1. जल से अभिषेक (जलाभिषेक)
महत्व: यह सबसे सामान्य और मुख्य अभिषेक है।
फल: जल से अभिषेक करने से मन को शांति मिलती है, तनाव व रोग दूर होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
2. दूध से अभिषेक (दुग्धाभिषेक)
महत्व: गाय के कच्चे दूध से शिवजी का अभिषेक किया जाता है।
फल: इससे उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु (लंबी आयु) और संतान सुख की प्राप्ति होती है। जिन लोगों के जीवन में कलह या अशांति होती है, उनके लिए दुग्धाभिषेक फलदायी है।
3. दही से अभिषेक
महत्व: पवित्र दही से महादेव का रुद्राभिषेक किया जाता है।
फल: दही से अभिषेक करने से कार्यक्षेत्र और व्यापार में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, नए वाहन या संपत्ति का योग बनता है और कार्यों में स्थिरता आती है।
4. शहद (मधु) से अभिषेक
महत्व: शुद्ध शहद से भोलेनाथ का अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है।
फल: इससे वाणी में मधुरता आती है, आकर्षण क्षमता बढ़ती है, पापों का नाश होता है और तपेदिक (TB) या फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों में राहत मिलती है।
5. देसी घी से अभिषेक (घृताभिषेक)
महत्व: गाय के शुद्ध देसी घी से शिव जी का अभिषेक किया जाता है।
फल: घृताभिषेक करने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है, वंश वृद्धि (संतान की प्राप्ति) होती है और असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है।
6. गन्ने के रस से अभिषेक
महत्व: सावन के महीने में गन्ने के रस से अभिषेक करना बहुत प्रचलित है।
फल: इससे आर्थिक तंगी दूर होती है, धन-धान्य और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है तथा पुराने कर्जों से मुक्ति मिलती है।
7. पंचामृत से अभिषेक
महत्व: दूध, दही, शहद, घी और शक्कर/गंगाजल के मिश्रण (पंचामृत) से अभिषेक किया जाता है।
फल: इससे मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, सभी प्रकार के सुख-साधन प्राप्त होते हैं और घर में मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं।
8. गंगाजल या तीर्थ जल से अभिषेक
महत्व: पवित्र नदियों के जल से अभिषेक करने का बहुत बड़ा पुण्य है।
फल: गंगाजल से अभिषेक करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।
9. इत्र (सुगंधित तेल) से अभिषेक
महत्व: सुगंधित इत्र या गुलाब जल से शिवजी का पूजन।
फल: इससे मान-सम्मान, प्रतिष्ठा बढ़ती है और चर्म रोगों में सुधार होता है।
10. सरसों के तेल से अभिषेक
महत्व: सरसों के तेल से किया जाने वाला विशेष रुद्राभिषेक।
फल: शत्रु नाश, मुकदमे में विजय और शनि दोष (ढैया/साढ़ेसाती) के कुप्रभावों को कम करने के लिए सरसों के तेल से अभिषेक किया जाता है।
अभिषेक करते समय ध्यान रखने योग्य मुख्य नियम:
अभिषेक की दिशा: जल या द्रव्य हमेशा उत्तर दिशा (जलहरी की दिशा) की ओर मुख करके अर्पित करें।
शिवलिंग पर पात्र: शिवलिंग पर जल या दूध कभी भी तांबे के पात्र से दूध न चढ़ाएं (तांबे के बर्तन में दूध विषैला माना जाता है)। तांबे के लोटे का उपयोग केवल जल अर्पित करने के लिए करें।
सामग्री चढ़ाने का क्रम: अभिषेक के अंत में हमेशा सादे जल या गंगाजल से शिवजी को स्नान कराएं और फिर बेलपत्र, भांग, धतूरा, भस्म एवं अक्षत अर्पित करें।
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



