से थीं जिन्होंने शाहरुख के अंदर के सुपरस्टार को पहचाना और उन्हें यह बड़ा ब्रेक दिया. फिल्म में दिव्या भारती और शाहरुख खान के अलावा जितेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, डिंपल कपाड़िया, अमृता सिंह और सोनू वालिया जैसे दिग्गज सितारों की लंबी फौज थी.

25 दिसंबर 1992 को रिलीज हुई यह फिल्म दर्शकों की कसौटी पर खरी नहीं उतर सकी. भारी-भरकम स्टारकास्ट, खूबसूरत लोकेशंस और बड़े बजट के बावजूद फिल्म की स्क्रिप्ट लोगों को बांधने में नाकाम रही. फिल्म का बजट उस समय लगभग 2.5 से 3 करोड़ रुपये था, लेकिन यह घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 1.5 से 2 करोड़ रुपये के आस-पास ही सिमट कर रह गई और इसे ‘सुपरफ्लॉप’ घोषित कर दिया गया.

1995 में फिर धर्मेंद्र में इतिहास रचा. अपने छोटे बेटे बॉबी देओल के लिए पैसा लगाया. फिल्म का नाम है ‘बरसात’, जिसमें बॉबी के साथ ट्विंकल खन्ना ने डेब्यू किया था. राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी यह एक हाई-ऑक्टेन रोमांटिक-एक्शन फिल्म थी.

‘बरसात’ 1995 की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक थी. फिल्म ने आते ही सिनेमाघरों को हाउसफुल कर दिया. करीब 8.25 करोड़ के भारी-भरकम बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 33 से 34 करोड़ रुपये का कुल कारोबार किया और यह ‘सुपरहिट’ साबित हुई. नदीम-श्रवण का म्यूजिक इस फिल्म की सबसे बड़ी जान था। ‘हमको सिर्फ तुमसे प्यार है’, ‘लव तुझे लव मैं करता हूं’ और ‘नहीं यह हो नहीं सकता’ जैसे गाने आज भी 90 के दशक के प्रेमियों की प्लेलिस्ट में राज करते हैं.

90 के दशक का यह दौर धर्मेंद्र और हेमा मालिनी दोनों के लिए बेहद सीख देने वाला रहा. जहां धर्मेंद्र ने अपने पारिवारिक बैनर से एक्शन और युवाओं की नब्ज पकड़कर ‘घायल’ और ‘बरसात’ से करोड़ों रुपये छापे और सनी-बॉबी के करियर को हमेशा के लिए सेट कर दिया. वहीं, हेमा मालिनी का निर्देशन का प्रयोग बॉक्स ऑफिस पर भले ही असफल रहा, लेकिन उन्होंने इंडस्ट्री को शाहरुख खान जैसा चमकता हुआ सितारा दिया, जो आगे चलकर ‘बॉलीवुड का बादशाह’ बना.

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