मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में 2014 के बाद मौजूदा क्षमता का बड़ा हिस्सा तैयार हुआ. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इसका सबसे बड़ा उदाहरण बताया जा रहा है. इसके अलावा सोलर पावर, स्टार्टअप, डिफेंस एक्सपोर्ट, मेट्रो रेल, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन और नल से पानी की सुविधा जैसे क्षेत्रों में भी बड़े विस्तार का दावा किया गया है. आइए समझते हैं कि इन आंकड़ों में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर की कैसी तस्वीर सामने आती है.
DFC और एक्सप्रेसवे नेटवर्क में बड़ा विस्तार
2014 से पहले भारत में कोई ऑपरेशनल डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नहीं था. इसके बाद करीब 2,843 किलोमीटर का नेटवर्क तैयार होने का दावा किया गया है. इस लिहाज से मौजूदा ऑपरेशनल DFC नेटवर्क को पूरी तरह 2014 के बाद की उपलब्धि बताया गया है.
एक्सप्रेसवे के मामले में भी बड़ा विस्तार हुआ है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2014 में देश में करीब 1,000 किलोमीटर एक्सप्रेसवे नेटवर्क था. इसके बाद करीब 6,700 किलोमीटर अतिरिक्त नेटवर्क जुड़ा. इस तरह मौजूदा नेटवर्क का करीब 85 फीसदी हिस्सा 2014 के बाद तैयार होने का दावा किया गया है.
हाईवे और रेलवे में भी बदली तस्वीर
चार लेन और उससे ज्यादा क्षमता वाले नेशनल हाईवे को लेकर सामने आए आंकड़ों में भी बड़ा अंतर दिखाया गया है. 2014 में ऐसे राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई करीब 18,371 किलोमीटर बताई गई थी. इसके बाद इसमें करीब 45,516 किलोमीटर की वृद्धि का दावा किया गया है. आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा हाई-कैपेसिटी हाईवे नेटवर्क का करीब 60 फीसदी हिस्सा 2014 के बाद जोड़ा गया.
रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन में भी तेजी का दावा है. आंकड़ों के अनुसार, 2014 में करीब 21,800 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण हुआ था. इसके बाद इलेक्ट्रिफाइड नेटवर्क में करीब 69,800 किलोमीटर की वृद्धि बताई गई है. दावा है कि भारतीय रेलवे के इतिहास में हुए कुल विद्युतीकरण का करीब 69 फीसदी हिस्सा पिछले 12 सालों में पूरा हुआ.
मेट्रो और एयरपोर्ट में भी बढ़ी कनेक्टिविटी
शहरी परिवहन के मामले में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार भी प्रमुख आंकड़ों में शामिल है. मीडिया रिपोर्ट्स में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2014 में देश में करीब 250 किलोमीटर मेट्रो नेटवर्क था. इसके बाद करीब 1,000 किलोमीटर अतिरिक्त नेटवर्क जुड़ा. इस आधार पर मौजूदा मेट्रो नेटवर्क का करीब 75 फीसदी हिस्सा 2014 के बाद तैयार होने का दावा किया गया है.
एयरपोर्ट की संख्या में भी वृद्धि का दावा किया गया है. आंकड़ों के मुताबिक, 2014 में देश में 74 एयरपोर्ट थे. इसके बाद 164 नए एयरपोर्ट जोड़ने की बात कही गई है. इस हिसाब से आज के ऑपरेशनल एयरपोर्ट नेटवर्क का करीब 55 फीसदी हिस्सा 2014 के बाद जुड़ा बताया गया है.
सोलर पावर में 98 फीसदी हिस्से का दावा
ऊर्जा के क्षेत्र में सोलर क्षमता को लेकर सबसे बड़ा दावा सामने आता है. मीडिया रिपोर्ट्स में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2014 में भारत की सोलर क्षमता करीब 2.6 GW थी. इसके बाद इसमें करीब 162 GW की वृद्धि बताई गई है. इस आधार पर देश की मौजूदा सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता का करीब 98 फीसदी हिस्सा 2014 के बाद विकसित होने का दावा किया गया है. कुल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता भी 54 GW से बढ़कर करीब 248 GW होने की बात कही गई है. आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा ग्रीन एनर्जी क्षमता का करीब 78 फीसदी हिस्सा पिछले 12 सालों में जोड़ा गया.
डिफेंस एक्सपोर्ट और पोर्ट क्षमता में बढ़ोतरी
डिफेंस एक्सपोर्ट में भी बड़ा उछाल दिखाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. 2014 में भारत का रक्षा निर्यात करीब 700 करोड़ रुपए बताया गया था. इसके बाद यह बढ़कर करीब 38,424 करोड़ रुपए पहुंचने का दावा है. आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा रक्षा निर्यात क्षमता का करीब 98 फीसदी हिस्सा 2014 के बाद हासिल हुआ.
पोर्ट सेक्टर में भी क्षमता बढ़ने का दावा किया गया है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पोर्ट हैंडलिंग क्षमता करीब 800 MTPA से बढ़कर लगभग 2,760 MTPA अतिरिक्त क्षमता तक पहुंची. इसके आधार पर कुल मौजूदा पोर्ट क्षमता का करीब 71 फीसदी हिस्सा 2014 के बाद जोड़े जाने की बात कही गई है.
बिजली, गैस और जलमार्गों में भी विस्तार
- पावर सेक्टर में कुल क्षमता 249 GW से बढ़कर करीब 540 GW होने का दावा किया गया है. इसके मुताबिक मौजूदा कुल पावर क्षमता का करीब 54 फीसदी हिस्सा 2014 के बाद जोड़ा गया.
- गैस पाइपलाइन नेटवर्क को लेकर आंकड़ों में 15,000 किलोमीटर से बढ़कर करीब 26,000 किलोमीटर तक विस्तार की बात कही गई है. वहीं राष्ट्रीय बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क 2.9 लाख किलोमीटर से बढ़कर करीब 5 लाख ckm तक पहुंचने का दावा है.
- इनलैंड वाटरवेज के जरिए कार्गो क्षमता भी बढ़ी है. आंकड़ों के अनुसार, यह क्षमता 29 MMT से बढ़कर करीब 218 MMT हुई. सरकार के समर्थित आंकड़ों में मौजूदा रिवर-कार्गो क्षमता का करीब 87 फीसदी हिस्सा 2014 के बाद विकसित होने का दावा किया गया है.
नल का पानी और PNG कनेक्शन
घरों तक पाइप से पानी पहुंचाने के मामले में भी बड़ा बदलाव दिखाया गया है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2014 में करीब 17 फीसदी घरों तक नल से पानी पहुंच रहा था. यह आंकड़ा बढ़कर करीब 80 फीसदी होने का दावा किया गया है. इसके आधार पर मौजूदा टैप-वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर का करीब 79 फीसदी हिस्सा पिछले दशक में तैयार होने की बात कही गई है.
वहीं PNG कनेक्शन की संख्या भी 25 लाख से बढ़कर करीब 1.6 करोड़ होने का दावा किया गया है. आंकड़ों के मुताबिक, देश के मौजूदा पाइप्ड नेचुरल गैस इंफ्रास्ट्रक्चर का करीब 84 फीसदी हिस्सा 2014 के बाद विकसित हुआ.
स्टार्टअप से मेडिकल कॉलेज तक विस्तार
स्टार्टअप इकोसिस्टम के आंकड़े भी इस तस्वीर का अहम हिस्सा हैं. 2014 में देश में करीब 500 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप थे. अब इनकी संख्या करीब 2.30 लाख तक पहुंचने का दावा किया गया है. इस आधार पर मौजूदा स्टार्टअप इकोसिस्टम का करीब 99.8 फीसदी हिस्सा 2014 के बाद तैयार होने की बात कही गई है.
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी AIIMS और मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने का दावा है. आंकड़ों के मुताबिक, 2014 में देश में आठ AIIMS थे. इसके बाद 23 और AIIMS जुड़ने की बात कही गई है. इसी तरह MBBS सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर करीब 1.39 लाख होने का दावा किया गया है. मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी 387 से बढ़कर करीब 844 बताई गई है.
कुल मिलाकर, मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए ये आंकड़े 2014 के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर और कई प्रमुख सेक्टर में हुए विस्तार की एक तस्वीर पेश करते हैं. हालांकि, इनमें से कई आंकड़े सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करने वाले दावों पर आधारित हैं. इसलिए किसी भी आंकड़े को अंतिम तथ्य मानने से पहले संबंधित मंत्रालय, सरकारी डैशबोर्ड या आधिकारिक रिपोर्ट से उसका मिलान करना जरूरी है.
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