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साहिबाबाद। साहिबाबाद साइट-4 स्थित औद्योगिक क्षेत्र में शोधित पानी की लाइन बिछाने के दौरान एनजीटी ने मानकों का पालन होता हुआ माना है। पीसीबी की रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने इस मामले को निस्तारित कर योजना को हरी झंडी दे दी है। हालांकि योजना के तहत 90 फीसदी काम पहले ही पूरा हो चुका है।


मामले की सुनवाई एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की। इंदिरापुरम एसटीपी से औद्योगिक क्षेत्र को शोधित पानी पहुंचाने के लिए दो वर्ष से पाइप लाइन डालने का काम किया जा रहा है। वर्ष 2024 में कुछ लोगों ने एनजीटी में याचिका दायर कर पाइपलाइन बिछाने के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। पूर्व में सुनवाई करते हुए एनजीटी ने पीसीबी और जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी। एनजीटी के निर्देश पर यूपीपीसीबी ने 5 अगस्त को अपनी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की। रिपोर्ट एक अगस्त को किए गए स्थल निरीक्षण पर आधारित है। इसके मुताबिक इंदिरापुरम स्थित 56 एमएलडी एसटीपी और 40 एमएलडी टीएसटीपी से शाेधित पानी साहिबाबाद साइट-4 की 1,400 से अधिक औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों की भूजल पर निर्भरता कम करना है। यूपीपीसीबी को अपनी रिपोर्ट में जीआरएपी के उल्लंघन के मामले में परियोजना से जुड़े पक्ष पर 25 लाख का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया जा चुका है। एनजीटी की रिपोर्ट से संतुष्ट होने के बाद एनजीटी में केस की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति ने माना कि उनके पूर्व आदेश का पालन हो गया है। पीठ ने कहा कि अब किसी अन्य निर्देश की जरूरत नहीं है और निष्पादन आवेदन का निस्तारण कर दिया।

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