Image Slider

नई दिल्ली. आम जिंदगी में हम जब किसी इंसान को नजर का चश्मा लगाए देखते है तो मन में पहला ख्याल यही आता है कि वो शख्स बहुत पढ़ाकू होगा ठीक उसके उल्टा जब किसी खिलाड़ी को पहली नजर में चश्मा लगाए देखते है तो दिल यहीं कहता ये क्या खेलेगा. इसके उलट भारतीय क्रिकेट इतिहास में कुछ ऐसे खिलाड़ी भी रहे जो नजर के चश्मे के साथ मैदान पर चमत्कार करते नजर आए. खासतौर पर तीन ऐसे फिरकी के फनकार आए जो इतिहास बना गए.

पारंपरिक नजर का चश्मा (प्रिस्क्रिप्शन स्पेक्टाकल्स) पहनकर गेंदबाजी, और वो भी सटीक स्पिन गेंदबाजी करने की हो, तो यह दृश्य बेहद अनोखा और ऐतिहासिक बन जाता है भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ऐसे कई जादुई स्पिनर हुए हैं, जिन्होंने चश्मा पहनकर मैदान पर कदम रखा और दुनिया के बड़े से बड़े बल्लेबाजों की गिल्लियां बिखेर दीं. याद कीजिए वो बडे़ बड़े फ्रेम में मोटा लेंस लगाकर घंटो गेंदबाजी करना और अपने फन ने सामने दुनिया को घुटने पर ला देना.

1. अनिल कुंबले “जंबो” का शुरुआती दौर

भारत के सबसे सफल गेंदबाज और टेस्ट क्रिकेट इतिहास के महानतम लेग स्पिनरों में से एक, अनिल कुंबले ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के शुरुआती दौर में नियमित रूप से चश्मा पहनकर गेंदबाजी की थी. कुंबले को पारंपरिक रूप से गेंद को बहुत ज्यादा टर्न कराने के लिए नहीं, बल्कि अपनी सटीक लाइन-लेंथ, उछाल और मारक गति के लिए जाना जाता था. बाद में उन्होंने चश्मे की जगह कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था. कुंबले ने साल 1999 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच की एक पारी में सभी 10 विकेट (10/74) चटकाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था. वह टेस्ट इतिहास में 619 विकेट लेने वाले भारत के नंबर-1 गेंदबाज हैं.

2. नरेंद्र हिरवानी ड्रीम डेब्यू का रिकॉर्ड

मध्य प्रदेश के लेग स्पिनर नरेंद्र हिरवानी भी मैदान पर अपने चश्मे और सिर पर बंधे रुमाल (बैंडाना) के अनोखे लुक के लिए जाने जाते थे. हिरवानी ने अपनी लेग-स्पिन और गुगली से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों को अपनी उंगलियों पर नचाया. हिरवानी के नाम टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सबसे बेहतरीन और अकल्पनीय डेब्यू रिकॉर्ड दर्ज है. उन्होंने 1988 में वेस्टइंडीज के खिलाफ चेन्नई टेस्ट में अपने पहले ही मैच में 16 विकेट (136 रन देकर 16 विकेट) चटकाए थे, जो आज भी एक विश्व रिकॉर्ड है.

3. दिलीप दोषी उम्र को मात देने वाला स्पिनर

बाएं हाथ केऑर्थोडॉक्स स्पिनर दिलीप दोषी अपने पूरे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान हमेशा नजर का चश्मा पहनकर ही गेंदबाजी करते नजर आए. दोषी ने बेहद देर से, यानी 30 साल की उम्र में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया था, लेकिन अपनी कसी हुई गेंदबाजी से उन्होंने बेहद कम समय में बड़ी सफलताएं अर्जित कीं. उन्होंने भारत के लिए केवल 33 टेस्ट मैच खेले और इस छोटे से सफर में ही 114 टेस्ट विकेट अपने नाम कर लिए. वह टेस्ट क्रिकेट में 100 या उससे ज्यादा विकेट लेने वाले उन चुनिंदा गेंदबाजों में शामिल हैं, जिन्होंने 30 वर्ष की उम्र के बाद अपना पहला मैच खेला था.

चश्मा और सनग्लासेस पहनने वाले अन्य स्पिनर

दिग्गजों के अलावा, भारतीय क्रिकेट इतिहास में कुछ और भी ऐसे स्पिन गेंदबाज रहे हैं जिन्होंने चश्मे या सनग्लासेस के साथ अपनी अलग पहचान बनाई. मुंबई के इस ऑफ-स्पिनर का स्टाइल क्रिकेट जगत में सबसे अनोखा माना जाता था. रमेश पोवार नजर के चश्मे के बजाय शानदार रंगीन सनग्लासेस (चश्मा) पहनकर रन-अप लेते और गेंदबाजी करते थे. उनकी हवा में तैरती (लोपी) और फ्लाइटेड ऑफ-ब्रेक गेंदों ने घरेलू क्रिकेट में 470 से अधिक और अंतरराष्ट्रीय मैचों में 40 विकेट चटकाए. गेंदबाजी के दौरान चश्मा पहनना उनका ट्रेडमार्क स्टाइल बन गया था जिसे प्रशंसक बेहद पसंद करते थे. आधुनिक युग के चालाक लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल भी कई मौकों पर मैदान पर चश्मा पहने नजर आते हैं हालांकि वह गेंदबाजी के वक्त अक्सर इसे हटा देते हैं, लेकिन फील्डिंग के दौरान और नेट्स में अभ्यास करते समय वे नियमित रूप से स्पेक्टाकल्स (चश्मा) कैरी करते है.

क्रिकेट इतिहास गवाह है कि शारीरिक सीमाओं या आंखों की कमजोर रोशनी (मायोपिया) को इन खिलाड़ियों ने कभी अपने जुनून के आड़े नहीं आने दिया. चाहे वह अनिल कुंबले की ‘परफेक्ट 10’ वाली जादुई गेंदबाजी हो, हिरवानी का ऐतिहासिक डेब्यू हो, दिलीप दोषी की कसी हुई स्पिन हो या रमेश पोवार का बिंदास चश्मे वाला अंदाज; इन सभी ने साबित किया कि खेल में सफलता के लिए आंखों की रोशनी से ज्यादा सटीक ‘क्रिकेटिंग विजन’ और दृढ़ संकल्प की जरूरत होती है.

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||