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दिल्ली के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल लोकनायक (एलएनजेपी) में बन रहा 1,570 बेड का मेडिसिन, मैटरनिटी और एडवांस्ड पीडियाट्रिक सेंटर तय समय से करीब छह साल पीछे चल रहा है। वर्ष 2023 तक मरीजों के लिए शुरू होने वाली इस परियोजना का अब 2028-29 तक चरणबद्ध तरीके से निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। देरी के साथ परियोजना की लागत भी 533.91 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,268.85 करोड़ रुपये हो गई है।

व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने संशोधित लागत को मंजूरी देते हुए परियोजना में हुई देरी और लागत बढ़ने पर गंभीर आपत्ति जताई है। समिति ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और निर्णय प्रक्रिया की जांच के लिए विजिलेंस जांच कराने के निर्देश दिए हैं। किसी स्तर पर अनियमितता मिलने पर जिम्मेदारी तय करने को भी कहा गया है।

परियोजना को 2019 में 533.91 करोड़ रुपये की प्रारंभिक स्वीकृति मिली थी। इसके तहत अस्पताल परिसर में 22 मंजिला नया ब्लॉक बनाया जा रहा है। निर्माण वर्ष 2020 में शुरू हुआ और इसे मई 2023 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, अब तक करीब 55 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। परियोजना पर 586 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं, जबकि बाकी काम के लिए 682.75 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की जरूरत बताई गई है।

लागत बढ़ने के प्रमुख कारण

दस्तावेजों के अनुसार लागत बढ़ने में सबसे बड़ा हिस्सा 94.61 करोड़ रुपये के आर्बिट्रेशन अवॉर्ड का है। इसमें 82.44 करोड़ रुपये मूल अवॉर्ड और 12.17 करोड़ रुपये ब्याज शामिल है। इसके अलावा जीएसटी की दर 12 से बढ़कर 18 प्रतिशत होने, स्टील-सीमेंट समेत निर्माण सामग्री व श्रम लागत बढ़ने और कोविड के बाद अस्पताल सेवाओं के मानकों में बदलाव को भी लागत वृद्धि का कारण बताया गया है।

जांच के घेरे में परियोजना

ईएफसी ने स्वास्थ्य विभाग से आर्बिट्रेशन विवाद की पृष्ठभूमि, घटनाक्रम, विधि विभाग की राय, अवॉर्ड के आधार और उसके वित्तीय प्रभाव समेत पूरी जानकारी सक्षम प्राधिकारी के सामने रखने को कहा है। समिति ने एसीबी और विजिलेंस में लंबित मामलों की स्थिति भी पेश करने के निर्देश दिए हैं। पूर्व ठेकेदार के खिलाफ कोई एफआईआर होने की स्थिति में नए टेंडर में उसकी पात्रता की जांच करने को कहा गया है।

अब अतिरिक्त लागत रोकने की शर्त

ईएफसी ने परियोजना को संशोधित लागत और निर्धारित समयसीमा में पूरा करने तथा निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की शर्त लगाई है। भविष्य में अतिरिक्त लागत बढ़ाने की अनुमति नहीं देने को भी कहा गया है।

इसलिए महत्वपूर्ण है यह अस्पताल

एलएनजेपी में दिल्ली के साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान समेत आसपास के राज्यों से भी गंभीर मरीज पहुंचते हैं। नए ब्लॉक के शुरू होने से अस्पताल की क्षमता में 1,570 बेड का इजाफा होगा। ऐसे में परियोजना की देरी का असर मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं और अस्पताल की अतिरिक्त क्षमता पर भी पड़ रहा है।

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