किशोर कुमार का बिहार के भागलपुर से रिश्ता बेहद खास था. खंडवा में जन्मे इस महान गायक की मां का मायका भागलपुर से जुड़ा था, जिसके चलते वह मुंबई में करियर बनाने के बाद भी लंबे समय तक शहर आते रहे. वह खासकर दुर्गा पूजा के दौरान भागलपुर पहुंचते और स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे. 1970 में अपनी आखिरी यात्रा के दौरान भी वह शहर में साइकिल चलाते और मिठाई खरीदते नजर आए थे.
नई दिल्ली. किशोर कुमार की आवाज ने भले ही मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री पर दशकों तक राज किया, लेकिन उनके दिल का एक कोना बिहार के भागलपुर में भी बसता था. खंडवा में जन्मे इस महान गायक का इस शहर से रिश्ता इतना गहरा था कि मुंबई में शोहरत हासिल करने के बाद भी वह लंबे समय तक यहां लौटते रहे. खासकर दुर्गा पूजा के दौरान उनके भागलपुर पहुंचने की यादें आज भी स्थानीय लोगों के बीच चर्चा में हैं. दिलचस्प बात यह है कि यहां वह किसी सुपरस्टार की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य और शहर के आम आदमी की तरह वक्त बिताते थे. कभी रिश्तेदारों के घर पहुंचते, कभी साइकिल से मिठाई लेने निकल पड़ते और कभी गंगा की सैर करते. आखिर भागलपुर से उनका ऐसा कौन-सा रिश्ता था, जो उन्हें बार-बार यहां खींच लाता था?
बॉलीवुड में किशोर कुमार का नाम आते ही उनकी आवाज, अनोखा अंदाज और सदाबहार गानों की याद आती है. मध्य प्रदेश के खंडवा में जन्मे किशोर कुमार ने मुंबई को अपनी कर्मभूमि बनाया और हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय गायकों में शुमार हुए. लेकिन उनकी जिंदगी का एक बेहद खास हिस्सा बिहार के भागलपुर से भी जुड़ा था. यह रिश्ता सिर्फ संयोग नहीं था, बल्कि उनकी मां के परिवार की जड़ें इसी शहर में थीं. यही वजह रही कि मुंबई में करियर बनाने के बाद भी किशोर कुमार का भागलपुर आना-जाना लंबे समय तक बना रहा.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, किशोर कुमार की मां गौरी देवी का मायका भागलपुर के आदमपुर इलाके की राजबाड़ी से जुड़ा था. उनके नाना को अलग-अलग जगह शिवचंद्र बनर्जी और सतीश चंद्र बनर्जी के नाम से संदर्भित किया गया है, इसलिए नाम को लेकर अंतर मिलता है. भागलपुर में मौजूद राजबाड़ी उनके मातृ परिवार से जुड़ी महत्वपूर्ण जगह मानी जाती है.
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किशोर कुमार का बचपन भी इस पारिवारिक माहौल से जुड़ा रहा. द टेलीग्राफ की रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के हवाले से बताया गया है कि वह बचपन में भागलपुर की राजबाड़ी में समय बिताते थे. बाद में जब वह मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गए, तब भी शहर से उनका रिश्ता खत्म नहीं हुआ.
किशोर कुमार की भागलपुर से जुड़ी सबसे दिलचस्प यादों में उनकी दुर्गा पूजा यात्राएं शामिल हैं. किशोर कुमार मुंबई जाने के बाद भी 1960 के दशक तक लगभग हर साल दुर्गा पूजा के दौरान भागलपुर आते थे. इतना ही नहीं, वह स्थानीय कालीबाड़ी और दुर्गाबाड़ी पूजा समितियों की ओर से आयोजित नाटकों में हिस्सा भी लेते थे.यानी शहर से उनका रिश्ता केवल रिश्तेदारों से मिलने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह स्थानीय सांस्कृतिक गतिविधियों का भी हिस्सा बनते थे.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किशोर कुमार की भागलपुर की आखिरी यात्रा 1970 में हुई थी. उस दौरान उन्होंने शहर के सैंडीज कंपाउंड मैदान में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. उनके साथ एक्ट्रेस और सिंगर सुलक्षणा पंडित भी थीं. उस यात्रा से जुड़ी एक तस्वीर जैसी याद आज भी स्थानीय लोगों के जेहन में है. एक स्थानीय निवासी ने बताया था कि उन्होंने 1970 में किशोर कुमार को माणिक सरकार चौक के पास साइकिल चलाते देखा था. वह फागू शाह की मिठाई की दुकान से मिठाई लेकर लौट रहे थे और उनके पीछे प्रशंसकों की भीड़ चल पड़ी थी.
किशोर कुमार की यही सादगी उनके भागलपुर कनेक्शन को और खास बनाती है. मुंबई में स्टारडम हासिल कर चुके इस स्टार के लिए भागलपुर वह जगह थी, जहां वह रिश्तेदारों के साथ वक्त बिताते, शहर में घूमते और अपनी जड़ों से जुड़े रहते थे. किशोर कुमार के रिश्तेदार सोमनाथ बनर्जी की यादों के मुताबिक, वह अपने मामा शानू बनर्जी के घर जाते थे. इसके अलावा सुल्तानगंज स्थित परिवार के बाग में आम खाने और गंगा में नाव से घूमने की यादें भी उनके रिश्तेदारों ने साझा की हैं.
भागलपुर का यह रिश्ता सिर्फ किशोर कुमार तक सीमित नहीं था. उनके बड़े भाई और अभिनेता अशोक कुमार की शादी भी इसी शहर से जुड़े परिवार में हुई थी. आज किशोर कुमार भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन भागलपुर में उनकी यादें राजबाड़ी, दुर्गा पूजा, साइकिल की सवारी और मिठाई की उस दुकान से जुड़ी कहानियों में आज भी जिंदा हैं.
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